Acharya Indu Prakash
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भगवान धन्वन्तरि



धनतेरस आयुर्वेद के जनक धन्वंतरि की स्मृति में मनाया जाता है। आज ही के दिन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के जन्मदाता धन्वंतरि समुद्र से अमृत कलश लेकर प्रगट हुए थे। इसलिए इस शुभ तिथि पर धन्वंतरि भगवान का पूजन कर ‘धन्वंतरि जयन्ती’ मनाई जाती है। धन्वंतरि ईसा से लगभग दस हजार वर्ष पूर्व हुए थे। वह काशी के राजा महाराज धन्व के पुत्र थे। उन्होंने शल्य शास्त्र पर महत्त्वपूर्ण गवेषणाएं की थीं। उनके प्रपौत्र दिवोदास ने उन्हें परिमार्जित कर सुश्रुत आदि शिष्यों को उपदेश दिए। इस तरह सुश्रुत संहिता किसी एक की नहीं, बल्कि धन्वंतरि, दिवोदास और सुश्रुत तीनों के वैज्ञानिक जीवन का मूर्त रूप है। धन्वंतरि के जीवन का सबसे बड़ा वैज्ञानिक प्रयोग अमृत का है। उनके जीवन के साथ अमृत का कलश जुड़ा है। वह भी सोने का कलश। अमृत निर्माण करने का प्रयोग धन्वंतरि ने स्वर्ण पात्र में ही बताया था। उन्होंने कहा कि जब मृत्यु के विनाश के लिए ब्रह्मा आदि देवताओं ने सोम नामक अमृत का आविष्कार किया था। उसमे उनके रासायनिक प्रयोग के उल्लेख हैं। धन्वंतरि के संप्रदाय में सौ प्रकार की मृत्यु है। उनमें एक ही काल मृत्यु है, शेष अकाल मृत्यु रोकने के प्रयास ही निदान और चिकित्सा हैं। आयु के न्यूनाधिक्य की एक-एक माप धन्वंतरि ने बताई है। पुरुष अथवा स्त्री को अपने हाथ के नाप से 120 उंगली लंबा होना चाहिए, जबकि छाती और कमर अठारह उंगली। शरीर के एक-एक अवयव की स्वस्थ और अस्वस्थ माप धन्वंतरि ने बताई है। उन्होंने चिकित्सा के अलावा फसलों का भी गहन अध्ययन किया है। पशु-पक्षियों के स्वभाव, उनके मांस के गुण-अवगुण और उनके भेद भी उन्हें ज्ञात थे। मानव की भोज्य सामग्री का जितना वैज्ञानिक व सांगोपांग विवेचन धन्वंतरि और सुश्रुत ने किया है, वह आज के युग में भी प्रासंगिक और महत्त्वपूर्ण है । स्वास्थ्य उत्तम रखने के लिए इस मंत्र का जाप नित्य करना चाहिए ।

ऊॅं नमो भगवते वासुदेवाय

धन्वन्तरये

अमृत कलश हस्ताय

सर्वभय विनाशाय

सर्वरोग निवारणाय

त्रैलोक्य पतये

त्रैलोक्य निधये

श्री महाविष्णु स्वरुप

श्री धन्वन्तरि स्वरुप

श्री श्री श्री

औषध चक्र नारायणाय

 

Dhanvantri

 

Wh i l e Dh a n t e r a s marks the first day of the Diwali festival which spans upto five days, this day is also observed as Dhanvantri Jayanti –

 

 

The day Dhanvantri- the God of Ayurved who is r e g a r d e d t o b e a manifestation of Lord V i s h n u , w a s b o r n . According to legend when the demigods were defeated by the asuras, Indra Dev approached Lord Vishnu for a way to defeat the asuras. Lord Vishnu offered a tactful approach. He told Indra Dev and the other demigods to churn the ocean with the asuras to obtain objects of great value as well as the nectar of immortality which would enable the demigods to defeat the asuras.

 

The Mandara mountain was used as the churning rod, and Lord Shiv's snake, Vasuki was used as the rope to move Madara as is done with a churning rod. Among all the objects coming out of the ocean, the white elephant, nymphs, the flying horse and many more, out came a pleasant looking male person holding the jar of nectar. This was Dhanvantri.

 

Dhanvantri is regarded as the physician of the Gods and the God of ayurved and is regarded to have promulgated it in the world. He is usually depicted as Lord Vishnu wearing yellow garments with four hands holding a Shankh, Chakra, Jalukha and a pot of Amrit- the n e c t a r o f i m m o r t a l i t y. Dhanvantri is also considered to be the guardian deity of hospitals. Dhanvantri offers good health and protection from aakaal mrityu (untimely death). Chanting the following mantra everyday will enable you to live a healthy life.

 

O m N a m o B h a g v a t e

 

Vasudevay Dhanvantraye

 

Amrit kalash hastaay

 

Sarvbhay Vinashay

 

Sarvrog Nivaaranay

 

Treloky patye

 

Treloky Nidhye

 

Shri Maha Vishnu Swaroop

 

Shri Dhanvantri Swaroop

 

Shri Shri Shri

 

Aushadh Chakra

 

Narayanam



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