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एकादशी की शुरूआत



 

उत्पन्ना एकादशी

हमारे भारत वर्ष में कालांतर सें ही व्रत और त्योहारों को बड़े ही श्रद्धा भाव से किया जाता है । इसका प्रमाण वेदों और पुराणों में भी मिलता है । इन्हीं त्योहारों में से एक एकादशी का त्योहार अपना अलग ही पहचान रखती है, इस व्रत में पूरे दिन निराहार रहकर भगवान विष्णु और देवी एकादशी की पूजा की जाती है । सन् 2017 में मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष में ग्यारहवीं तिथि दिन मंगलवार, 14 नवम्बर को उत्पन्ना एकादशी पड़ रही है । कहते है इसी दिन से एकादशी व्रत करने की शुरुवात हुयी थी । कथा के अनुुसार एक बार असुरों से युद्ध करते समय भगवन विष्णु थक गए और बद्रिकाश्रम में आराम करने चले गए । जब भगवान विष्णु निद्रा अवस्था में थे तभी मुर नामक राक्षस ने उन्हें मरने का प्रयत्न किया । उसी वक्त विष्णु जी के शरीर से एक देवी का जन्म हुआ और जिन्होंने मुर का वध कर दिया । देवी के इस कार्य से प्रसन्न हो कर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि- ‘तुम्हारा उत्पŸिा मार्गशीर्ष एकादशी को हुआ है इसलिए तुम्हें एकादशी के नाम से जाना जायेगा और इस एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जायेगा और जो मनुष्य इस एकादशी के व्रत को करेगा वो मोहमाया के प्रभाव से मुक्त हो जायेगा ।

मोक्षदा एकादशी

मोक्षदा एकादशी इस वर्ष मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष में ग्यारहवीं तिथि, दिन गुरूवार, 30 नवम्बर को पड़ रही है । पुराणों के अनुसार आज से 5000 साल पहले इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण के मुख से गीता का उद्भव हुआ था, इसलिए इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और गीता का पाठ करना चाहिए । यह व्रत रखने से मनुष्य के सभी दुख कट जाते है |



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