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सोमवती अमावस्या का महत्त्व



हिन्दू धर्म में अमावस्या का महत्त्व बहुत अधिक है । मान्यता है कि इस दिन किये गए पुण्य से बहुत अधिक लाभ होता है । यही अमावस्या जब सोमवार को होती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहते है । 18 दिसम्बर को यह शुभ संयोग पड़ रहा है । पति की दीर्घ आयु के लिए स्त्रियों द्वारा यह व्रत रखा जाता है । शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत भी कहा गया है । यहां अश्वत्थ का अर्थ पीपल से है । इस दिन की महिमा महाभारत में मिलती है, महाभारत काल में पितामह भीष्म ने धर्मराज युधिष्ठर को इस व्रत के बारे में बताते हुए कहा था- इस दिन जो व्यक्ति किसी पवित्र नदी में स्नान करता है वो सुखी होता है और उसके सभी पाप नष्ट हो जाते है । इस दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को धन-वैभव की प्राप्ति होती है । ऐसी मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से पितरों को तृप्ति मिलती है । सोमवार भगवान शिव का भी दिन होता है इसलिए इस दिन स्नान के बाद शिव जी की पूजा करनी चाहिए । शिव जी को जल चढ़ाना चाहिए और बेल पत्र अर्पित करना चाहिए । शिवपुराण के अनुसार अमावस्या शब्द को दो भागों में विभक्त किया गया है- अमा व वस्या जहां अमा का अर्थ एकत्र, वस्या का अर्थ वास है और सोम का अर्थ अमृत होता है, अर्थात् जिसमे सभी एक साथ वास करते है उस अमावस्या को सोमवती अमावस्या के नाम से जानते है । सोमवती अमावस्या को पीपल के वृक्ष का भी विशेष महत्त्व है । मान्यता है कि पीपल के वृक्ष में सभी देवताओं का निवास होता है । इस व्रत में  विवाहित स्त्रियों को पीपल के पेड़ में दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चन्दन आदि से पूजा करें और पीपल के चारो तरफ 108 बार कच्चा धागा लपेट कर परिक्रमा करें । प्रत्येक परीक्रमा में कोई फल, मेवा या मिठाई चढ़ानी चाहिए और पूरी परिक्रमा के बाद चढ़ाई हुई चीज को ब्राह्मणों को दान दे दें । मान्यता है कि सोमवती अमावस का व्रत करने से सभी समस्यों का समाधान हो जाता है । इस दिन खडी हल्दी, धन और पान को विधि पूर्वक तुलसी के पौधे को अर्पित करें और विवाहित स्त्री सिंदूर, तुलसी को चढ़ा कर मांग में भरें तो उन्हें अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान प्राप्त होता है । सोमवती अमावस्या भगवान शिव के साथ चन्द्रमा का भी दिन कहा गया है । सोम का अर्थ चन्द्रमा भी होता है और पुराणों के अनुसार अमावस्या के दिन चन्द्रमा का सोमांश(अमृत) सीधे पृथ्वी पर आता है और सोमवती अमावस्या को इसका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है । इस लिए इस दिन किये गए व्रत, पूजन और धार्मिक कार्यों का का महत्त्व और अधिक बढ़ जाता है ।
 



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