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वास्तु शास्त्र का स्वस्थ्य पर प्रभाव



शयनकक्ष के वास्तु का हमारे जीवन की शांति से गहरा संबंध है। शयनकक्ष ही वह जगह है जो हमें शांति और आराम देती है। वैवाहिक जीवन में सुख शांति के लिए वास्तु शास्त्र में कुछ उपाय बताए गए हैं। वास्तु सम्मत शयनकक्ष हमारे कष्टों को दूर करता है और हमारे जीवन में प्रसन्नाता लाता है। शयनकक्ष से जुड़े कुछ सुझावों पर ध्यान देकर आप उस कक्ष को अपने लिए लाभकारी बना सकते हैं।हमेशा दक्षिण-पश्चिम या दक्षिण बेडरूम में ही शयन करें।शयन कक्ष प्रकाश और आंखों को प्रिय लगने वाले रंगों से पेंट किया हो।बिस्तर पर एक गद्दे का प्रयोग करें।लकड़ी का पलंग वास्तु शास्त्र के अनुसार शुभ माना गया है।पलंग चैकोर या आयताकार होना चाहिए।आप बेडरूम में ताजे फूल रख सकते हैं।शयनकक्ष घर के दरवाजे के नजदीक नहीं होना चाहिए  पलंग शयनकक्ष के द्वार के पास नहीं होना चाहिए इससे चित्त में व्याकुलता और अशांति बनी रहेगी।शयनकक्ष का द्वार एक पल्ले का होना चाहिए।विद्यार्थियों के लिए पश्चिम दिशा में सिरहाना उपयुक्त होता है।गृहस्वामी का शयनकक्ष दक्षिण-पश्चिम कोण में अथवा पश्चिम दिशा में होना चाहिए। दक्षिण-पश्चिम अर्थात नैर्ऋत्य कोण पृथ्वी तत्व अर्थात स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।बच्चों, अविवाहितों अथवा मेहमानों के लिए पूर्व दिशा में शयनकक्ष होना चाहिए, परंतु इस कक्ष में नवविवाहित जोड़े को नहीं ठहरना चाहिए।अगर गृहस्वामी को अपने कार्य के सिलसिले में अक्सर टूर पर रहना पड़ता हो तो शयनकक्ष वायव्य कोण में बनाना श्रेयस्कर होगा।शयनकक्ष में पलंग या बैड इस तरह हो कि उस पर सोते हुए सिर पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर रहे। इस तरह सोने से प्रातः उठने पर मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर होगा। पूर्व दिशा सूर्योदय की दिशा है, यह जीवनदाता और शुभ है।उत्तर दिशा धनपति कुबेर की दिशा मानी गई है, अतः प्रातः उठते ही उस तरफ मुंह होना शुभ है।उत्तर दिशा की ओर सिर करके सोने से बुरे स्वप्न अधिक आते हैं और नींद ठीक से पूरी नहीं होती।यदि भवन में एक से ज्यादा मंजिलें हैं तो शयनकक्ष ऊपरी मंजिल पर होना चाहिए।

उपाय और वास्तु टिप्स सुख सौभाग्य पाने के उपाय

यदि आप हमेशा आर्थिक समस्या से परेशान हैं तो इसके लिए आप 21 शुक्रवार 9 वर्ष से कम आयु की 5 कन्यायों को खीर व मिश्री का प्रसाद बांटें।धन वर्षा के लिए आप अपने घर, दुकान या शोरूम में एक फव्वारा, या मछलीघर उत्तर या उत्तरपूर्व की ओर जिसमें 8 सुनहरी और एक काली मछली रखें। यदि कोई मछली मर जाय तो उसको निकाल कर नई मछली लाकर उसमें डाल दें।एक तांबे के पात्र में जल भर कर उसमें थोडा सा लाल चंदन मिला दें। उस पात्र को सिरहाने रख कर रात को सो जांय। प्रातः जल को तुलसी के पौधे पर चढा दें। धीरे-धीरे परेशानी दूर होगी।पूजा वाले 5 नारियल लें। भगवान शिव की मूर्ती या फोटो के आगे रख कर “ऊं श्रीं वर प्रदाय श्री नमः” मंत्र का पांच माला जाप करें फिर वो पांचों नारियल शिव जी के मंदिर में चढा दें। विवाह की बाधायें दूर होती जांयगी।प्रत्येक सोमवार को कन्या सुबह नहा-धोकर शिवलिंग पर “ऊं सोमेश्वराय नमः” का जाप करते हुए दूध मिले जल को चढाये और वहीं मंदिर में बैठ कर रूद्राक्ष की माला से इसी मंत्र का एक माला जप करे ! विवाह की सम्भावना शीघ्र बनती नजर आयेगीपूजा घर में अभिमंत्रित श्र्री यंत्र रखें।शुक्रवार की रात को सवा किलो काले चने भिगो दें। दूसरे दिन शनिवार को उन्हें सरसों के तेल में बना लें। उसके तीन हिस्से कर लें। उसमें से एक हिस्सा घोडे या भैंसे को खिला दें। दूसरा हिस्सा कुष्ठ रोगी को दे दें और तीसरा हिस्सा अपने सिर से घडी की सूई से उल्टे तरफ तीन बार वार कर किसी चैराहे पर रख दें। यह प्रयोग 40 दिन तक करें। कारोबार में लाभ होगा।यदि लगातार बुखार आ रहा हो और कोई भी दवा असर न कर रही हो तो आक की जड लेकर उसे किसी कपडे में कस कर बांध लें। फिर उस कपडे को रोगी के कान से बांध दें ! बुखार उतर जायगा।



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