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श्रीराम विवाहोत्सव



जैसे हिमवान ने भगवान शिव को पार्वती, महाराज सागर ने विष्णु जी को लक्ष्मी जी दी थी वैसे ही महाराज जनक ने श्रीराम को बेटी सीता समर्पित कर दी...

हिमवंत जिमि गिरिजा महेसहि हरिहि श्री सागर दई । 
तिमि जनक रामहि सिय समरपी बिस्व कल कीरति नयी ।। 
क्यों करै बिनय बिदेहु कियो बिदेहु मूरति सावँरीं । 
करि होमु बिधिवत गाँठि जोरी होन लागीं भावँरीं ।।

अर्थात्- जैसे हिमवान ने भगवान शिव को पार्वती, महाराज सागर ने विष्णु जी को लक्ष्मी जी दी थी वैसे ही महाराज जनक ने श्रीराम को बेटी सीता समर्पित कर दी । जिससे सुन्दरता की नयी कीर्ति चारो दिशाओं में फैल गई, जनक जी उनके सामने विनती कैसे करें जिनकी सांवली सूरत को देख कर उन्होंने अपना सुध-बुध खो दिया हो । फिर विधिपूर्वक हवन करके गठजोडी की गई और फेरें होने लगी ।
तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में भगवान राम और सीता के विवाह का बहुत सुन्दर वर्णन किया है तुलसीदास कहते है की उस समय सभी देवी देवता श्री राम का विवाह देखने स्वर्ग से पृथ्वी लोक आ गये थे । हिन्दू धर्म में विवाह को जीवन का बहुत महत्वपूर्ण अंग माना गया है । तुलसीदासजी कहते हैं कि ‘श्रीराम ने विवाह द्वारा मन के तीनों विकारों काम, क्रोध और लोभ से उत्पन्न समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया है ।
भगवान श्री राम का विवाह मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को हुआ था । इस लिए इसी दिन श्री राम विवाहोत्सव मनाया जाता है । इसे विवाह पंचमी के नाम से भी जाना जाता है । यह त्योहार नेपाल में बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है क्यों की माता सीता मिथिला नरेश जनक की पुत्री थी और आजकल मिथिला नेपाल का हिस्सा है ।    

अयोध्या में आज भी बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है विवाहोत्सव
अयोध्या में आज भी इस उत्सव में भव्य समारोह मनाया जाता है । विवाह पंचमी के दिन सैकड़ो वर्षों पुराने मंदिरों को फूलों से सजाया जाता है । रंगोली बनायी जाती है और रंग-बिरंगी लाइट से सजाया जाता है । नगर में भगवान राम की बारात निकाली जाती है, जो पूरे नगर से घूमते हुए, सभी मंदिरों से होते हुए विवाह समारोह तक आती है और फिर माता सीता और भगवान श्री राम का विवाह सम्पन्न होता है । भोग में यहां छप्पन-भोग बनाया जाता है और दूर-दूर से लोग इस समारोह को देखने यहां आते है । कई मंदिरों में भगवान राम और सीता के विशाल विग्रह सामने रख कर अनुष्ठान किये जाते है । मिथिला से भी बहुत से लोग यह समारोह देखने अयोध्या आते है । बहुत से घरों और मंदिरों में रामचरितमानस का निरंतर पाठ होता रहता है । मिथिला से आये हुए लोग आज भी उस काल की पोशाक पहेनकर श्री राम और माता सीता के विवाह का मंचन करते है ।

भारत और नेपाल के बीच इसी त्योहार की वजह से बहुत गहरे सम्बन्ध है । इस समय नेपाल घूमने जाने का बहुत अच्छा समय होता है । इस समय आप यहाँ की संस्कृति को अच्छे से समझ सकते है |
 



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