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सिद्धिविनायक मन्दिर का क्या है इतिहास ?

मुंबई में स्थित भगवान गणेश (Shree Ganesh) को समर्पित सिद्धिविनायक मन्दिर (Siddhivinayak Mandir) सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में प्रसिद्ध है | इस मन्दिर का निर्माण 1801 में विट्ठु और देउबाई पाटिल ने करवाया था | यहाँ हर धर्म और जाती के भक्त भगवान गणेश (Shree Ganesh) के दर्शन करने आते हैं |

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इस मन्दिर में भगवान गणेश की चतुर्भुज प्रतिमा विराजमान है | यहाँ भगवान गणेश के उपरी दायें हाथ में कमल और बाएं हाथ में अंकुश है और नीचे के दाहिने हाथ में मोतियों की माला और बाएं हाथ में मोदक भरा कटोरा है | उनके दोनों ओर उनकी पत्नियाँ रिद्धि और सिद्धि विराजमान हैं |

एक मान्यता के अनुसार, बहुत समय पहले सृष्टि का निर्माण करते समय भगवान विष्णु को नींद आ जाती है और वे सो जाते हैं | तब विष्णु भगवान के कानों से दो दैत्य मधु व कैटभ निकलते हैं और आते ही सभी देवताओं को परेशान करने लगे | इस परेशानी से मुक्ति के लिए सभी देवगन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के पास जाते हैं | तब विष्णु भगवान निद्रा से जागते हैं और दैत्यों को मारने की कोशिश करते हैं पर वे ऐसा करने में असफल हो जाते हैं | तब भगवान विष्णु श्री गणेश का आह्वान करते हैं और गणेश जी प्रसन्न होते हैं और दैत्यों का संहार करते हैं | इसके बाद भगवान विष्णु (Lord Vishnu) ने पर्वत के शिखर पर मंदिर का निर्माण करते हैं तथा भगवान गणेश (Shree Ganesh) की मूर्ति स्थापित करते हैं । तभी से इस स्थल को ‘सिद्धटेक’ के नाम से जाना जाने लगा । आगे जा कर यह स्थल सिद्धिविनायक मन्दिर (Siddhivinayak Mandir) के नाम से जाना जाने लगा |

इस मंदिर का महत्व है की भक्तों के द्वारा मांगी गयी हर मनोकामना जल्द से जल्द पूरी होती हैं |

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