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त्रिपुर भैरवी



त्रिपुर:- त्रिपुर भैरवी की उपासना से सभी बंधन दूर हो जाते हैं । इनकी उपासना भव-बन्ध-मोचन कही जाती है । इनकी उपासना से व्यक्ति को सफलता एवं सर्वसंपदा की प्राप्ति होती है । शक्ति-साधना तथा भक्ति-मार्ग में किसी भी रुप में त्रिपुर भैरवी की उपासना फलदायक ही है, साधना द्वारा अहंकार का नाश होता है तब साधक में पूर्ण शिशुत्व का उदय हो जाता है, और माता, साधक के समक्ष प्रकट होती है। भक्ति-भाव से मन्त्र-जप, पूजा, होम करने से भगवती त्रिपुर भैरवी प्रसन्न होती हैं । उनकी प्रसन्नता से साधक को सहज ही संपूर्ण अभीष्टों की प्राप्ति होती है ।

 

त्रिपुर भैरवी के विभिन्न रुप:- भैरवी के नाना प्रकार के भेद बताए गए हैं जो इस प्रकार हैं त्रिपुरा भैरवी, चैतन्य भैरवी, सिद्ध भैरवी, भुवनेश्वर भैरवी, संपदाप्रद भैरवी, कमलेश्वरी भैरवी, कौलेश्वर भैरवी, कामेश्वरी भैरवी, नित्याभैरवी, रुद्रभैरवी, भद्र भैरवी तथा षटकुटा भैरवी आदि। त्रिपुरा भैरवी ऊध्र्वान्वय की देवता हैं। भागवत के अनुसार महाकाली के उग्र और सौम्य दो रुपों में अनेक रुप धारण करने वाली दस महा-विद्याएँ हुई हैं। भगवान शिव की यह महाविद्याएँ सिद्धियाँ प्रदान करने वाली होती हैं।

कैसे अवतरित हुई माता त्रिपुरा भैरवी: ‘नारद-पाञचरात्र’ के अनुसार एक बार जब देवी काली के मन में आया कि वह पुनः अपना गौर वर्ण प्राप्त कर लें तो यह सोचकर देवी अन्तर्धान हो जाती हैं। भगवान शिव जब देवी को को अपने समक्ष नहीं पाते तो व्याकुल हो जाते हैं और उन्हें ढूंढने का प्रयास करते हैं। शिवजी, महर्षि नारदजी से देवी के विषय में पूछते हैं तब नारद जी उन्हें देवी का बोध कराते हैं वह कहते हैं कि शक्ति के दर्शन आपको सुमेरु के उत्तर में हो सकते हैं वहीं देवी की प्रत्यक्ष उपस्थित होने की बात संभव हो सकेगी। तब भोले शंकर की आज्ञानुसार नारदजी देवी को खोजने के लिए वहाँ जाते हैं। महर्षि नारद जी जब वहां पहुँचते हैं तो देवी से शिवजी के साथ विवाह का प्रस्ताव रखते हैं यह प्रस्ताव सुनकर देवी क्रुद्ध हो जाती हैं। और उनकी देह से एक अन्य षोडशी विग्रह प्रकट होता है और इस प्रकार उससे छाया-विग्रह “त्रिपुर-भैरवी” का प्राकट्य होता है ।

त्रिपुर भैरवी मंत्र: त्रिपुर भैरवी मंत्र के जाप एवं उच्चारण द्वारा साधक शक्ति का विस्तार करता है तथा भक्ति की संपूर्णता को पाता है “हंसै हसकरी हसै” और “ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः” के जाप द्वारा सभी कष्ट एवं संकटों का नाश होता है.

त्रिपुर भैरवी जयंती महत्व: माँ का स्वरूप सृष्टि के निर्माण और संहार क्रम को जारी रखे हुए है। माँ त्रिपुर भैरवी तमोगुण एवं रजोगुण से परिपूर्ण हैं। माँ भैरवी के अन्य तेरह स्वरुप हैं इनका हर रुप अपने आप अन्यतम है। माता के किसी भी स्वरुप की साधना साधक को सार्थक कर देती है। माँ त्रिपुर भैरवी कंठ में मुंड माला धारण किये हुए हैं। माँ ने अपने हाथों में माला धारण कर रखी है। माँ स्वयं साधनामय हैं उन्होंने अभय और वर मुद्रा धारण कर रखी है जो भक्तों को सौभाग्य प्रदान करती है। माँ ने लाल वस्त्र धारण किया है, माँ के हाथ में विद्या तत्व है। माँ त्रिपुर भैरवी की पूजा में लाल रंग का उपयोग किया जाना लाभदायक है ।

MaaBhairavi Pooja

MaaBhairavi is on sixth position among the ten MahaVidya's. The other name of MaaBhairavi are BalaBhairavi, Tripura Bhairavi or Kala Bhairavi. Goddess is considered to be the incarnation of bravery and blessings, learning and reasoning with a compassionate smile on her face. Graphically MaaBhairaviis represented as the consort of Bhairava referred to as the Shubmkari. Goddess is considered to be beneficial for the people with moral excellence and is considered to be dreadful for the people with negative qualities. Goddess Bhairavi also exists in the form of creation and destruction as it is the part of nature. Goddess is believed to be the controlling Goddess of this crumbling world. The pooja done with full dedication and devotion is considered to be beneficial for controlling the sensual desires and to increase the spiritual growth.

How to do Maa Bhairavi Pooja: The pooja to MaaBhuvaneswari is being offered by placing the idol of Goddess in the pooja room. Lighting the diya, agarbatti to do the pooja. Prepare the Prasad and offer to the deity. Garlands and flowers are being offered to Maa Tripura. After that the recitation of mantra is being started and at last the aarti is done. The Prasad is being distributed among family members. Goddess provides the Shakti to her devotees to fight from all the problems of the life and to live the life with full of happiness and prosperity. The spiritual growth is also achieved.

Importance and Significance of MaaBhairaviPooja:The pooja of MaaBhairavi brings prosperity in the life and hence keeps the special importance in the life of every individual. MaaBhairavikeep the individual free from every fear. Goddess saves the individual from the fear like

Tensions

Uncertainties

Worries

Malefic spirits

Accidents

Negative energies

Nervousness

Disrepute

Akaalmrityu

The spiritual growth is achieved with all the moral values. Happiness and prosperity is also achieved. Persons going through the lagnarashi or lagnagraha are suggested to do this pooja, to remove the malefic effects of the individual.

Benefits of Maa Bhairavi Pooja : MaaBhairavi is considered to give the immediate result and the person is blessed with the child. All the sufferings and the events causing distress are removed from the life and the peace of mind is achieved. The innumerable advantages are achieved for the all-round financial prosperity and stability and the devotee is blessed with long life. The Goddess blesses her devotees with spiritual growth and the safety is there around the devotee.



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