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त्रिस्पर्शा महाद्वादशी



त्रिस्पर्शा महाद्वादशी (सुखी दाम्पत्य जीवन हेतु)

जब द्वादशी की तिथि एकादशी और त्रियोदशी दोनों को स्पर्श करे तो इसे त्रिस्पर्शा महाद्वादशी कहते है |

इस बार अक्टूबर के महीने में यह द्वादशी पड़ रही है | ध्यान रहे कि 24 अक्टूबर को सुबह काशी में सूर्योदय 06:04 बजे होगा | उस समय एकादशी तिथि होगी | उसके बाद द्वादशी तिथि लग जाएगी | यह द्वादशी तिथि पूरे दिन पूरी रात, अगली सूर्योदय के ठीक पहले 05:02 बजे तक रहेगी, यानि 25 तारीख की सुबह 05:02 से 06:05 तक त्रियोदशी तिथि हो जाएगी |

निर्णय सिन्धु के अनुसार यह महाद्वादशी है | शांख्यायन, बौधायन, नारद, अंगिरा, बृहस्पति और आपस्ताम्भ, इन सभी सूत्रकारों ने ऐसे अवसर का लाभ पुरुषार्थ चतुष्ट्य यानी अर्थ, धर्म, काम  और मोक्ष  प्राप्त करने के लिए प्रयास करने का निर्देश दिया है | यहाँ हम इस अवसर का लाभ उठाते हुए सुखी दाम्पत्य जीवन प्राप्त करने का उपाय बता रहे है:

24 तारीख कि सुबह 06:04 से 07:42 तक श्री विष्णु की पूजा करने के लिए आकाश की और मुंह करके विष्णु के तीन नामों का उच्चारण करे, वे तीन नाम हैं- अच्युत, अनंत, गोविन्द | इन तीनों नामों को इसी क्रम में 108 बार कहें | फिर सुबह 7:42 से पूरे दिन पूरी रात यानि अगली सुबह 05:02 तक किसी भी समय भगवान शंकर को जल या सुगंध अर्पित करें और निम्न मन्त्र का जप करें-

शं शंकराय भावोद् भवाय शं ॐ नमः |

ये मन्त्र 108 बार कहें |

पुनः 25 तारीख की सुबह 05:02 से 06:05 तक कामदेव के मन्त्र का जाप करें:

क्लीं कामदेवाय नमः

इस प्रयोग को करने से नपुंसक भी पौरुषवान हो जाता हैं | अपार दाम्पत्य सुख प्राप्त होता है | आपसी प्रेम और निष्ठा दिन-दूनी और रात चौगुनी बढ़ जाती है | जहाँ सुमति तहां संपत्ति नाना घर में तरह-तरह के सुख के साधन आने लगते हैं और जीवन में आनंद की बयार महसूस होने लगती है |



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