Acharya Indu Prakash
Fashion Blog

It's common knowledge that a large percentage of Wall Street brokers use astrology.

Acharya Indu prakash

मोक्ष (NIRVANA)



उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष में किया जाता है । इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा करने का विधान है । व्रत वाले को दशमी के दिन रात में भोजन नहीं करना चाहिए । एकादशी के दिन ब्रह्रा बेला में भगवान का पुष्प, धूप, दीप, अक्षत से पूजन करके पूजन करना चाहिए । इस व्रत में केवल फलों का ही भोग लगाया जाता है । इस व्रत को करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है । सतयुग में एक महा भयंकर दैत्य हुआ था । उसका नाम मुर था । उस दैत्य ने इन्द्र आदि देवताओं पर विजय प्राप्त कर उन्हें, उनके स्थान से गिरा दिया । तब देवेन्द्र ने महादेव जी से प्रार्थना की” हे शिव-शंकर, हम सब देवता मुर दैत्य के अत्याचारों से दुःखित हो, मृत्युलोक में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं |

आप कृपा कर इस विपत्ति से बाहर आने का उपाय बताएं । शंकरजी बोले इसके लिये आप श्री विष्णु जी की शरण में जाएं । इन्द्र तथा अन्य देवता महादेवजी के बचनो को सुनकर क्षीर सागर गये । जहां पर भगवान श्री विष्णु शेषशय्या पर शयन कर रहे थे़ भगवान को शयन करते देखकर, देवताओं सहित सभी ने श्री विष्णु जी से दैत्य के अत्याचारों से मुक्त होने के लिये विनती की ।

श्री विष्णु जी ने बोला की यह कौन सा दैत्य है, जिसने देवताओं को भी जीत लिया है । यह सुन कर दैत्य के विषय में देवराज इन्द्र बताने लगे, उस दैत्य की ब्रह्मा वंश में उत्पत्ति हुई थी, उसी दैत्य पुत्र का नाम मुर है । उसकी राजधानी चन्द्रावती है। उस चन्द्रावती नगरी में वह मुर नामक दैत्य निवास करता है. जिसने अपने बल से समस्त विश्व को जीत लिया है । और सभी देवताओं पर उसने राज कर लिया । इस दैत्य ने अपने कुल के इन्द्र, अग्नि, यम, वरूण, चन्द्रमा, सूर्य आदि लोकपाल बनाये हैं । वह स्वयं सूर्य बनकर सभी को तपा रहा है । और स्वयं ही मेघ बनकर जल की वर्षा कर रहा है । अतः आप उस दैत्य से हमारी रक्षा करें ।

इन्द्र देव के ऐसे वचन सुनकर भगवान श्री विष्णु बोले -देवताओं मैं तुम्हारे शत्रुओं का शीघ्र ही संहार करूंगा । अब आप सभी चन्द्रावती नगरी को चलिए । इस प्रकार भगवान विष्णु देवताओं के साथ चल रहे थे । उस समय दैत्यपति मुर अनेकों दैत्यों के साथ युद्ध भूमि में गरज रहा था । दैत्य ने देवताओं को देखा तो उसने देवताओं से भी युद्ध प्रारम्भ कर दिया ।

जब दैत्यों ने भगवान श्री विष्णु जी को युद्ध भूमि में देखा तो उन पर अस्त्रों-शस्त्रों का प्रहार करने लगे। भगवान श्री विष्णु मुर को मारने के लिये जिन-जिन शास्त्रों का प्रयोग करते वे सभी उसके तेज से नष्ट होकर उस पर पुष्पों के समान गिरने लगे़ भगवान श्री विष्णु उस दैत्य के साथ सहस्त्र वर्षों तक युद्ध करते रहे़ परन्तु उस दैत्य को न जीत सके ।

अंत में विष्णु जी शान्त होकर विश्राम करने की इच्छा से बद्रियाकाश्रम में एक लम्बी गुफा में शयन करने के लिये चले गये । दैत्य भी उस गुफा में चला गया, कि आज मैं श्री विष्णु को मार कर अपने सभी शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर लूंगा। उस समय गुफा में एक अत्यन्त सुन्दर कन्या उत्पन्न हुई़ और दैत्य के सामने आकर युद्ध करने लगी । दोनों में देर तक युद्ध हुआ । उस कन्या ने उसको धक्का मारकर मूर्छित कर दिया । और उठने पर उस दैत्य का सिर काट दिया । वह दैत्य सिर कटने पर मृत्यु को प्राप्त हुआ । उसी समय श्री विष्णु जी की निद्रा टूटी तो उस दैत्य को किसने मारा वे ऐसा विचार करने लगे । यह दैत्य आपको मारने के लिये तैयार था । तब मैने आपके शरीर से उत्पन्न होकर इसका वध किया है । भगवान श्री विष्णु ने उस कन्या का नाम एकादशी रखा क्योंकि वह एकादशी के दिन श्री विष्णु के शरीर से उत्पन्न हुई थी ।

-:Nirvana:-

 

The Krishna Paksha Ekadashi which comes after Kartik Purnima is known as Utpanna Ekadashi. Utpanna Ekadashi falls in the month of Margashirsh as per the traditional North Indian Hindu calendar. This usually occurs during the waning phase of the moon (Krishna Paksha). As per the Gregorian calendar, the date occurs somewhere in the month of November or December. All Hindu devotees who plan to start with the Ekadashi vrats, Observance of this vrat is related with washing all the sins committed during the previous and present births, thereby leading to the attainment of Moksha, or salvation. Find out about the story of Uttpatti Ekadashi and how to observe it in the following lines.

How to Observe Utpanna Ekadashi Vrat:

Utpanna Ekadashi is one of the significant Ekadashis as it is associated with the origin of Ekadashi fasting. All Ekadashi fasting are dedicated to Goddess Ekadashi who is one of the Shaktis of Lord Vishnu. Ekadashi was born out of Lord Vishnu to annihilate Demon Mur who intended to kill sleeping Lord Vishnu. Hence Goddess Ekadashi is one of the protective powers of Lord Vishnu. Goddess Vaishnavi is another power of Lord Vishnu and part of Sapta Matrika.

Utpanna Ekadashi is associated with Lord Vishnu demolishing demon Murasura. Also, the birth of Ekadashi Mata takes place on this day. Lord Vishnu was observing his sleep. Meanwhile, demon Mura thought of killing the Lord and taking over him. To overcome this situation, Goddess

Ekadashi was born through divine creation who then killed the demon. Lord Vishnu was highly grateful to the Goddess and thanked her for her immense courage and devotion towards the Lord. Furthermore, he even blessed her and informed that anyone observing this Ekadashi would be blessed with salvation. Since then, most Hindu devotees observe a fast on Utpanna Ekadashi in order to attain liberation. Hence Utpanna Ekadashi is considered the birth anniversary of Ekadashi. Devotees, who pledge to observe yearly fasting, begin Ekadashi fasting from Utpanna Ekadashi.



Advertise

Your AD Here

Related Articles


Contact Us

Now You can publish your articles with us. if selected it will be publised in our magazines after taking your conformation