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धनतेरस वास्तु शास्त्र खरीदा गया सामान कहाँ रखे ?



धनतेरस के दिन घर के वास्तुशास्त्र की भी बड़ी महत्ता होती है | साल भर  के कूड़े -कचरे की निकासी और धनतेरस के दिन खरीदे गए सामान को कहाँ रखें यानी खरीदे गये सामान को किस दिशा में रखें ,ये बहुत महत्वपूर्ण है | 
धनतेरस के दिन चंद्रमा कन्या राशी के 3 अंश से 13 डिग्री अंश के बीच होगा |यानि चन्द्रमा दक्षिण से दक्षिण पश्चिम दिशा में होगा | लक्ष्मी का स्थान पूजा घर के अग्निकोण में होगा यानि लक्ष्मी जी की और मुंह करने पर चन्द्रमा दाहिने हाथ होगा | जो अत्यंत शुभ लक्षण है | सम्मुखे अर्थ लाभाय ............
यानि धनतेरस के दिन जो भी सामान लायें उसे लेकर अपनी पूजा में दक्षिण -पूर्व की और मुंह करके खड़े हों और फिर clock love घूम कर अपनी शुभ दिशा में उसे रख दें | राशि वार शुभ दिशा इस प्रकार होगी |

मेष -दक्षिण     
वृष -अग्निकोण 
मिथुन -उत्तर 
कर्क -उत्तर पश्चिम 
सिंह -पूर्व 
कन्या -उत्तर 
तुला -दक्षिण -पूर्व  
वृश्चिक -दक्षिण 
धनु -उत्तर -पूर्व 
मकर -पश्चिम 
कुम्भ -दक्षिण -पश्चिम 
मीन -उत्तर -पूर्व 

                                    

धनतेरस

धनतेरस के दिन घर को साफ कर सांयकाल घी का दीपक जलाकर लक्ष्मीजी का पूजन करे और एक तांबे के कलश में रुपया भरकर लक्ष्मी जी के लिए रखें तो वर्ष भर लक्ष्मी जी उस कलश में निवास करेंगी ।

 

एक समय भगवान विष्णु मृत्युलोक में विचरण करने के लिए आ रहे थे, लक्ष्मीजी ने भी साथ चलने का आग्रह किया। विष्णु जी बोले- ‘यदि मैं जो बात कहूं, वैसे ही मानो, तो चलो।’ लक्ष्मी जी ने स्वीकार किया और भगवान विष्णु, लक्ष्मी जी सहित भूमण्डल पर आए। कुछ देर बाद एक स्थान पर भगवान विष्णु लक्ष्मी से बोले-‘जब तक मैं न आऊं, तुम यहां ठहरो। मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूं, तुम उधर मत देखना।’ विष्णुजी के जाने पर लक्ष्मी को कौतुक उत्पन्न हुआ कि आखिर दक्षिण दिशा में क्या है जो मुझे मना किया गया है और भगवान स्वयं दक्षिण में क्यों गए, कोई रहस्य जरूर है। लक्ष्मी जी से रहा न गया, ज्योंही भगवान ने राह पकड़ी, त्योंही लक्ष्मी भी पीछे-पीछे चल पड़ीं। कुछ ही दूर पर सरसों का खेत दिखाई दिया। वह खूब फूला था। वे उधर ही चलीं। सरसों की शोभा से वे मुग्ध हो गईं और उसके फूल तोड़कर अपना श्रृंगार किया और आगे चलीं। आगे गन्ने( ईख) का खेत खड़ा था। लक्ष्मी जी ने चार गन्ने लिए और रस चूसने लगीं। उसी क्षण विष्णु जी आए और यह देख लक्ष्मी जी पर नाराज होकर शाप दिया- ‘मैंने तुम्हें इधर आने को मना किया था, पर तुम न मानीं और यह किसान की चोरी का अपराध कर बैठीं। अब तुम उस किसान की 12 वर्ष तक इस अपराध की सजा के रूप में सेवा करो।’ ऐसा कहकर भगवान उन्हें छोड़कर क्षीरसागर चले गए। लक्ष्मी किसान के घर रहने लगीं। वह किसान अति दरिद्र था। लक्ष्मीजी ने किसान की पत्नी से कहा- ‘तुम स्नान कर पहले इस मेरी बनाई देवी लक्ष्मी का पूजन करो, फिर रसोई बनाना, तुम जो मांगोगी मिलेगा।’ किसान की पत्नी ने लक्ष्मी के आदेशानुसार ही किया। पूजा के प्रभाव और लक्ष्मी की कृपा से किसान का घर दूसरे ही दिन से अन्न, धन, रत्न, स्वर्ण आदि से भर गया और लक्ष्मी से जगमग होने लगा। लक्ष्मी ने किसान को धन-धान्य से पूर्ण कर दिया। किसान के 12 वर्ष बड़े आनन्द से कट गए। तत्पश्चात् 12 वर्ष के बाद लक्ष्मीजी जाने के लिए तैयार हुई विष्णुजी, लक्ष्मीजी को लेने आए तो किसान ने उन्हें भेजने से इंकार कर दिया। लक्ष्मी भी बिना किसान की मर्जी वहां से जाने को तैयार न थी। तब विष्णुजी ने एक चतुराई की। विष्णुजी जिस दिन लक्ष्मी को लेने आए थे, उस दिन वारुणी पर्व था। अतः किसान को वारुणी पर्व का महत्त्व समझाते हुए भगवान ने कहा- ‘तुम परिवार सहित गंगा में जाकर स्नान करो और इन कौडि़यों को भी जल में छोड़ देना। जब तक तुम नहीं लौटोगे, तब तक मैं लक्ष्मी को नहीं ले जाऊंगा।’ लक्ष्मीजी ने किसान को चार कौडि़यां गंगा को देने को दी। किसान ने वैसा ही किया। वह सपरिवार गंगा स्नान करने के लिए चला। जैसे ही उसने गंगा में कौडि़या डालीं, वैसे ही चार हाथ गंगा में से निकले और वे कौडि़यां ले लीं। तब किसान को आश्चर्य हुआ कि वह तो कोई देवी है। तब किसान ने गंगाजी से पूछा-‘माता! ये चार भुजाएं किसकी हैं?’ गंगाजी बोलीं- ‘हे किसान! वे चारों हाथ मेरे ही थे। तूने जो कौडि़यां भेंट दी हैं, वे किसकी दी हुई हैं ?’ किसान ने कहा- ‘मेरे घर जो स्त्री आई है, उन्होंने ही दी हैं।’ इस पर गंगाजी बोलीं- ‘तुम्हारे घर जो स्त्री आई है वह साक्षात् लक्ष्मी हैं और पुरुष विष्णु भगवान हैं। तुम लक्ष्मी को जाने मत देना, नहीं तो पुनः निर्धन हो जाओगे। यह सुन किसान घर लौट आया। वहां लक्ष्मी और विष्णु भगवान जाने को तैयार बैठे थे। किसान ने लक्ष्मी जी का चंचल पकड़ा और बोला- ‘मैं तुम्हें जाने नहीं दूंगा। तब भगवान ने किसान से कहा- ‘इन्हें कौन जाने देता है, परन्तु ये तो चंचला हैं, कहीं ठहरती ही नहीं, इनको बड़े-बड़े नहीं रोक सके। इनको मेरा शाप था, जो कि 12 वर्ष से तुम्हारी सेवा कर रही थीं। तुम्हारी 12 वर्ष सेवा का समय पूरा हो चुका है।’ किसान हठपूर्वक बोला- ‘नहीं अब मैं लक्ष्मीजी को नहीं जाने दूंगा। तुम कोई दूसरी स्त्री यहां से ले जाओ।’ तब लक्ष्मीजी ने कहा-‘हे किसान! तुम मुझे रोकना चाहते हो तो जो मैं कहूं वैसा करो। कल तेरस है, मैं तुम्हारे लिए धनतेरस मनाऊंगी। तुम कल घर को घी का दीपक जलाकर रखना और सांयकाल मेरा पूजन करना और एक तांबे के कलश में रुपया भरकर मेरे निमित्त रखना, मैं उस कलश में निवास करूंगी। किंतु पूजा के समय मैं तुम्हें दिखाई नहीं दूंगी। मैं इस दिन की पूजा करने से वर्ष भर तुम्हारे घर से नहीं जाऊंगी। मुझे रखना है तो इसी तरह प्रतिवर्ष मेरी पूजा करना।’ यह कहकर वे दीपकों के प्रकाश के साथ दशों दिशाओं में फैल गईं और भगवान देखते ही रह गए। अगले दिन किसान ने लक्ष्मीजी के कथानुसार पूजन किया। उसका घर धन-धान्य से पूर्ण हो गया। इसी भांति वह हर वर्ष तेरस के दिन लक्ष्मीजी की पूजा करने लगा।

आज हम आपको बतायेंगे कल पूरे दिन आपको क्या करना है | हम आपको बतायेंगे कितने बजे आपको खरीददारी करनी है | बस कल आपको एक कोशिश करनी है राहुकाल के वक्त कोई खरीददारी नहीं करनी है | 

कल धनतेरस है और आज हम आपको बतायेंगे कब आपको खरीददारी करनी है | धनतेरस पर भले आप सोने –चांदी,पीतल से जुड़ी चीजें खरीदना चाहते हैं या फिर वाहन खरीदना चाहते हैं तो हम आपको इसके लिए शुभ मुहूर्त बतायेंगे | कल आपको सोने और पीतल से जुड़ी चीजें भी खरीदनी है तो डरे नहीं बेझिझक सबकुछ खरीदें कल का दिन शुभ होता है | धनवंतरी की पूजा होती है | कल आप वाहन खरीदने का मन बना चुके होंगे तो हम आपको स्कूटर खरीदने का वक्त भी बतायेंगे | इस बार धनतेरस पर रवि योग बन रहा है इसलिए ये दिन बहुत ख़ास है | इस दिन खूब खरीददारी करें कंप्यूटर खरीदने वाले छात्र भी खरीददारी कर सकते हैं | बस कल आपको एक ख़ास वक्त का ख्याल रखना है | राहुकाल के वक्त आपको खरीददारी नहीं करनी है और कल धनवंतरी भगवान् की पूजा जरुर करनी है | इसके लिए भी राहुकाल का ख्याल रखना है | 
कब खरीदें आभूषण ? .... सुबह - 9 :17 से 10 : 41 
दोपहर बाद - 1 : 39 से शाम 7 : 17 तक 
रात   - 10 : 29 से रात 12 : 05
लड़कियों की ख़ास पसंद होता है सोना अगर खरीदना हो तो कितने बजे खरीदें | 
सोना कब खरीदें ? .... सुबह 9 :17 से 10 : 41
दोपहर – 2 : 53 से 4 : 17 
कल के दिन सोने के साथ -साथ पीतल से बने बर्तन भी खरीदें जाते हैं | 
तो कब खरीदें पीतल ?.... शाम – 4 : 17 से 5 : 41
वाहन खरीदने का उचित वक्त क्या है ?
कब खरीदें वाहन ?..... सुबह – 9 : 17 से 10 : 41
दोपहर – 1 : 39 से शाम 7 :17
रात       - 10 : 29 से 12 : 05

कब खरीदें इलेक्ट्रोनिक सामान ?.... दोपहर - 1 : 39 से 2 : 53
शाम – 5 : 41 से 7 : 13
कपड़े कब खरीदें ?..... शाम – 4 : 17 से 5 : 41
रात – 10 : 29 से 12 : 05
धनतेरस पर क्या खरीदें ?
मेष राशि -सोने का सिक्का बर्तन और तेजपत्र खरीदें |
वृष राशि -सोने का सिक्का या पीतल के बर्तन खरीदें ,हल्दी खरीदें | 
मिथुन राशि -सोने का सिक्का और केसर खरीदें |
कर्क राशि -चांदी का सिक्का या चांदी के बर्तन खरीदें | कपूर का इस्तेमाल करें |
सिंह राशि -शहद भी खरीदें ,स्टील के बर्तन ,खजूर खरीदें | 
कन्या राशि -स्टील के बर्तन खरीदें ,पत्थर से बनी हुई कोई चीज खरीदें |
तुला राशि -चांदी के बर्तन ,कपड़े भी खरीदें |
वृश्चिक राशि -ताम्बे का बर्तन खरीदना हितकर रहेगा | 
धनु राशि -चांदी या फिर प्लेटिनम के जेवर खरीदें ,परफ्यूम भी खरीद सकते हैं |
मकर राशि -कलई किया हुआ बर्तन खरीदें ,स्टेशनरी का सामान खरीदें |
कुम्भ राशि -पारे से बनी हुई कोई चीज खरीदें ,कमर में बांधने की बेल्ट भी ले सकते हैं | 
मीन राशि -ताम्बे के बर्तन जरुर खरीदें , वास्कट खरीदें |   
धनतेरस पर क्या करें ?.............
मेष -1.मन और नियत साफ़ रखें |
2.माँ और दादी का आशीर्वाद लें |
वृष – 1.रसोई की सफाई जरुर करें |
2.बड़े भाई को सामान गिफ्ट करें | 
3.गाय को घी में चुपड़ी हुई रोटी खिलायें |
मिथुन -1.झूठ बिलकुल न बोलें |
2.मूली का दान करें | 
कर्क -1.बहन से झगडा ना करें |
2. किसी से कर्ज या उधार न लें |
3.किसी नदी का पानी लाकर घर में रखें | 
सिंह -1.पीतल के बर्तन इस्तेमाल करें |
2. 4 सूखे हुये नारियल पानी में बहायें | 
कन्या -1.अपने प्लान के बार में किसी को न बताएं | 
2.सफ़ेद या सरबती टोपी पहनें | 
तुला -1.घर में एक से ज्यादा महिलाएं हो तो झगड़ा ना करें |
2.कल के दिन सोना जरुर पहनें |
वृश्चिक -1.चीनी खाकर निकलें |
2.निकलते वक्त पानी भी जरुर पियें |
3.आग को दूध के छीटें देकर बुझायें | 
धनु -1.सुबह उठकर सूर्य को नमस्कार करें | 
2.घर के पश्चिमी हिस्से में कम रोशनी रखें | 
मकर -1.झूठ ना बोलें | 
2.साले ,बहनोई और भांजे को गिफ्ट करें |
कुम्भ -1.नारियल मन्दिर में चढ़ाएं |
2.बड़े -बुजुर्गों का ओ बादाम खिलाएं | 
मीन -1.बिजली का कोई सामान गिफ्ट में न दें |
2.चीटियों को पिसा हुआ चावल ,आटा और चीनी की त्रिचोली बनाकर डालें | 


धनतेरस पर क्या न करें

मेष - लोहा न खरीदें | सफ़ेद सुरमा, तांबे से बनी चीजें, शहद, गुड, चीनी, लाल मिर्च से बनी चीजें, सिन्दूर, जैकेट, चाकलेट, चाकलेटी रंग के कपड़े, सिलाई का सामान, सर्जरी के इक्विपमेंट्स, नीम से बनी चीजें, पटाखे किसी को गिफ्ट न  करें |

वृष - आलू, जमीकंद, घी, दही, अभ्रक, कपूर, हीरा, परफ्यूम, दही, गाय, मिट्टी से बनी चीजें, शर्ट और बीज किसी को गिफ्ट या दान न करें |

मिथुन - मूंग की दाल, पुस्तक, स्टेशनरी का सामान, कमर में बांधने की बेल्ट, स्टैम्प, मिट्टी का घड़ा, सहतूत, लसोढ़ा, पारे से बनी चीजें, फिटकरी, अण्डा, बांस, ढाक और पेन किसी को दान न करें |

कर्क - सफ़ेद सूती कपड़ा, चावल, चांदी से बनी चीजें, वाटर, फ्यूरिफायर यानि पानी उत्पन्न या प्रोसेस करने वाली चीजें, घोड़ा, खरगोश, दूध से बनी मिठाइयाँ, दूध, तौलिया, चिरायता और दूध वाले पौधे किसी को गिफ्ट न करें |

सिंह - लोहा न खरीदें | विष्णु प्रतिमा, गुड़, बाजरा, शिलाजीत नारंगी रंग की चीजें, तेजपत्ता, माणिक्य और टोपी किसी को गिफ्ट न करें |

कन्या - मूंग की दाल, पुस्तक, स्टेशनरी का सामान, कमर में बांधने की बेल्ट, स्टैम्प, मिट्टी का घड़ा, सहतूत, लसोढ़ा, पारे से बनी चीजें, फिटकरी, अण्डा, बांस, ढाक और पेन किसी को दान न करें |

तुला - आलू, जमीकंद, घी, दही, अभ्रक, कपूर, हीरा, परफ्यूम, दही, गाय, मिट्टी से बनी चीजें, शर्ट और बीज किसी को गिफ्ट या दान न करें |
वृश्चिक - लोहा न खरीदें | सफ़ेद सुरमा, तांबे से बनी चीजें, शहद, गुड, चीनी, लाल मिर्च से बनी चीजें, सिन्दूर, जैकेट, चाकलेट, चाकलेटी रंग के कपड़े, सिलाई का सामान, सर्जरी के इक्विपमेंट्स, नीम से बनी चीजें, पटाखे किसी को गिफ्ट न  करें |

धनु - हल्दी से बनी चीजें, केसर, सोना, पीतल, धार्मिक वस्तुयें, कस्तूरी, नाक पर पहनने के आभूषण, चने की दाल से बनी चीजें किसी को गिफ्ट न करें |
मकर - काला सुरमा, काले नमक से बनी चीजें, उड़द की दाल से बने व्यंजन, शराब, स्प्रिट, सरसों के तेल में बनी चीजें, खजूर, जूते और मोज़े किसी को गिफ्ट न करें |

कुम्भ - जौ से बनी चीजें, बिजली के यन्त्र, नीले रंग की चीजें, चिमनी, पायजामा, ट्राउजर, सिंघाड़े से बनी चीजें, नारियल या उससे बनी चीजें किसी को गिफ्ट न करें |

मीन - हल्दी से बनी चीजें, केसर, सोना, पीतल, धार्मिक वस्तुयें, कस्तूरी, नाक पर पहनने के आभूषण, चने की दाल से बनी चीजें किसी को गिफ्ट न करें | इमली, केला, तिल से बनी चीजें और कम्बल भी किसी को गिफ्ट न करें |



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