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अक्षय नवमी (Akshay Navami )



आंवले के वृक्ष के सामने पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठें । वृक्ष की पंचोपचार पूजा

करें फिर वृक्ष की जड़ को दूध से सिंचन करें । कच्चे सूत को लेकर वृक्ष के तने में

लपेटें, घी और कपूर से आरती करे अंत में परिक्रमा करें।

 

दीपावली के बाद आने वाली कातिर्क मास की नवमी को आँवला नवमी कहते हैं । आँवला व अक्षय नवमी पर आँवले के वृक्ष के पूजन का महत्व है । साथ ही पुत्र रत्न की प्राप्ति हेतु इस नवमी पूजन का विशेष महत्व है।

एक कथा के अनुसार पुत्ररत्न की प्राप्ति के लिए एक दिन एक वैश्य की पत्नी ने पड़ोसन के कहने पर पराए लड़के की बलि भैरव देवता के नाम पर दे दी । इस वध का परिणाम विपरीत हुआ और उस महिला को कुष्ट रोग हो गया तथा लड़के की आत्मा सताने लगी।

बाल वध करने के पाप के कारण शरीर पर हुए कोढ़ से छुटकारा पाने के लिए उस महिला ने गंगा के कहने पर कार्तिक की नवमी के दिन आँवला का व्रत करने लगी। ऐसा करने से वह भगवान की कृपा से दिव्य शरीर वाली हो गई तथा उसे पुत्र प्राप्ति भी हुई। तभी से इस व्रत को करने का प्रचलन है। आँवले के वृक्ष के नीचे पूर्व दिशा में बैठकर पूजन कर उसकी जड़ में दूध देना चाहिए। इसके बाद पेड़ के चारों ओर कच्चा धागा बाँधकर कपूर, बाती या शुद्ध घी की बाती से आरती करते हुए सात बार परिक्रमा करनी चाहिए । इस दिन महिलाएँ किसी ऐसे गॉर्डन में जहाँ आँवले का वृक्ष हो, वहाँ जाकर वे पूजन करने बाद वहीं भोजन करती हैं अक्षय नवमी के विषय में कहा जाता है कि इस दिन ही त्रेता युग का आरम्भ हुआ था। इसे कहीं- कहीं कुष्मांडी नवमी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि देवी कुष्माण्डा इसी दिन प्रकट हुई थीं । इस दिन का पूजा विधान इस प्रकार है । आंवले के वृक्ष के सामने पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठें । वृक्ष की पंचोपचार पूजा करें फिर वृक्ष की जड़ को दूध से सिंचन करें । कच्चे सूत को लेकर वृक्ष के तने में लपेटें, घी, कपूर से आरती करे अंत में परिक्रमा करें.

 

क्या करें ?

 

इस दिन आंवला फल या उसकी पत्ती घर लाने से धन बढ़ता है और यश व ज्ञान की भी प्राप्ति होती है ।

आंवले के पेड़ में नीचे ब्रह्माजी, बीच में विष्णुजी और तने में महेशजी निवास करते हैं । इसलिए इस दिन कुंवारी लड़कियां अगर व्रत रखती हैं तो उनका विवाह और विद्यार्थियों को विद्या की प्राप्ति होती है । अगर दाम्पत्य जीवन कटु चल रहा है तो पति-पत्नी के बीच मिठास पैदा होती है । जिस तरह पेड़ में सूत लपेटा जाता है, उसी तरह रिश्ते भी एक-दूसरे से बंध जाते हैं । अक्षय नवमी को गौ, जमीन, हिरण, सोना व वस्त्राभूषण आदि दान करने से ब्रह्म हत्या जैसे महापाप भी मिट जाते हैं । इसीलिए इसे धात्री नवमी भी कहा गया है ।

जिनकी आंखें कमजोर होती हैं, अगर वह इस दिन कुम्हड़ा के अंदर पैसे, सोना, चांदी आदि रखकर पूजा कर ब्राह्मण को दान करते हैं तो उनको लाभ मिलता है । देवी पुराण के अनुसार श्रीकृष्ण के परामर्श से माता कुंती ने भी अक्षय प्राप्ति के लिए इस दिन व्रत किया था, तभी से इस व्रत का प्रचलन शुरू हो गया । इस व्रत में व्रती को भी केवल एक समय पेड़ के नीचे ही भोजन करना चाहिए । फलदार आंवले के पेड़ के नीचे ही पूजा करें, तभी फल मिलेगा । पेड़ न मिले तो फलदार डाली घर लाकर किसी ऊंचे स्थान पर लगायें और उसके नीचे बैठकर पूजा करें।

 

Akshay Navami

 

The ninth day of the month of kartik occurring after Diwali brings the occasion of Aamla Navami. The pooja of Aamla (Indian gooseberry) tree is given importance on this day. This pooja is considered to be important for the purpose of having a son. According to one story, to obtain a son, the wife of a businessman on the suggestion of her neighbor killed a boy to offer sacrifice to Lord Bhairav. The result of this was that she suffered from leprosy and was hounted by the ghost of the boy haunted

To be cured of her leprosy caused by her sin of killing a boy, she started observing the Aamla fast on the suggestion of Ganga. She was cured, regained a healthy body and had a male child. Since then this fast is observed. One should sit under the Aamla tree facing the east direction, perform the pooja and offer milk to the roots of the tree. After this, tie a strand of yarn around the tree and perfrom aarti with kapur or baati lighted with ghee and move in circles in clock wise direction around the tree seven times. On this day, women go to a garden with an Aamla tree and perform pooja and have their meal over therea. A k s h a y N a v a m i i s considered to be the first day of Treta Yug ( the second era according to Hinduism ). It is known as Kashmandi Navami in some areas since it is believed that Goddess Kushmanda appeared on this day.

Sit in front of the Aamla tree facing the East direction and perform the pooja with

devotion. Pour milk on the roots of Aamla tree. Take a raw thread and wound it around the stem of dhatri plant and move in circles around the tree in clockwise On this day, the Aamla fruit or its leave is Bringing the fruit Aamla or its leaf to one's home on this day brings increase in wealth and helps obtain fame and knowledge. In the Aamla tree, Lord Brahma resides in the bottom of the tree, Lord Vishnu resides in the middle of the tree and Lord Shiva in the trunk of the tree. That is why unmarried girls fasting on this day get married and students keeping the Aamla Vrat obtain knowledge. The vrat also brings peace where family problems have been prevailing. As the raw thread is tied around the tree, in the same way relations are tied with each other. By donating cow, land, deer, gold, clothes and jewellery on this day, great sins like Brahma Hatya are also forgiven. That is why this is also called Dhaatri Navami. Those with weak eyes if put money, gold, silver or other valuables inside an earthen pot and donate it to a Brahman after Pooja will be benefitted. According to the Purans, it was on Lord Krishna 's suggestion that Kunti kept the Aamla Vrat. The one observing this fast should eat just once in the entire day under the Aamla tree. The pooja should be

performed under a tree bearing the Aamla fruits, only then will the fast benefit . If a tree can't be found, a branch should be kept at a level above the head and the pooja should be performed under it. Fasting, performing pooja and tarpan on the day of Kartik Shukl brings great benefits.



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