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UMA MAHESHWAR VRAT



27 सितम्बर 2015

सुख सौभाग्य की बारिश का दिन

रुपया पैसा, शोहरत, बंगला, मोटर गाडी, मन चाहा प्यार और सौभाग्य जो मांगोगे वही मिलेगा .... बस आप को करना होगा आल इन वन , यह व्रत उमामहेश्वर व्रत के नाम से प्रसिद्ध है इस व्रत में भगवान् शंकर के अर्धनारीश्वर स्वरुप की आराधना की जाती है, इस व्रत को करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है |साल में एक बार किये जाने वाले इस व्रत को जो लगातार 18 वर्षो तक कर लेता है उसको इस भूलोक के सभी सुख प्राप्त होते है |

भविष्यपुराण के अनुसार उमा महेश्वर व्रत मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को रखा जाता है लेकिन नारदपुराण के अनुसार भाद्रपद की पूर्णिमा के दिन उमा महेश्वर व्रत मनाया जाता है | उमा महेश्वर व्रत स्त्रियों के लिए विशेष महत्व रखता है | इस दिन भगवान् शिव के अर्धनारी स्वरुप की पूजा की जाती है | इसे स्त्रियों के लिए माने गए श्रेष्ठ व्रतों में से एक माना जाता है | यह व्रत हर माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया को भी रखा जाता है | लेकिन मार्गशीर्ष माह में इसका अधिक महत्व होता है |

यह व्रत भाद्रपद पूर्णिमा को किया जाता है | विधान स्नान कर भगवान् शंकर की प्रतिमा को स्नान कराकर बिल्बपत्र ,फूल आदि से पूजन करते है तथा रात्री को मंदिर में जागरण करना चाहिए पूजन के बाद यथाशक्ति ब्राह्मण को भोजन कराकर दान दक्षिणा देकर व्रत का समापन करना चाहिए|

इस व्रत का उल्लेख मत्स्य पुराण में मिलता है कहा जाता है की एक बार महर्षि दुर्वासा शंकर जी के दर्शन करके लौट रहे थे | मार्ग में उनकी भेंट विष्णु जी से हो गई | महर्षि ने शंकर जी की ओर से दी गई बिल्वपत्र की माला विष्णुजी को दे दी | विष्णुजी ने इस माला को स्वयं के गले में पहनकर गरुड़ के गले में डाल दी | इससे दुर्वासा क्रोधित होकर बोले की तुमने शंकर का अपमान किया है | इससे तुम्हारे पास से लक्ष्मी चली जायेगी | क्षीर सागर से भी हाथ धोना पड़ेगा | शेषनाग भी तुम्हारी सहायता न कर सकेंगे |

यह सुनकर विष्णुजी ने दुर्वासा को प्रणाम कर मुक्त होने का उपाय पूछा | दुर्वासा ऋषि ने बताया की उमा-महेश्वर का व्रत करो , तभी तुम्हे ये वस्तुएं मिलेंगी | तब विष्णुजी ने उमा महेश्वर का व्रत किया व्रत के प्रभाव से लक्ष्मी आदि समस्त शापित वस्तुएं भगवान् विष्णु को पुनः मिल गई |

उमा महेश्वर  व्रत में शिव के अर्धभगवती रूप की पूजा करते समय इन मन्त्रों का उच्चारण करना चाहिए

नमो नमस्ते देवेश उमादेहार्धधारक |

महादेवि नमस्तेस्तु हरकायार्धवासिनि ||

भविष्यपुराण के अनुसार जो स्त्री इस व्रत को पूरे विधि विधान से करती है वह एक कल्प तक शिव जी के पास निवास करती है वह इसके बाद अच्छे कुल में मनुष्य रूप में जन्म लेती है जीवन के अंत तक पति के साथ सभी सुखों का भोग कर अंत में भगवान् शिव लोक जाती है | माना जाता है की इस व्रत के पुण्य से स्त्री कभी भी अपने जीवन साथी से अलग नहीं होती है |



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