Acharya Indu Prakash
Fashion Blog

It's common knowledge that a large percentage of Wall Street brokers use astrology.

Acharya Indu prakash

कहां होता है लक्ष्मी का वास !



कहां होता है लक्ष्मी का वास !

लक्ष्मी जी एक पल रुककर बोली, ‘अब उन स्थानों का वर्णन सुनो जिनसे मुझे घृणा है।

जो अकर्मण्य, नास्तिक, कृतघ्न, आचार-भ्रष्ट, नृशंस, चोर, गुरुद्रोही तथा कपटी हैं और

बल-बुद्धि और वीर्य से हीन हैं, उनके पास मैं नहीं रहती।

 

एक बार भगवान श्रीकृष्ण की पटरानी रुक्मिणी अपनी अभिन्नरूपा लक्ष्मी से भेंट करने वैकुण्ठ पधारी और वहां लक्ष्मी जी को भगवान विष्णु के समीप बैठी देखकर बड़ी प्रसन्न हुई फिर लोक कल्याण के लिए रुक्मिणी जी ने देवी लक्ष्मी से पूछा, ‘देवी, आप किस स्थान पर और कैसे मनुष्य के पास रहती है । लक्ष्मी ने उत्तर दिया, ‘हे देवी जो मनुष्य मधुरभाषी, कार्यकुशल, क्रोधहीन, भक्त, कृतज्ञ, जितेन्द्रीय और उदार हैं, उनके यहां मेरा निवास होता है। सदाचारी, धर्मज्ञ, बड़े-बूढ़ों की सेवा में तत्पर, पुण्यात्मा, क्षमाशील और बुद्धिमान मनुष्यों के पास मैं सदा रहती हूं। जो स्त्रियां पति की सेवा करती हैं, जिनमें क्षमा, सत्य, इंद्रियां संयम, सरलता आदि सद्गुण होते है। जो देवताओं और ब्राह्मणों में श्रद्धा रखती है। जिनमें सभी प्रकार के शुभ लक्षण मौजूद है। उनके समीप मैं निवास करती हूं। कन्या, आभूषण, यज्ञ, जल से पूर्ण मेघ, हाथी, फूले हुए कमल, शरद ऋतु के नक्षत्र, गायों के रहने के स्थान, आसन, फूले हुए कमलों से सुशोभित तालाब, मतवाले हाथी, सांड, राजा, सिंहासन, सज्जन पुरुष, विद्वान ब्राह्मण, प्रजापालक, क्षत्रिय, खेती करने वाले वैश्य तथा सेवापरायण शूद्र मेरे प्रधान निवास स्थान हैं। जिस घर में सदा होम होता है तथा देवता, गाय और ब्राह्मणों की पूजा होती है। उस घर को मैं कभी नहीं छोड़ती। भगवान नारायण के सिवाय अन्यत्र कहीं भी मैं शरीर धारण करके नहीं रहती। जहां मेरा वास होता है। वहां धर्म, अर्थ और सुयश की बढ़ोतरी होती है। लक्ष्मी जी एक पल रुककर बोली, ‘अब उन स्थानों का वर्णन सुनो जिनसे मुझे घृणा है। जो अकर्मण्य, नास्तिक, कृतघ्न, आचार-भ्रष्ट, नृशंस, चोर, गुरुद्रोही तथा कपटी हैं और बल-बुद्धि और वीर्य से हीन हैं, उनके पास मैं नहीं रहती। जो हर्ष और क्रोध का अवसर नहीं जानते, धन प्राप्ति की आशा नहीं रखते, मैं उनसे दूर रहती हूं। जो स्त्रियां गंदी रहती हैं, घर की वस्तुएं इधर-उधर बिखेरकर रखती हैं, जिनमें उत्तम विचार नहीं होते, जो सदा पति के प्रतिकूल बातें करती हैं, जिन्हें दूसरों के घरों में रहना ज्यादा पसंद है, जिनमें न धैर्य है, न लज्जा, जो स्वभाव से निर्दयी और शरीर से अपवित्र रहती हैं, जिनका कामकाज में दिल नहीं लगता, जो सदा लड़ाई-झगड़े किया करती है। और अधिक सोती हैं, उनके पास मैं कभी नहीं रहती ।



Advertise

Your AD Here

Related Articles


Contact Us

Now You can publish your articles with us. if selected it will be publised in our magazines after taking your conformation