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बाल मजदूरी



भारत में तो बाल मजदूरी की समस्या सदियों से ही है । कहने को तो सरकार बाल मजदूरी को खत्म करने के लिए बड़े-बड़े वायदे और घोषणाएं करती रही हैं, फिर भी होता कुछ भी नहीं है । पता नहीं क्यूं इतने प्रयासों के बाद भी भारत में बाल मजदूरी का खात्मा नहीं हो रहा है...

बचपन इंसान की जिन्दगी का सबसे अच्छा वक्त होता है जब आप अपने बचपन को याद करते होगे तो आपको याद आता होगा की उस वक्त ना ही आपको किसी प्रकार की चिंता थी और ना ही कोई जिमेदारी बस हर वक्त मौज मस्ती करना, थोड़ी बहुत पढ़ाई करना, दोस्तों के साथ खेलना, जिद करके अपनी मनपसन्द की चीज ले लेना, रूठ जाना तो मम्मी पापा का मनाना यही सब याद आता होगा आपको?  पर कई बच्चे ऐसे भी है जिनका बचपन बिलकुल भी ऐसा नहीं रहा या हम कह सकते है ऐसा नहीं है । क्यूंकि हमारे देश भारत में करीब 2 करोड़ बच्चे ऐसे है जो बाल मजदूर है, इन बच्चों का बचपन स्कूल की काॅपी किताबों और दोस्तों के बीच नहीं बल्कि होटल्स घरों, ढाबांे, फक्ट्रियों और चाय की दुकानों पर बीतता है । कोई भी ऐसा बच्चा जिसकी उम्र 14 वर्ष से कम हो और वह जीविका के लिए काम करे बाल मजदूर कहलाता है । दुःख की बात तो यह है कि एक बार इसमें आने के बाद बच्चे मजदूरी के इस दलदल में धसते ही चले जाते है । आज दुनिया में 215 मिलियन बच्चे ऐसे है जिनकी उम्र 14 वर्ष से कम है और यह सभी बाल मजदूरी कर रहे है यानी ऐसे बच्चे जिनका समय होटलों, घरों, झाड़ू पोछे और औजरांे के बीच बीतता है । दुनिया में सबसे ज्यादा बाल मजदूर भारत में ही है 1991 की जनगणना के हिसाब से भारत में बाल मजदूरों की संख्या 11.3 मिलियन थी जो की 2001 में बढ़कर 12.7 मिलियन के करीब पहुच गई ।
भारत में तो बाल मजदूरी की समस्या सदियों से ही है । कहने को तो सरकार बाल मजदूरी को खत्म करने के लिए बड़े-बड़े वायदे और घोषणाएं करती रही हैं, फिर भी होता कुछ भी नहीं है । पता नहीं क्यूं इतने प्रयासों के बाद भी भारत में बाल मजदूरी का खात्मा नहीं हो रहा है । इसके विपरीत बाल मजदूरी दिनो दिन बढ़ती ही चली जा रही है मौजूदा समय में गरीब बच्चे सबसे ज्यादा शोषण तथा बाल मजदूरी का शिकार होते है और जो गरीब बच्चियां होती हैं उनसे भी घरो में झाड़ू पोछा, साफ सफाई, खाना बनाना, ऐसे ही नाजाने कितने तरह-तरह के काम करवाए जाते । बाल मजदूरी बच्चों के मानसिक, शारीरिक, एवं सामाजिक हितों को घातक रूप से प्रभावित करती है । एक सर्वे में पाया गया है कि ज्यादातर बच्चे जो बाल मजदूरी करते है मानसिक रूप से अस्वस्थ होते है । समाज छोटे-छोटे बच्चो से बाल मजदूरी करवाने से बिलकुल भी नहीं हिचकिचाता यह जानते हुए भी की बालश्रम मानवाधिकार का उल्लंघन है और इसका उलंघन करने से उनको लेने के देने पड़ सकते है । पर शयद यह इसलिए भी सम्भव हो पा रहा है क्यूंकि सरकार के द्वारा बालश्रम के खिलाफ बनाए गए कानूनों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है । नियमो के मुताबिक 14 साल से कम उम्र का कोई भी बच्चा किसी भी फैक्टरी या खदान में काम करने के लिए किसी हालत में भी रखा नहीं जायेगा और न ही अन्य किसी ऐसे काम के लिए जिससे उसका शोषण हो । 15 से 18 वर्ष तक के किशोर भी किसी भी काम में तभी नियुक्त किये जा सकेगे, जब उनके पास अपना अधिकारिक तथा प्रमाणित फिटनेस प्रमाण पत्र हो । इस कानून में 14 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए हर दिन सिर्फ साढ़े चार घंटे काम करने की ही समय तय किया गया है । और साथ ही साथ इस विशेष आयु वर्ग के बच्चो से रात में काम करवाने पर प्रतिबन्ध लगाया है ।
एक रिपोर्ट तो यह तक दावा करती है कि समूचे विश्व के बाल श्रमिकों का एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा भारत में है । तथा करीब 50 प्रतिशत बच्चे अपने बचपन के अधिकारों से पुरे तरीके से वंचित हैं । ना उनके पास शिक्षा का कोई साधन है ना ही किसी भी प्रकार के पोषण का सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में सिर्फ करीब 2 करोड़ बाल मजदूर ही हैं तथा इसके विपरीत अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार तो कम से कम 5 करोड़ बच्चे बाल मजदूर हैं । हालांकि सरकार द्वारा फैक्ट्री अधिनियम, बाल अधिनियम, बाल श्रम निरोधक अधिनियम जैसे कई कानून बनाए गए पर यह सारे कानून बच्चों के अधिकार को सिर्फ नाम की सुरक्षा देते हैं । कई लोगों का कहना है कि बच्चे अपनी उम्र के अनुरूप कठिन काम गरीबी होने के कारण करते हैं । गरीबी बच्चे को बाल श्रम करने के लिए मजबूर करती है । भारत की बढ़ती जनसंख्या, दिन पर दिन घटती मजदूरी, तथा शिक्षा का अभाव और मौजूदा कानूनों का सही तरीके से लागु न हो पाना बाल श्रम के लिए जिम्मेदार हैं ।  कई बार बाल श्रम करने वाले बच्चों को यौन शोषण का शिकार भी होना पड़ता है बच्चो को खतरनाक उद्योगों में काम करने के कारण कैंसर और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ता है । एक तरह से बाल श्रमिकों का जीवन धरती पर रह कर भी नरक बन जाता है ।
आज बाल मजदूरी हमरे समाज तथा भारत पर लगा एक बहुत बड़ा कलंक है । वो भी तब जब हम भारत को दुनिया का सबसे युवा देश कहते है । बाल श्रम के खात्मे के लिए हमारी सरकार और समाज को साथ मिलकर चलना होगा । साथ ही साथ बाल मजदूरी से जुड़े सारे नियमो को बहुत ही सख्ती से लागू करना होगा । जिससे बाल श्रम में फसे हर बच्चे के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़े । शिक्षा का अधिकार भी सभी बच्चों के लिए कठोर रूप से लागू करने की जरूरत है । कानून जितने भी बना लिए जाये पर अगर उन पर पूरी तरह अम्ल न किआ गया तो वह व्यर्थ है इसलिए बाल श्रम जैसी गम्भीर समस्या का समाधान तभी हो होगा जब बाल श्रम से जूझ रहे हर बच्चे के पास उसका अधिकार पहुंचेगा ।
 



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