Acharya Indu Prakash
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छोटी दीवाली



दीपावली पर्व के ठीक एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली, रूप चौदस और काली चतुर्दशी भी कहा जाता है । नरक चतुर्दशी कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है । इसके अगले दिन दीपावली मनाई जाती है।’’ राजस्थान में रूप चौदस खास तौर पर मनाया जाता है । यह आयोजन पांच दिन तक चलता है । इस दिन महिलाएं घर की सफाई और खुद अपना श्रृंगार करती हैं । घर पर तरह- तरह के पकवान बनाए जाते हैं। दक्षिण भारत में इस दिन को बच्चों के मुंडन संस्कार के लिए शुभ माना जाता है। वहां इस दिन सुबह स्नान के बाद तेल में कुमकुम मिला कर लगाया जाता है और करेले को हाथ के प्रहार से तोड़ कर उसका रस माथे पर लगाया जाता है। करेले को नरकासुर के सिर का प्रतीक माना जाता है । इसके बाद तेल और चंदन लगा कर फिर स्नान किया जाता है । महाराष्ट्र में इस दिन चने के आटे और चंदन का उबटन लगा कर स्नान करने की परंपरा है । आंध्रप्रदेश में इस दिन सुबह पानी में तिल के कुछ दाने डाल कर स्नान करने की परंपरा है । नरक चतुर्दशी के दिन महाकाली और भगवान यमराज की पूजा भी की जाती है। माना जाता है कि इस दिन पूजा करने से यमराज नरक में नहीं भेजते । कई घरों में इस दिन एक विशेष दिया यमराज के लिए जलाया जाता है आरै दरवाजे के सामने रखा जाता है। कई घरों में रात को घर का सबसे बुजुर्ग सदस्य एक दिया जला कर पूरे घर में घुमाता है और फिर उसे ले कर घर से बाहर कहीं दूर रख कर आता है। घर के अन्य सदस्य अंदर रहते हैं और इस दिये को नहीं देखते। यह दीया यम का दीया कहलाता है और माना जाता है कि पूरे घर में इसे घुमा कर बाहर ले जाने से सभी बुराइयां और बुरी शक्तियां घर से बाहर चली जाती हैं ।

आज मिलेगा हर परेशानी से निजात ........... तो हो जाइये तैयार, आचार्य इंदुप्रकाश बतायेंगे ऐसा मंत्र जो भर देगा आपकी जिंदगी में खुशहाली ......... आज आपको बतायेंगे कि आपकी राशि के मुताबिक आप किस तेल से करें तैलास्नान , की धन की वर्षा हो आपके घर में ..........
चतुर्दशी से लेकर 4 दिनों के उत्सव का वर्णन भविष्योत्तर पुराण में विस्तार के साथ दिया हुआ है ........इस  दिन नरक से बचने के लिए शरीर में तेल की मालिश करके नहाना चाहिए .........सिर पर अपामार्ग, जिसे लोक भाषा में चिचिंडा या लट जीरा भी कहा जाता है ......उसकी टहनियों को सिर पर घुमाना चाहिए | 
इसके बाद तिल मिले हुए पानी से यमराज को तर्पण किया जाता है ....और उसके सात नाम लिये जाते हैं .....पुराणों की व्यवस्था के अनुसार नरक जाने से बचने के लिये एक दीप जलाना चाहिए ....और ब्रह्मा, विष्णु, शिव आदि के मंदिर में मठों, शस्त्रागार, बगीचों और कॉन्फ्रेंस रूम, भवन के उद्यानों, कुओं, घर के अन्दरूनी हिस्से में सिद्धों, जैन, साधुओं, बौद्ध, चामुण्डा, भैरव के मंदिरों में अश्वों और हाथियों की शालाओं में दीप जलाना चाहिये ...... चतुर्दशी को लक्ष्मी तेल में और गंगा सभी जलों में निवास करती है |

यम तर्पण मंत्र -

 

' यमय धर्मराजाय मृत्वे चान्तकाय च |
वैवस्वताय कालाय सर्वभूत चायाय च '' ||

 

कैसे पायें बेहतर ' सेहत '  :-

सिर पर लटजीरा या अपामार्ग की टहनी को 7 बार घुमाना चाहिए, फिर इसे सिर पर रख लें, साथ ही थोड़ी सी साफ़ मिट्टी भी सिर पर रखें और अब सिर पर पानी डालकर स्नान करें |

इसमें इस्तेमाल किये जानेवाला मंत्र -

 

 ' चिचड़ी बरियारी, रोग दोष लै जाय दीवारी '
इस मंत्र का 7  बार जप करें और स्नान करें |

 

कैसे पायें 'पढाई ' में सफलता :-

तुम्बी या प्रपुन्नाट को सिर से स्पर्श करा कर नाली में फेंक दें |
तैलस्नान के बाद कारीट के फल को पैर से कुचलना चाहिए |

कैसे हो धन वर्षा :-

(1 ) - चूंकि चतुर्दशी के दिन लक्ष्मी का निवास तेल में होता है, लिहाजा अपनी राशि के हिसाब से बताये गए तेल की मालिश करके स्नान करना चाहिए और नहाने के पानी में पीपल, गूलर, प्लक्ष, आम और बरगद की छाल को पानी में उबालकर स्नान करना चाहिए |
(2 ) - सनई की 6 डंडियाँ लेकर सूर्यास्त के आधे घंटे बाद अपने घर के बाहर ये डंडियाँ जला देनी चाहिए |
- डंडियाँ जलाते समय अपने परिवार के पितरों को स्मरण करना चाहिए |  
  मेष -नारियल के तेल में थोड़ी से हल्दी मिलकर मालिश करें | मालिश के थोड़ी देर बाद नहा लें | आपको लक्ष्मी की प्राप्ति होगी | 
वृष -सफ़ेद तिल के तेल से मालिश करें,और फिर नहा लें | घर में लक्ष्मी की बरसात होगी |  
मिथुन -नारियल के तेल की मालिश करें,थोड़ी देर बाद नहा लें | शुभ फल और लक्ष्मी की प्राप्ति होगी | 
कर्क -किसी भी मीठे तेल में केसर के तेल की दो बूंद डालकर मालिश करें | मालिश के थोड़ी देर बाद नहा लें | आपको लक्ष्मी की प्राप्ति होगी |
सिंह -सरसों के तेल से मालिश करें | मालिश के थोड़ी देर बाद नहा लें ,आपको लक्ष्मी की प्राप्ति होगी | 
कन्या -काले तिल के तेल से मालिश करें ,मालिश के थोड़ी देर बाद नहा लें | आपको लक्ष्मी की प्राप्ति होगी | 
तुला -लाल रंग के तेल से मालिश करें ,मालिश के थोड़ी देर बाद नहा लें ,आपको लक्ष्मी की प्राप्ति होगी | 
वृश्चिक -  सफ़ेद तिल के तेल से मालिश करें,और फिर नहा लें | घर में लक्ष्मी की बरसात होगी |
धनु -अलसी के तेल की मालिश करें ,थोड़ी देर बाद नहा लें | घर में लक्ष्मी की प्राप्ति होगी | 
मकर -चमेली के तेल से मालिश करें और नहा लें ,घर में लक्ष्मी की बरसात होगी |
कुम्भ -लेमन ग्रास के तेल से मालिश करें ,थोड़ी देर बाद नहा लें ,आपको लक्ष्मी की प्राप्ति होगी | 
मीन -रोजमेरी के तेल से मालिश करें और फिर नहा लें ,घर में धन की प्राप्ति होगी  |



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