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9 ग्रह और उनका जीवन पर प्रभाव

नवग्रह कहे जाने वाले 9 ग्रह वैदिक ज्योतिष में बड़ा महत्व रखते हैं | इसमें सूर्य, चन्द्रमा के अलावा मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि और राहु-केतु शामिल हैं | इनमें से राहू-केतु को छाया ग्रह (Planets) माना जाता है | आपको बता दूं कि इन सभी ग्रहों की प्रकृति एक-दूसरे से भिन्न होती है। कुछ बहुत शुभ होते हैं, तो कुछ आपके काम में रूकावट डालने का प्रयास करते हैं। अतः आज हम आपका सभी ग्रहों से परिचय करायेंगे।

सबसे पहले बात करेंगे सूर्य की

ज्योतिष के अनुसार सूर्य को समस्त ग्रहों का राजा माना जाता है | समस्त प्राणी जगत में ऊर्जा प्रदान करने वाला केंद्र सूर्य को कहा गया है | कुंडली में अगर सूर्य बलवान हो तो व्यक्ति की रोग निरोधक क्षमता सामान्य से अधिक होती है और उसे आसानी से कोई रोग परेशान नहीं कर पाता है ।

चन्द्रमा

वैदिक ज्योतिष में चन्द्रमा को बहुत महत्व दिया जाता है | जन्म से लेकर पूरे जीवन में और यहाँ तक कि विवाह के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए भी चन्द्रमाँ का ही अध्ययन किया जाता है | जन्म नक्षत्र भी जन्म के वक्त किसी नक्षत्र में चन्द्रमा की स्थिति से ही तय होता है |

मंगल

ज्योतिष में मंगल ग्रह (Planets) बहुत शक्तिशाली ग्रह है | मंगल ग्रह व्यक्ति के जीवन में ताकत, साहस और पौरुष का कारक है | यह शारीरिक तथा मानसिक शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है | साथ ही मंगल को जीवन में कई सारी परेशानियों का कारक भी माना गया है, जैसे साहस, भाई के साथ संबंध, अचल सम्पति, भूमि, रक्षा, बहादुरी और नैतिकता की हानि। साथ ही रोग, शत्रुता, अग्नि, क्रोध, घृ्णा, हिंसा, पाप, दुर्घटना, वैवाहिक जीवन में परेशानी और विरोधियों को बुलावा, ये सब मंगल की निगेटिव सिचुएशन में सामने आते हैं।

बुध

बुध ग्रह (Planets) को मुख्यत: वाणी और बुद्धि का कारक माना जाता है | बुध का प्रभाव अगर अच्छा हो तो व्यक्ति बहुत बुद्धिमान होता है और उसका अपनी वाणी पर काफी नियंत्रण रहता है | ऐसे लोगों में मुश्किल परिस्तिथियों को भी अपने अनुकूल बनाने की कुशलता होती है |

गुरु/बृहस्पति

अध्यात्म, गुरु, पढ़ाई, तीर्थ स्थान और मंदिर आदि की विशेषताओं का कारक बृहस्पति को ही माना गया है | इन्हें देव गुरु की उपाधि भी प्राप्त है, यानी बृहस्पति को समस्त देवताओं तथा ग्रहों का गुरू माना जाता है।

शुक्र

शुक्र मुख्य रूप से पति या पत्नी अथवा प्रेमी या प्रेमिका के संबंधों का कारक होता है। किसी व्यक्ति की प्रेम सम्बन्धी बातों के बारे में जानने के लिए शुक्र ग्रह का ही अध्ययन किया जाता है | शुक्र शारीरिक सुखों के भी कारक हैं। संभोग से लेकर हार्दिक प्रेम तक सब विषयों को जानने के लिए कुंडली में शुक्र की स्थिति महत्वपूर्ण मानी जाती है ।

शनि

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि किसी अन्य ग्रह (Planets) की तुलना में ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन तब जब आपने गलत किया हो | शनि की वक्री दृष्टि से कोई नहीं बच सकता है। शनि अच्छे के साथ जितना अच्छा है, बुरे के साथ उतना ही बुरा है। शनि मुख्य रूप से शारीरिक श्रम और सेवकों का कारक है | शनि के प्रभाव से जातक वकील, राजनीती तथा गुढ़ विद्या जैसे क्षेत्रों में रूचि रखता है |

राहू

राहू एक छाया ग्रह है | कुंडली में राहू के अशुभ स्थान पर होने से कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | राहु कठोर वाणी, जुआ, यात्रा, चोरी, दुष्टता, त्वचा के रोग, आदि का कारक होता है। राहु का स्थान मानव मुख में माना जाता है।

केतु

केतु भी राहू की तरह ही एक छाया ग्रह है | केतु को तंत्र-मंत्र, मोक्ष, जादू, टोना और पीड़ा का कारक माना गया है। राहू और केतु के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में काल सर्प दोष बनता है |
अगर आप भी अपनी राशि में ग्रहों की चाल और उनसे आपके जीवन में पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जानना चाहते हैं तो मिलिए आचार्य इंदु प्रकाश जी से, और अपनी समस्त परेशानियों से छुटकारा पाईये |

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