Acharya Indu Prakash
Fashion Blog

It's common knowledge that a large percentage of Wall Street brokers use astrology.

Acharya Indu prakash

जानिए सरस्वती पूजा की संपूर्ण विधि और मुहूर्त



जानिए सरस्वती पूजा की संपूर्ण विधि और मुहूर्त

विद्या की देवी सरस्वती का जन्मदिन बसंत पंचमी इस वर्ष 12 फरवरी को मनाया जायेगा। इस दिन अगर आप भी मां सरस्वती की पूजा करके उन्हें प्रसन्न करना चाहते हैं तो इसके लिए शुभ मुहूर्त पूरे दिन है।

बंसत पंचमी का दिन पूरे वर्ष के शुभ दिनों में से एक होता है। इस दिन सिद्ध योग भी बन रहा है जो शुभ फलदायी है। जो लोग नया काम या शिक्षा के क्षेत्र में कुछ नया करने की सोच रहे हैं तो उनके लिए यह दिन बहुत ही शुभ है। इस दिन पितृ तर्पण किया जाता है और कामदेव की पूजा भी की जाती हैं। इस दिन पहनावा भी परंपरागत होता है। मसलन पुरुष कुर्ता-पायजामा पहनते हैं, तो महिलाएं पीले रंग के कपड़े पहनती हैं। इस दिन गायन-वादन के साथ अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।

सबसे पहले मां सरस्वती की प्रतिमा अथवा तस्वीर को सामने रखकर उनके सामने धूप-दीप और अगरबत्ती जलानी चाहिए।

इसके बाद पूजन आरंभ करना चाहिए। सबसे पहले अपने आपको तथा आसन को इस मंत्र से शुद्ध करें- “ऊं अपवित्रः पवित्रोवा सर्वावस्थां गतोऽपिवा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।। इन मंत्रों से अपने ऊपर तथा आसन पर 3-3 बार कुशा या पुष्पादि से छींटें लगायें फिर आचमन करें- ऊं केशवाय नमः ऊं माधवाय नमः, ऊं नारायणाय नमः

फिर हाथ धोएं, पुनः आसन शुद्धि मंत्र बोलें- ऊं पृथ्वी त्वयाधृता लोका देवि त्यवं विष्णुनाधृता। त्वं च धारयमां देवि पवित्रं कुरु चासनम।।

शुद्धि और आचमन के बाद चंदन लगाना चाहिए। अनामिका उंगली से श्रीखंड चंदन लगाते हुए यह मंत्र बोलें ‘चन्ददनस्यए महत्पुण्यम् पवित्रं पापनाशनम, आपदां हरते नित्यम् लक्ष्मी् तिष्ठतु सर्वदा।’

बिना संकल्प के की गयी पूजा सफल नहीं होती है इसलिए संकल्प करें। हाथ में तिल, फूल, अक्षत मिठाई और फल लेकर ‘यथोपलब्धपूजनसामग्रीभिः भगवत्याः सरस्वत्याः पूजनमहं करिष्ये।’ 

इस मंत्र को बोलते हुए हाथ में रखी हुई सामग्री मां सरस्वती के सामने रख दें। इसके बाद गणपति जी की पूजा करें।

हाथ में फूल लेकर गणपति का ध्यान करें।

मंत्र पढ़ें-गजाननम्भूतगणादिसेवितं कपित्थ जम्बू फलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम। हाथ में अक्षत लेकर गणपति का आवाहनः करें ऊं गं गणपतये इहागच्छ इह तिष्ठ।।

इतना कहकर पात्र में अक्षत छोड़ें।

अर्घा में जल लेकर बोलें- एतानि पाद्याद्याचमनीय-स्नानीयं, पुनराचमनीयम् ऊं गं गणपतये नमः। रक्त चंदन लगाएंः इदम रक्त चंदनम् लेपनम् ऊं गं गणपतये नमः

इसी प्रकार श्रीखंड चंदन बोलकर श्रीखंड चंदन लगाएं। इसके पश्चात सिन्दूर चढ़ाएं “इदं सिन्दूराभरणं लेपनम् ऊं गं गणपतये नमः। दुर्वा और विल्बपत्र भी गणेश जी को चढ़ाएं। गणेश जी को वस्त्र पहनाएं। इदं पीत वस्त्रं ऊं गं गणपतये समर्पयामि।पूजन के बाद गणेश जी को प्रसाद अर्पित करें- इदं नानाविधि नैवेद्यानि ऊं गं गणपतये समर्पयामिः।मिष्ठान अर्पित करने के लिए मंत्र- इदं शर्करा घृत युक्त नैवेद्यं ऊं गं गणपतये समर्पयामिः। प्रसाद अर्पित करने के बाद आचमन करायें। इदं आचमनयं ऊं गं गणपतये नमः। इसके बाद पान सुपारी चढ़ायें- इदं ताम्बूल पुगीफल समायुक्तं ऊं गं गणपतये समर्पयामिः। अब एक फूल लेकर गणपति पर चढ़ाएं और बोलें- एषः पुष्पान्जलि ऊं गं गणपतये नमःइसी प्रकार से नवग्रहों की पूजा करें। गणेश के स्थान पर नवग्रह का नाम लें। कलश पूजनघड़े या लोटे पर मोली बांधकर कलश के ऊपर आम का पल्लव रखें। कलश के अंदर सुपारी, दूर्वा, अक्षत, मुद्रा रखें। कलश के गले में मोली लपेटें। नारियल पर वस्त्र लपेट कर कलश पर रखें। हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर वरूण देवता का कलश में आह्वान करें। ओ३म् त्तत्वायामि ब्रह्मणा वन्दमानस्तदाशास्ते यजमानो हविभिः। अहेडमानो वरुणेह बोध्युरुशंस मान आयुः प्रमोषीः। (अस्मिन कलशे वरुणं सांगं सपरिवारं सायुध सशक्तिकमावाहयामि, ओ३म्भूर्भुवः स्वःभो वरुण इहागच्छ इहतिष्ठ। स्थापयामि पूजयामि।।)इसके बाद जिस प्रकार गणेश जी की पूजा की है उसी प्रकार वरूण और इन्द्र देवता की पूजा करें। सरस्वती पूजन सबसे पहले माता सरस्वती का ध्यान करें-या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।।या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ।।1।।शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमांद्यां जगद्व्यापनीं ।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यांधकारपहाम।।हस्ते स्फाटिक मालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम् ।वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम।।2।।इसके बाद सरस्वती देवी की प्रतिष्ठा करें। हाथ में अक्षत लेकर बोलें “ऊँ भूर्भुवः स्वः महासरस्वती, इहागच्छ इह तिष्ठ। इस मंत्र को बोलकर अक्षर छोड़ें। इसके बाद जल लेकर ‘एतानि पाद्याद्याचमनीय-स्नानीयं, पुनराचमनीयम।” प्रतिष्ठा के बाद स्नान कराएं-ऊँ मन्दाकिन्या समानीतैः, हेमाम्भोरुह-वासितैः स्नानं कुरुष्व देवेशि, सलिलं च सुगन्धिभिः।।ऊँ श्री सरस्वतयै नमः।। इदं रक्त चंदनम् लेपनम् से रक्त चंदन लगाएं। इदं सिन्दूराभरणं से सिन्दूर लगाएं। ‘ऊँ मन्दार-पारिजाताद्यैः, अनेकैः कुसुमैः शुभैः। पूजयामि शिवे, भक्तया, सरस्वतयै नमो नमः।। ऊँ सरस्वतयै नमः, पुष्पाणि समर्पयामि।’ इस मंत्र से पुष्प चढ़ाएं फिर माला पहनाएं। अब सरस्वती देवी को इदं पीत वस्त्र समर्पयामि कहकर पीला वस्त्र पहनाएं।नैवैद्य अर्पणपूजन के पश्चात देवी को “इदं नानाविधि नैवेद्यानि ऊं सरस्वतयै समर्पयामि” मंत्र से नैवैद्य अर्पित करें। मिष्टान अर्पित करने के लिए मंत्र-“इदं शर्करा घृत समायुक्तं नैवेद्यं ऊं सरस्वतयै समर्पयामि” बालें। प्रसाद अर्पित करने के बाद आचमन करायें। इदं आचमनयं ऊं सरस्वतयै नमः। इसके बाद पान सुपारी चढ़ायें-इदं ताम्बूल पुगीफल समायुक्तं ऊं सरस्वतयै समर्पयामि। अब एक फूल लेकर सरस्वती देवी पर चढ़ाएं और बोलें-एषः पुष्पान्जलि ऊं सरस्वतयै नमः। इसके बाद एक फूल लेकर उसमें चंदन और अक्षत लगाकर किताब कॉपी पर रख दें। पूजन के पश्चात् सरस्वती माता के नाम से हवन करें। इसके लिए भूमि को स्वच्छ करके एक हवन कुण्ड बनाएं। आम की अग्नि प्रज्वलित करें। हवन में सर्वप्रथम ‘ऊं गं गणपतये नमः’ स्वाहा मंत्र से गणेश जी एवं ‘ऊं नवग्रह नमः’ स्वाहा मंत्र से नवग्रह का हवन करें, तत्पश्चात सरस्वती माता के मंत्र ‘ऊँ सरस्वतयै नमः स्वहा’ से 108 बार हवन करें। हवन का भभूत माथे पर लगाएं। श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण करें इसके बाद सभी में वितरित करें।सरस्वती विसर्जनमाघ शुक्ल पंचमी के दिन सरस्वती की पूजा के बाद षष्ठी तिथि को सुबह माता सरस्वती की पूजा करने के बाद उनका विसर्जन कर देना चाहिए। संध्या काल में मूर्ति को प्रणाम करके जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।देवी सरस्वती का मंत्र (डंदजतं व िक्मअप ैंतंेूंजप)  सरस्वती जी की पूजा के लिए अष्टाक्षर मूल मंत्र “श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा” परम श्रेष्ठतम और उपयोगी माना जाता है। साथ ही सरस्वती जी को प्रसन्न करने तथा विद्या प्राप्ति के लिए इस मंत्र का भी प्रयोग किया जाता है-ऊँ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः।



Advertise

Your AD Here

Related Articles


Contact Us

Now You can publish your articles with us. if selected it will be publised in our magazines after taking your conformation