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कैसे करें अचला एकादशी व्रत, क्या है महत्व

ज्येष्ठ मास के कृ्ष्ण पक्ष की एकादशी को अचला एकादशी (Achala Ekadashi) के रूप में मनाई जाती है | आने वाली 30 मई 2019 को अचला एकादशी (Achala Ekadashi) मनाई जायेगी | बाकि सभी एकादशियों में से अचला एकादशी का बहुत महत्व है | मान्यता है की इस दिन व्रत रखने से सभी पाप धुल जाते हैं | अचला एकादशी (Achala Ekadashi) से मिलने वाला पुण्य मकर संक्रांति के दौरान गंगा स्नान व शिवरात्रि के समय काशी में स्नान के बराबर है |

अचला एकादशी (Achala Ekadashi) व्रत अवं पूजा विधि

– एकादशी के दिन प्रात: उठ कर स्नान आदि के बाद व्रत का संकल्प लें |
– उसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें | उपवास के दौरान एक समय फलाहार और जल ग्रहण कर सकते हैं |
– एकादशी व्रत की कथा सुने अथवा आरती करें | फिर द्वादशी के दिन प्रात: उठ कर श्रीविष्णु भगवान की पूजा करें। ब्राह्मणों को दान दें। उसके उपरांत भोजन ग्रहण करें ।

कथा

महिध्वज नामक एक धर्मात्मा राजा था | उसके छोटा भाई बज्रध्वज जो की बज्रध्वज बहुत क्रूर, अधर्मी था, महिध्वज से बहुत द्वेष रखता था | इसी द्वेष के चलते एक रात्रि को मौका देख वह अपने बड़े भाई की हत्या कर देता है और उसके शव को पीपल के पेड़ के निचे दबा देता है | मृत्यु के बाद वह उस पीपल के पेड़ पर उत्पात करने लगता है | एक दिन वहाँ से गुज़र रहे धौम्य नामक ऋषि को उसका बोध हुआ | वह अपने बल से पेड़ से निचे उतारते हैं सुर उसे उपदेश देते हैं | ऋषि धौम्य उसे अचला एकादशी व्रत करने का मार्ग दिखाते हैं | इस व्रत को करने से उसे प्रेत योनी से मुक्ति मिलती है और मोक्ष प्राप्त होता है |
अचला एकादशी (Achala Ekadashi) के दिन किये जाने वाले उपाय जानने के लिए या अपनी जीवन से जुडी कोई भी समस्या का समाधान प्राप्त करने के लिए मिलिए आचार्य इंदु प्रकाश जी से और सभी चिंताओं से मुक्ति पाईये |

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