आध्यात्मिक

गोवर्धन पूजा से जीवन मे होगा सुख समृद्धि का वास

इस पूजा को भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युग मे ब्रजवासियों के द्वारा की जाने वाली देवराज इंद्र के स्थान पर प्रारम्भ की थी। उनकी इस बात से इंद्र देव ने नाराज होकर सात दिनों तक बहुत ही भयंकर वर्षा की थी जिस कारण पूरा ब्रज मण्डल डूबने लगा था। ब्रजवासियों की इस परेशानी को देखकर सभी की सहायता के लिए श्रीकृष्ण ने अपनी तर्जनी पर सप्तकोशी परिधि वाले विशाल गोवर्धन पर्वत को धरण कर सारे ब्रज वासियों को इस भयंकर वर्षा से बचने के लिए आश्रय दिया था। पूरे सात दिनो तक यह वर्षा हुयी थी। लेकिन ब्रज वासियों को कोई भी परेशानी नहीं हुयी थी तब देवराज इंद्रा ने श्री कृष्ण की इस अलौकिक लीला के सम्मुख नतमस्तक होकर अपने द्वारा किए करे पाप की क्षमा मांगी। इसके बाद श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत का पंचामृत से अभिषेक कर 56 भोगों और 36 व्यंजनों का भोग लगाकर उनका विधि-पूर्वक पूजन किया। इसी परंपरा को ध्यान मे रखते हुये सारे ब्रज मे दीपावली के दूसरे दिन यह पर्व बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है। ब्रज मे ही नहीं उत्तर प्रदेश, बिहार झारखंड हरियाणा व पंजाब मे भी इस पर्व को बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है। आजकल बिहार और उड़ीसा मे गायदौड़ नाम का उत्सव मनाया जाता है, जो अपराहन मे कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को होता है। वृंदावन और मथुरा में इस दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट उत्सव मनाया जाता है। गोवर्धन उत्सव श्रीविष्णु भगवान की प्रसन्नता के लिए मनाया जाता है। इस पूजा से पुत्र, पौत्रादि संततियां प्राप्त होती हैं, ऐश्वर्य और सुख की वृद्धि होती है। गोवर्धन पर्वत की पूजा मे वे लोग जाते है जो गोवर्धन पर्वत के पास रहते है लेकिन जो लोग दूर रहते है वे इस पर्वत की आकृति बनाकर 16 उपचारों से गोवर्धन और कृष्ण की पूजा करते है। सर्वप्रथन प्रातः काल स्नान करके ताजे पकवान बनाये जाते है। इसके बाद मिट्टी या गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनायी  जाती है। इसके साथ ही गाय, भैंस, खेत खलिहान, बैल, औजार, दूध, दही आदि बनाया जाता है। इसके बाद विधि-विधान से पूजा करके नवैद्य चढ़ाया जाता है। इसके बाद आरती करें फिर प्रसाद के रुप में दही व चीनी का मिश्रण सब में बांट दें। दान-दक्षिणा दें। उसके  बाद  घर के सारे सदस्य एक साथ भोजन करते है। सभी पर्वतों मे श्रेष्ठ गोवर्धन पर्वत को पर्वतों का राजा माना जाता है। इस दिन दुखी रहने वाला व्यक्ति साल भर दुखी रहता है। इसलिए हर व्यक्ति को इस पर्व पर खुश रहकर पूर्ण भाव से इस पर्व को मनाना चाहिए। इस पूजा से व्यक्ति के जीवन से दुख और दरिद्रता दूर होता है और उसके जीवन मे सुख समृद्धि का वास होता है इस दिन खुश रहें और आनंद मंगल करें। अच्छा भोजन करें, बढ़िया वस्त्र धारण कर घूमने  फिरने जायें तो वर्ष भर आनंद मंगल के साथ बीतेगा। भूल कर भी इस दिन दुखी या परेशान ना हो सभी चिंताओं से मुक्त होकर यह दिन व्यतीत करें। स्वयम ही चिंताएं आपसे सदा के लिए दूर हो जाएंगी।

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