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पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और ढाक



पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र- का प्रतीक चिन्ह चारपाई की आगे की दो टांगें हैं । इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है और राशि स्वामी सूर्य है । इस नक्षत्र के चारों चरण सिंह राशि में आते हैं । पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मंे लोगों पर सूर्य और शुक्र का प्रभाव जीवन भर बना रहता है । 
शुभ नक्षत्र- गृह प्रवेश, यात्रा आदि शुभ कार्यों के लिये यह नक्षत्र अच्छा माना गया है ।
शारीरिक गठन- इस नक्षत्र में जन्में पुरुषों का शरीर पुष्ट और मजबूत होता है । लेकिन इनके माथे पर चोट के निशान भी हो सकते हैं । इनका कद उत्तम होता है । इस नक्षत्र की महिलायें भी उत्तम कद की होती हैं ।
स्वास्थ्य- इस नक्षत्र में पैदा हुये जातकों की अगर शुक्र की स्थिती खराब चल रही हो तो मेरुदंड, दिल और सांस से जुड़ी समस्यायें भी हो सकती हैं ।
भौतिक सुख- इस नक्षत्र में पैदा हुये व्यक्तियों को स्त्री और धन सुख प्राप्त होता है ।
सकारात्मक पक्ष- इस नक्षत्र में पैदा हुये व्यक्ति अधिक चतुर होते हैं । ये त्यागी, साहसी और उदारवादी होते हैं । इस नक्षत्र में जन्में जातक अभिनय, संगीत और प्रबंधन के क्षेत्र में अच्छा नाम कमाते हैं । 
नकारात्मक पक्ष- अगर शुक्र और सूर्य की स्थिती ठीक ना हो तो जातक अभिमानी हो जाता है और छोटी-छोटी बातों पर उग्र हो जाता है । साथ ही कामुक और विलासी प्रवृत्ति के भी होते हैं । इन्हें कार्यों को पूरा करने की जल्दीबाजी लगी रहती है ।
शांति उपाय- शुक्र की शांति के लिये माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिये और श्री सूक्त का पाठ करना चाहिए । साथ ही दही, खीर, ज्वार, चांदी और चावल आदि चीजों का दान करना चाहिए । वहीं सूर्य की शांति के लिये सूर्योदय के समय भगवान सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए और सूर्य संबंधी अन्य उपचार करने चाहिए ।  
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का वृक्ष- ढ़ाक
ढ़ाक या पलाश का वृक्ष समूचे भारत वर्ष में पाया जाता है । इसके फूल बड़े ही आकर्षक होते हैं । यह मैग्नेलियोफाइटा वर्ग और ब्यूटिया वंश का वृक्ष है । इनकी जाति बी.मोनोस्पर्मा होती है । मुख्य रुप से पलाश दो प्रकार का होता है । एक सफेद फूल वाला पलाश और दूसरा लाल फूल वाला पलाश होता है । इन दोनों पलाशों के वैज्ञानिक नाम भी अलग-अलग होते हैं । लाल फूल वाले पलाश का वैज्ञानिक नाम ”ब्यूटिया मोनोस्पर्मा“ है और सफेद फूल वाले पलाश का वैज्ञानिक नाम ”ब्यूटिया पार्वीफ्लोरा“ है । ढ़ाक या पलाश का वृक्ष, झाड़ी या लता के रूप में पाया जाता है । इनकी फलियां चैड़ी होती हैं । यह छोटे आकार का वृक्ष होता है । इसकी छाल मोटी और रेशेदार युक्त होती है । पलाश कई सारे औषधिय गुणों को प्रदर्शित करता है । इसका फूल, छाल, बीज, पत्तियां और गोंद कई सारी औषधियां बनाने के काम आती हैं । इसका बीज पेट के कीड़े मारने के लिये बहुत ही उपयोगी है । इसकी छाल का काढ़ा बनाकर पीने से नाक, और मूत्र वाहिनीयों से होने वाले रक्तस्त्राव से आराम मिलता है । साथ ही इसकी जड़ का चूर्ण बनाकर सेवन करने से शुरुआती दौर का कुष्ठ रोग ठीक हो जाता है । अगर आपके शरीर में कहीं सूजन है तो पलाश के फूल की पोटली बनाकर उस जगह पर बांधने से सूजन खत्म हो जाती है । पलाश की पत्तियों से पत्तल भी बनायी जाती हैं । इन पत्तलों पर भोजन ग्रहण करने से कई प्रकार की शारीरिक व्याधियां दूर होती हैं । पलाश के वृक्ष का धार्मिक महत्व भी है । मान्यता के अनुसार पलाश की पत्तियों का तीन के झुंड में पाया जाना भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूपों को प्रदर्शित करता है । इसलिए कई धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ में पलाश के पत्ते का उपयोग किया जाता है । ज्योतिष शास्त्र में पलाश का प्रयोग ग्रहों की शांति के लिये भी किया जाता है ।



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