Acharya Indu Prakash
Fashion Blog

It's common knowledge that a large percentage of Wall Street brokers use astrology.

Acharya Indu prakash

पिता पुत्र में प्रेम बढाये रथ सप्तमी



चीन ग्रंथों के अनुसार माघ शुक्ल पक्ष की सप्तमी को रथ आरोग्य सप्तमी के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान सूर्यदेव ने इसी दिन से सारे जगत को अपने प्रकाश से आलोकित करना आरम्भ किया था। इसलिए इस सप्तमी को सूर्य जयन्ती के रुप में भी मनाया जाता है। इस दिन सूर्य भगवान की आराधना करने से पुत्र, आरोग्य और धन की प्राप्ति होती है।सूर्य को आरोग्यकारक माना गया है। सूर्य की रोशनी के बिना संसार में कुछ भी नहीं होगा। सूर्य की किरणों में विटामिन डी होता है वैज्ञानिक दृष्टि से भी सूर्य की रोशनी में बहुत से चमत्कारी गुण छिपे हैं। सूर्य चिकित्सा का उपयोग आयुर्वेदिक पद्धति तथा प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में किया जाता है। शारिरिक दुर्बलता, हड्डियों की कमजोरी या हड्डियों के जोड़ो में दर्द के लिए भगवान सूर्य की आराधना करने से रोग से मुक्ति मिलती है। सूर्य की किरणों में कीटाणुओं का नाश करने वाले तत्व होते  है। सूर्य की ओर मुख करके सूर्य स्तुति करने से शारीरिक चर्मरोग आदि नष्ट हो जाते हैं। पुत्र प्राप्ति के लिए भी इस व्रत का महत्व माना गया है। इस व्रत को श्रद्धा तथा विश्वास से रखने पर पिता-पुत्र में प्रेम बना रहता है।माघशुक्ल सप्तमी तो सूर्य ग्रहण के तुल्य माना गया है। अरुणोदय बेला में उसमें स्नान करने से महान फल मिलता है। यदि 2 दिन अरुणोदय हो, तो पहला दिन लेना चाहिए। स्नान के विषय में यह स्मरण रहे कि जो माघ स्नान करते हों, वे इसी दिन अरुणोदय (पूर्व दिशा की प्रातः कालीन लालिमा) होने पर और नियमित स्नान करने वालों को सूर्योदय के बाद स्नान करना चाहिए। उगते हुए भगवान सूर्य को जल देना चाहिए। सूर्य को भक्ति तथा विश्वास के साथ प्रणाम करना चाहिए। उसके पश्चात सूर्य मंत्र का जाप 108 बार करना चाहिए। सूर्य मंत्र हैः- “ऊँ घृणि सूर्याय नमः”  अथवा “ऊँ सूर्याय नमः” इसके अतिरिक्त “आदित्य हृदय स्तोत्र” का पाठ करें।माघ शुक्ल सप्तमी में यदि ‘प्रयाग’ में हो, तो करोड़ों सूर्य ग्रहण के बराबर है। उसमें स्नान एवं अघ्र्य दान करने से आयु, आरोग्यता एवं संपत्ति का लाभ प्राप्त होता है। स्नान करने से पहले आक के 7 पत्तों और बेर के 7 पत्तों को, कसुंभा की बत्ती वाले तिल तैलपूर्ण दीपक में रख कर, उसको सिर पर रखें और, सूर्य का ध्यान कर के, गन्ने से जल को हिला कर, दीपक को प्रवाह में बहा दें। दिवोदास के मतानुसार दीपक के बदले आक के 7 पत्ते सिर पर रख कर, ईख से जल को हिलाएं और‘नमस्ते रूद्ररूपाय रसानां पतये नमः। वरूणाय नमस्तेऽस्तु।’ पढ़ कर दीपक को बहा दें और‘यद् यज्जन्मकृतं पापं यच्च जन्मान्तरार्जितम्। मनोवाक्कायजं यच्च ज्ञांताज्ञाते च ये पुनः।।इति सप्तदिधं पापं स्नानांते सप्तसप्तिके। सप्तव्याधि-समाकीर्णं हर भास्करि सप्तामि।।’इनका जप कर के, केशव और सूर्य को देख कर, पादोदक (गंगा जल, अथवा चरणामृत) को जल में डाल कर, स्नान करें, तो क्षण भर में पाप दूर हो जाते हैं।इसके बाद, अघ्र्य में जल, गंध, अक्षत, पुष्प, दूर्वा, 7 अर्क पत्र और 7 बदरी पत्र रख कर,‘सप्तसप्तिवह प्रीत सप्तलोक प्रदीपन। सप्तम्या सहितो देव गृहणाध्र्यं दिवा कर।।से सूर्य को और ‘जननी सर्वलोकानां सप्तमी सप्तसप्ति के। सप्तव्याहति के देवि नमस्ते सूर्यमंडले।।’से सप्तमी को अघ्र्य दें। इसी दिन, तालक दान के निमित्त, नित्य नियम से निवृत्त हो कर, चंदन से अष्ट दल लिखें। पूर्वादि क्रम से उसके आठों कोणों पर शिव, शिवा, रवि, भानु, वैवस्वत, भास्कर, सहस्त्र किरण और सर्वात्मा, इनका यथाक्रम स्थापन और षोडशोपचार पूजन कर के, ताम्रादि के पात्र में कांचन कर्णाभरण (कंडल) घी, गुड़ और तिल रख कर, लाल वस्त्र से ढक कर, गंध पुष्पादि से पूजन कर के, आदित्यस्य प्रसादेन प्रातः स्नानफलेन च। दुष्र्टदुर्भाग्य दुःखघ्नं मया दत्तं तु तालकम।।’ से ब्राह्मण को दें और भानु सप्तमी के निमित्त प्रातः स्नानादि से निवृत्त हो कर, समीप सूर्य मंदिर हो, तो सूर्य मंदिर में सूर्य भगवान के सम्मुख बैठें, अथवा सुवर्णादि की छोटी मूर्ति हो, तो, उसे अष्ट दल कमल के मध्य में स्थापित कर, ‘मम अखिलकामना सिद्धर्येथ सूर्यनारायणप्रीतये च सूर्यपूजनं करिष्ये।’ से संकल्प कर के, ‘ऊँ सूर्याय नमः’ इस नाम मंत्र, अथवा पुरुष सूक्तादि से आवाहनादि षोडशोपचार पूजन करें। ऋतु काल के पत्र, पुष्प, फल, खीर, मालपुआ, दाल-भात, या दध्योदनादि का नैवेद्य निवेदन करें और भगवान को, सर्वांगपूर्ण रथ में विराजमान कर के, गायन-वादन से और स्वजन परिजनादि को साथ ले कर, नगर भ्रमण करवा कर, यथास्थान स्थापित करें तथा, ब्राह्मणों को खीर आदि का भोजन करवा कर, दिनास्त से पहले स्वयं एक बार भोजन करें। उस दिन तैल और लवण न खावें।इस दिन अपाहिजों, गरीबों तथा ब्राह्मणों को अपनी सामर्थय के अनुसार दान देना चाहिए। दान के तौर पर वस्त्र, खाना तथा अन्य उपयोगी वस्तुएं जरुरतमंद व्यक्तियों को दें सकते हैं। आरोग्य व्रत सप्तमी कथा-माघ मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी से संबंधित कथा का उल्लेख ग्रंथों में मिलता है। कथा के अनुसार श्रीकृष्ण के पुत्र शाम्ब को अपने शारीरिक बल और सौष्ठव पर बहुत अधिक अभिमान हो गया था। एक बार दुर्वसा ऋषि श्रीकृष्ण से मिलने के लिए आये। दुर्वासा ऋषि अत्यंत क्रोधी स्वभाव के थे। उनके क्रोध से सभी परिचित थे परन्तु शाम्ब को अनके क्रोध का ज्ञान नहीं था। दुर्वासा ऋषि बहुत तप करते थे। जब वह श्रीकृष्ण से मिलने आये तब भी एक बहुत लम्बे समय तक तप करके आये थे। तप करने से उनका शरीर बहुत दुर्बल हो गया था। श्रीकृष्ण के पुत्र शाम्ब ने जब दुर्वासा ऋषि के कमजोर शरीर को देखा तब वह जोर से हंसने लगा। दुर्वासा ऋषि को शाम्ब के हंसने का जब कारण पता चला तब अपने क्रोधी स्वभाव के कारण उन्हें बहुत क्रोध आ गया और शाम्ब की धृष्ठता को देखकर उन्होंने शाम्ब को कुष्ठ होने का श्राप दे दिया। ऋषि के श्राप देते ही शाम्ब के शरीर पर तुरन्त असर होना आरम्भ हो गया। शाम्ब के शरीर की चिकित्सकों ने हर तरह से चिकित्सा की परन्तु कुछ भी लाभ नहीं हुआ। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र शाम्ब को सूर्य भगवान की उपासना करने के लिए कहा। शाम्ब अपने पिता की आज्ञा मानकर सूर्य भगवान की आराधना करनी आरम्भ कर दी। कुछ समय बीतने के बाद शाम्ब कुष्ठ रोग से मुक्त हो गये।उपरोक्त कथा के अतिरिक्त रथ आरोग्य सप्तमी के साथ एक अन्य कथा भी जुड़ी है। उस कथा के अनुसार छठी शताब्दी में सम्राट हर्षवर्धन के दरबार में एक कवि थे जिनका नाम मयूरभट्ट था। मयूर भट्ट एक बार कुष्ठ रोग से पीडि़त हो गये। रोग से पीडि़त होने पर मयूर भट्ट ने सूर्य सप्तक की रचना की। इस रचना के पूर्ण होते ही सूर्य्देव ने प्रसन्न होकर उन्हें रोगमुक्त कर दिया। सूर्य सप्तमी के अन्य नाम-सूर्य की रोग शमन शक्ति का उल्लेख वेदों में, पुराणों में और योग शास्त्र आदि में विस्तार से किया गया है। आरोग्य कारक शरीर को प्राप्त करने के लिए अथवा शरीर को निरोग रखने के लिए सूर्य की उपासना सर्वदा शुभ फलदायी होगी। माघ शुक्ल पक्ष की सप्तमी को अचला सप्तमी, सूर्यरथ सप्तमी, आरोग्य सप्तमी आदि के विभिन्न नाम से जाना जाता है। इस दिन जो भी व्यक्ति सूर्यदेव की उपासना करता है वह सदा निरोगी रहता है।



Advertise

Your AD Here

Related Articles


Contact Us

Now You can publish your articles with us. if selected it will be publised in our magazines after taking your conformation