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पुत्र प्राप्ति का अनूठा व्रत



पुत्र प्राप्ति का अनूठा व्रत

पौश मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी व्रत 20 जनवरी को बुधवार के दिन है। पुत्रदा एकादशी अपने नाम के अनुसार ही पुत्र सुख प्रदान करने वाली है।

व्रत विधि: भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को इस व्रत का वर्णन करते हुए बताया है कि इस व्रत के देवता श्री नारायण हैं। जो व्यक्ति संतान सुख की इच्छा रखता है उसे पौष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत रखना चाहिए। व्रत रखने वाले को दशमी के दिन लहसुन, प्याज से रहित भोजन करना चाहिए। एकादशी के दिन प्रातः स्नानादि से निवृत होकर श्री नारायण की भक्ति पूर्वक पूजा करनी चाहिए और दीपदान करना चाहिए।

व्रत रखने वाले को दशमी के दिन से ही मन और वचन से ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए भगवान का ध्यान करते हुए अपना काम करना चाहिए। जो व्यक्ति यह व्रत रखता है उसे एकादशी के दिन पूरे दिन निराहार रहना होता है। शाम को चाहें तो फलाहार कर सकते हैं। द्वादशी के दिन ब्राह्मण को भोजन करवाकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद स्वयं भोजन करना चाहिए। द्वादशी के दिन भी सात्विक भोजन ग्रहण करें। इस प्रकार नियमपूर्वक जो लोग पुत्रदा एकादशी का व्रत करते हैं उनका व्रत ही सफल होता है।

संतान प्राप्ति के अचूक उपाय

1. संतान प्राप्ति के लिए पति-पत्नी दोनों को रामेश्वरम की यात्रा करनी चाहिए तथा वहां सर्प-पूजन करवाना चाहिए।

2. स्त्री में कमी के कारण संतान होने में बाधा आ रही हो, तो लाल गाय व बछड़े की सेवा करनी चाहिए। लाल या भूरा कुत्ता पालना भी शुभ रहता है।

3. विवाह के कई वर्ष बाद भी संतान न हो, तो मदार की जड़ को शुक्रवार को उखाड़ लें। उसे कमर में बांधने से स्त्री अवश्य ही गर्भवती हो जाएगी।

4. गर्भ धारण हो गया हो और गर्भपात का खतरा हो तो चांदी की एक बांसुरी गुरुवार के दिन राधा-कृष्ण के मंदिर में चढ़ाने से लाभ होगा।

5. यदि बार-बार गर्भपात होता है, तो शुक्रवार के दिन एक गोमती चक्र लाल वस्त्र में सिलकर गर्भवती महिला के कमर पर बांध दें। गर्भपात नहीं होगा।

6. जिन स्त्रियों के सिर्फ कन्या होती है, उन्हें शुक्र मुक्ता पहना दे तो पुत्र-रत्न की प्राप्ति होगी।

7. यदि बच्चे न होते हों या होते ही मर जाते हों, तो मंगलवार के दिन मिट्टी की हांडी में शहद भरकर श्मशान में दबायें। 8. संतान प्राप्ति के लिए इनमें से किसी भी मंत्र का नियमित रूप से एक माला प्रतिदिन जाप करें।

1.।। ऊँ श्रीं हृीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ।।

इनमें से आप जिस मंत्र का भी चयन करें उस पर पूर्ण श्रद्धा व आस्था रखें। विश्वासपूर्वक किये गये कार्यों से सफलता शीघ्र मिलती है। मंत्र पाठ नियमित रूप से करें। कृष्ण के बाल रूप का चित्र लगाएं। लड्डू गोपाल का चित्र या मूर्ति लगाना लाभदायक होता है।



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