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शनि प्रदोष व्रत के दिन कैसे करें अपने सभी पापों का अंत

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शनि प्रदोष व्रत शिव जी को प्रसन्न करने के लिए किये जाने वाले समस्त व्रतों में जल्दी शुभ फल देने वाला व्रत है | यह व्रत कर के कोई भी अपनी मनोकामना पूरी करा सकता है | यह व्रत आपको शनि की साढ़ेसाती ढैय्या के दुष्प्रभाव से भी दूर करता है |
मान्यता है कि भगवान ब्रह्माजी ने प्रदोष तिथि पर ही पृथ्वी की रचना की थी | जो भी व्यक्ति प्रदोष व्रत रखता है उसके सभी पापों का अंत होता है |

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शनि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और शनि की पूजा विधि –
सूर्योदय से पहले उठें | और स्नान कर हल्के रंग के कपड़े पहने |
पीपल के पेड़ के निचे एक चौमुखी सरसों के तेल का दिया जलाएं और एक दिया शनि मंदिर में जलाएं|
दिन में जितना हो सके ॐ नमः शिवाये मंत्र का जाप करें और निराहार करें |
शाम को प्रदोष काल में शिव को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से स्नान कराएं और बाद में शुद्ध जल से भी स्नान कराएं |
इसके बाद रोली, मोली, चावल, धूप, दीप से पूजन करें |
शनि प्रदोष व्रत कथा
एक नगर में एक सेठ हुआ करता था | उसके पास धन-दौलत और वैभव किसी भी चीज़ की कमी नहीं थी | वह अत्यन्त दयालु था। वो कभी भी किसी को खली हाथ नहीं भेजता था | लेकिन दूसरों को सुखी देखने वाले सेठ और उसकी पत्‍नी स्वयं काफी दुखी थे। उनकी कोई भी संतान नहीं थी । एक दिन उन्होंने तीर्थयात्रा पर जाने का निश्‍चय किया और अपने काम-काज सेवकों को सोंप चल पड़े। अभी वे नगर के बाहर ही निकले थे कि उन्हें एक विशाल वृक्ष के नीचे समाधि लगाए एक तेजस्वी साधु दिखाई पड़े। दोनों ने सोचा कि साधु महाराज से आशीर्वाद लेकर आगे की यात्रा शुरू की जाए। पति-पत्‍नी दोनों साधु के सामने हाथ जोड़कर बैठ गए और उनकी समाधि टूटने की प्रतीक्षा करने लगे। सुबह से शाम और फिर रात हो गई, लेकिन साधु की समाधि नही टूटी। मगर सेठ पति-पत्‍नी धैर्यपूर्वक हाथ जोड़े बैठे रहे।
अगले दिन प्रातः काल साधु समाधि से उठे । सेठ पति-पत्‍नी को देख वह मन्द-मन्द मुस्कराए और आशीर्वाद स्वरूप हाथ उठाकर बोले मैं तुम्हारे अन्तर्मन की कथा भांप गया हूं वत्स! मैं तुम्हारे धैर्य और भक्तिभाव से अत्यन्त प्रसन्न हूं। साधु ने सन्तान प्राप्ति के लिए उन्हें शनि प्रदोष व्रत करने की विधि समझाई।
तीर्थयात्रा के बाद दोनों वापस घर लौटे और नियमपूर्वक शनि प्रदोष व्रत करने लगे । कालान्तर में सेठ की पत्‍नी ने एक सुन्दर पुत्र जो जन्म दिया । दोनों आनन्दपूर्वक रहने लगे।

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