Acharya Indu Prakash
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आयु, बुद्धि, आरोग्यता, या चाहो सन्तान शिव पूजन विधवत करो, दुःख हरे भगवान



हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत प्रत्येक मास की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है । प्रदोष व्रत में भगवान शिव की उपासना की जाती है । यह व्रत हिंदू धर्म के सबसे शुभ व महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है...

प्रत्येक महीने की त्रयोदशी तिथि के सायकाल के समय को प्रदोष काल कहा जाता है, ऐसा माना जाता है कि प्रदोष के समय भगवान शिव जी कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं और समस्त देवी- देवता उनकी स्तुति करते हैं, प्रदोष काल में शिव जी की आराधना करने से समस्त प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलती है । माना जाता है कि प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष प्राप्त होता है । पुराणों के अनुसार प्रदोष व्रत करने से सांसारिक दुखों से निवृत्ति मिलती है । यह व्रत सुख संपदा युक्त जीवन शैली के अलावा हमें यश, कीर्ति, ख्याति, वैभव और सम्पन्नता देने में समर्थ होता है । भगवान शिव कि जो आराधना करने वाले व्यक्तियों की गरीबी, मृत्यु, दुःख और ऋणों से मुक्ति मिलती है । स्कंदपुराण के अनुसार जो भक्त प्रदोष व्रत के दिन शिवपूजा के बाद एकाग्र होकर प्रदोष व्रत कथा सुनता या पढ़ता है उसे सौ जन्मों तक कभी दरिद्रता नहीं होती । वर्ष 2017 के दिसम्बर महीने में पहला प्रदोष व्रत 1 और 15 दिसम्बर 2017 को शुक्र प्रदोष व्रत पड़ रहा है ।
 



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