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दशहरा



दशहरा का शास्त्रीय इतिहास क्या हैं ?
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को विजया दशमी कहा जाता हैं | इसके विस्तार से वर्णन को जानने के लिये - हेमाद्रि के व्रत भाग - 1 के प्रष्ट - 970 से 973 , निर्णय सिन्धु के पृष्ट- 69 से 70 , पुरुषार्थ चिन्तामणि के पृष्ट - 145 से 148 , व्रत राज के पृष्ट - 359 से 361 , कालतत्व विवेक के पृष्ट - 309 से 312 और धर्म सिन्धु के पृष्ट - 96 को देखा जा सकता हैं ..

इस दिन की प्रमुख भारतीय रीतियां क्या हैं ? 
इस दिन के प्रमुख कर्तव्य हैं - अपराजिता पूजन , शमी पूजन , खंजम दर्शन , सीमोल्लंघन , शस्त्रपूजा , अश्मंतक या अपाती वृक्ष की पत्तियों का आदान - प्रदान , नीराजन , विजय और शान्ति कर्म , नववस्त्र धारण तथा विधारंभ | अब एक - एक करके सब बारे में विस्तार से बताते हैं | 
.. सबसे पहले अपराजिता पूजन की विधि और फल जान लेना चाहिए ... अपराजिता एक लता होती हैं | इसमें नीले रंग के फूल आते हैं | दशहरे के दिन इस लता का पूजन करने से सर्वत्र विजय प्राप्त होती हैं | अगर कोई मुकदमा चल रहा हो तो दशहरे के दिन इस लता की पूजा करें और फिर जब मुकदमे की डेट पड़ें तो इस लता को छूकर जाने से मुकदमे में विजय हासिल होती हैं | धर्मसिन्धु के पृष्ट - 96 पर अपराजिता पूजा की विधि बताई गई हैं |
- दोपहर के बाद , घर के उत्तर - पूर्व दिशा में सफाई करके चंदन से अष्टकोण बनाना चाहिए , उस अष्टकोण में अपराजिता का पौधा या पौधे का गमला रखना चाहिए , इसके दाहिने ओर जया ओर बाईं ओर विजया का आवाहन करना चाहिये |

  
जया           विजया    
इस प्रकार रचना करके उसकी धूप , दीप , गंध , नैवेध , दक्षिणा आदि से पूजन करना चाहिए | अगर अपराजिता का पौधा ना मिले तो आप एक काग़ज पर चंदन से ये रचना करके पूजा कर सकते हैं | इसके बाद कहना चाहिए --" क्रियाशक्ति को नमस्कार ", उमा को नमस्कार | नमस्कार करके ये मंत्र 16 बार पढ़ें --
' अपराजितायै नमः , जयायै नमः विजयायै नमः '
इस प्रकार पूजा की हुई अपराजिता लता जिसके घर में लहलहाती हैं , उसके शत्रु नहीं होते , सभी मित्र बन जाते हैं | सभी जगह सम्मान और विजय प्राप्त होती हैं | पूजा के अंत में देवी से प्रार्थना करनी चाहिए - ' हे देवी अपनी रक्षा के लिए मैंने आपकी जो यथाशक्ति पूजा की हैं , उसे स्वीकार कर आप अपने स्थान को जा सकती हैं |

दशहरे के दिन शमी की पूजा का तरीका क्या हैं ? और उससे क्या फायदा हैं ? 
अपराजिता पूजन के बाद उत्तर - पूर्व दिशा में ही शमी के पौधे का पूजन करना चाहिए | पूजन मंत्र इस प्रकार हैं - 
शमी शमयते पापं शमी लोहित कंटका,
धारिणयअर्जुन  बाणानां रामस्य प्रिय वादिनी |
करिषयभाण यात्रायां यथाकालं सुखं भया ,
तत्र निर्विघ्नकर्त्री त्वं भव श्रीराम  पूजिता ||
इसके पूजन के फायदे इस प्रकार हैं 
1. शमी पूजन से पूर्व में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं , यानि पापों के फल से मुक्ति मिलती हैं | 
2. शमी पूजन से शनिकृत पीड़ा से मुक्ति मिलती हैं | 
3. शमी पूजन से दुख , दारिद्रय नष्ट हो जाता हैं , और सुख तथा उन्नति प्राप्त होती हैं |
4. दशहरे पर पूजित शमी के पौधे को देख कर यात्रा करने से कभी कोई दोष नहीं होता | 
सभी दोष शांत हो जाते हैं , करण भगण दोष ....| शमी को देखकर आप कभी भी यात्रा कर सकते हैं , मुहूर्त का विचार करने की जरुरत नहीं रह जाती हैं | 
हेमाद्रि , तिथितत्व , निर्णय सिन्धु और धर्म सिन्धु में शमी पूजा के विस्तार दिए गए हैं | यदि शमी का पेड़ ना मिले तो अश्मंतक वृक्ष की पूजा की जा सकती हैं | दक्षिण भारत में इस वृक्ष को अपाती के नाम से जाना जाता हैं | गुजरात उससे लगे प्रदेशों और गोवा , दमन और दीव में अपाती के पत्तों को एक - दूसरे को देना शुभ माना जाता हैं |

क्या इस सबका भी कोई संबंध पुराने रीति - रिवाजों से हैं ?
शमी पूजन के बाद सीमोल्लंघन करना चाहिए | यानि गांव या शहर की सीमा तक जाना चाहिए | अब देखो आजकल रावण वध के लिए शहर या गांव की सीमा तक जाना ही पड़ता हैं | बस , हो गया सीमोल्लंघन | कुल मिलाकर मॉरल ऑफ़ द स्टोरी ये हैं कि इस दिन दोपहर बाद घर से बाहर जरुर जाना चाहिए | इससे उत्साह , ओज , लाइव एनर्जी का लेवल बढ़ता हैं |
दशहरे के रीति - रिवाजों का अगला स्टेप हैं नीराजन यानी आरती | सीमोल्लंघन के बाद घर वापस आकर पुरुषों की आरती उतारी जानी चाहिए | अग्नि पुरुषों का तत्व हैं , यंग एनर्जी  हैं , इससे पुरुषों की आरती
उतारने से उनकी कान्फिडेंस लेवल बढ़ता हैं | पुराने ज्योतिर्विदों ने महसूस किया कि आश्विन शुक्ल दशमी यानि दशहरे वाले दिन आकाश में ग्रहों की स्थिति कुछ ऐसी होती हैं कि इस दिन आरती उतारे जाने से पुरुषों में जोश
और आत्मशक्ति का पारा ऊपर चढ़ जाता हैं | शायद इसीलिए इसकी व्यवस्था की गई थी | घर की स्त्रियों को चाहिए कि वो घर के पुरुषों की इस दिन आरती जरुर उतारें | करके देखिये फायदा जरुर नजर आयेगा |

खास चीज जो दशहरे के दिन करनी चाहिए ..
दशहरे के दिन, जल या गौशाला के निकट जाकर खंजन पक्षी के दर्शन करने चाहिए ... खंजन पक्षी का दूसरा नाम नीलकंठ भी है | कृत्य रत्नाकर ,वर्ष क्रिया कौमुदी ,मनु संहिता और याज्ञवल्क्य संहिता में नीलकंठ को शुभ शकुन दर्शाने वाला पक्षी बताया गया है तथा इसे खाने की मनाही बताई गयी है | तिथितत्व के पृष्ट 103 पर खंजन के देखे जाने के बारे में बताया गया हैं और वृहत्संहिता के अध्याय 45 में खंजन के दिखाई पड़ने और कब किस दिशा में दिखने से होने वाली घटनाओं के बारे में बिस्तार से बताया गया हैं .. आजकल नीलकंठ ही दुर्लभ हैं उसे नदी , तालाब या गौशाला के निकट जाकर देखना और भी मुश्किल हैं .. बेहतर हो कि आप कहीं से खंजन यानि नीलकंठ का फोटो लेकर अपने घर की उत्तरी दीवार पर लगातार उसका दर्शन करें ... इस मंत्र का जाप करें ...
‘ नीलग्रीव शुभ ग्रीव सर्वकाम फल प्रद , पृथि व्यामवतीर्णोंसि खंजरीट नमोस्तु ते ’
नीलकंठ के दर्शन अत्यंत शुभ फल प्रदान करने वाले  और मनुष्य की हर इच्छा को पूरी करने वाले माने जाते हैं ... 
इसके अलावा दशहरे के दिन शास्त्रों की पूजा भी अवश्य करनी चाहिए .. दक्षिण भारत के राज्यों -तमिलनाडू , कर्नाटक , केरल में इसी दिन विद्यारम्भ करना शुभ माना जाता हैं ...

राम - रावण बारे में 
विजया दशमी रावण पर राम की विजय यानि अहंकार पर विजय का उत्सव है | अगर इस दिन हम अपने अहंकार पर विजय पा सकें तो श्रीराम की सबसे बड़ी स्मृति होगी .. अपने अहंकार पर विजय हैं जिसकी कभी पराजय नहीं होती ... ये विजय करने के बाद दूसरी विजय नहीं करनी पड़ती .. ये आसान काम नहीं हैं इसके लिए हमें श्रीराम की शरण लेनी होगी ..

तो आईये सबसे पहले आपको श्री राम यंत्र का निर्माण बताते हैं ... 
step 1

                  
सबसे पहले नीचे की कोण की और मुंह किए हुए त्रिकोण बनाएं 
step 2

                     
अब इस त्रिकोण के विपरीत एक त्रिकोण बनाएं 
step 3

         

इस षटकोण के गोले से आवृत करें 
step 4 
 
इस गोले के बाहर आठ पंखुडियां यानि अष्टदल कमल बनाएं 
step 5 

इस आकृति का बाहरी आवरण एक वर्ग बनाएं जिसमें चारों दिशायें बाहर निकली हों

step 6 
 
इस आकृति में ध्यान से गिनतियां भर दें और बीच में लिखें रां रामाय नमः इस प्रकार आपका यंत्र तैयार हो जाएगा ... ये यंत्र लाल चंदन की स्याही बनाकर अनार की कलम से भोजपत्र पर लिखना चाहिए ... यदि आपके पास ये सब सामान न हो तो सादे सफेद कागज पर लाल रंग के पेन से ये यंत्र बनाकर इसका लैमिनेट करा लीजिए ..तब इस यंत्र की पूजा करिये ..
अगर आप पूरी गिनतियाँ न लिख पाएं .. तो निराश मत होईये .. स्टेप 5 तक यंत्र बनाकर बीच में ' रां रामाय नमः ' तक लिख लेंगे तो भी आपका काम  चलेगा | दरअसल ये गिनतियाँ गहन साधन साधना के वो स्टेप्स हैं या कहें कि कोडवर्ड है जिनसे सिद्ध साधक ये जान पाते हैं कि यंत्र में किस जगह ,किस देवता ,किस लोकपाल या किस दिक्पाल की ; किस मन्त्र से पूजा की जानी है | गृहस्थों को इतने टैक्निकल झंझटों में पड़ने की जरुरत नहीं है | आपके भगवान् का निवास आपकी भावना में है | 
यंत्र बनाकर इसे सामने रखें और धुप दीप से इसका पूजन करें | इसके बाद जप शुरू करें | मूलमंत्र यानी 'रां रामाय नमः' का 6 लाख की संख्या में जप बताया गया है | उसका दशांश -हवन ,उसका दशांश -तर्पण ,उसका दशांश -मार्जन और उसका दशांश ब्राह्मण भोज बताया गया है | --- लेकिन विजय दशमी के दिन आप छ: माला जप भी करेंगे तो फायदा होगा | 60 बार हवन 6 बार तर्पण करेंगे तो फायदा होगा | केवल जप भी करेंगे तो भी फायदा होगा | श्री राम के जप के लिये तुलसी या रुद्राक्ष की माला अच्छी रहती है | 
एंकर-आचार्य जी , ये तो हुआ श्रीराम यंत्र का निर्माण | इस यंत्र के आगे कौन सा मन्त्र पढ़ें ,एक ही मन्त्र है या  श्री राम के और और भी कई मन्त्र हैं और इन्हें पढ़ें से फायदा क्या है ? 
आचार्य जी -आज हम एक ही मन्त्र के अनेक स्वरूपों की चर्चा करेंगे | हर स्वरूप से अलग -अलग कामनायें पूरी हती हैं | मन्त्र हैं -'रां रामाय नमः' इसमें काम बीज -क्लीं ,शक्ति बीज हीं ,वाणी बीज -ऐं ,लक्ष्मी बीज -श्रीं और तार बीज -ॐ लगाकर छ: प्रकार से ये षडक्षर मन्त्र बनता है | यह मन्त्र पुरुषार्थ चतुष्टय यानी -धर्म ,अर्थ ,काम और मोक्ष देने वाला है | अलग -अलग कामनाओं के लिये इनके स्वरूप इस प्रकार हैं ; 
1.ज्ञान पाने के लिये -  ' रां रामाय नमः'  ,          
2.सारे संसार को सम्मोहित करने के लिये -  ‘ क्लीं रामाय नमः'
3.शक्ति शाली व्यक्ति बनने के लिये -  ‘ हीं रामाय नमः'
4.विद्या और बुद्धि पाने के लिये -  ‘ ऐं रामाय नमः'
5.धन और सामर्थ्य पाने के लिये -  ‘ श्रीं रामाय नमः'
6.शिव तत्व -सत्यं शिवं ; सुन्दरम के लिये -  ‘ ॐ रामाय नमः'    
एंकर- ये तो हुए छ : अक्षर वाले मन्त्र के छ: स्वरूप | यहाँ ये जानना भी जरुरी है कि सिद्ध मन्त्र से कामना पूरी करने के लिये क्या विशेस हवन सामग्री इस्तेमाल करनी चाहिये ? आचार्य जी ये भी बताइये ?
आचार्य जी -
1.बॉस को अपने लिये फेवरेबल बनाने के लिये - चन्दन के पानी में भीगे हुये चमेली के फूलों से हवन करना चाहिये |
2.सारे संसार को अपने वश में करने के लिये - नीले कमलों से होम करना चाहिये |
3.लक्ष्मी ,धन ,दौलत पाने के लिये - बेल के फूलों से हवन करना चाहिये | 
4.रोगों से बचकर ,लम्बी उम्र पाने के लिये - दूर्वा यानी दूब घास से हवन करना चाहिये |
5.धन ,वैभव और ख़ुशी हासिल करने के लिये - लाल कमल के फूलों से हवन करना चाहिये | 
6.मेघा और बुद्धि प्राप्त करने के लिये - नए पलाश के फूलों से हवन करना चाहिये | 
7.अगर कोई बीमार हो तो आधे गिलास में पानी में 108 बार मन्त्र पढ़ कर फूंक कर रोगी को पिलाने से फायदा होता है |  
एंकर - अगर कोई हवन न कर पाये तो क्या करें ?
आचार्य जी - तो ,जैसी कामना हो उसके अनुसार सामग्री श्री राम को चढ़ाने से भी फायदा होता है |



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