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रविवार व्रत कथा और उसकी विधि

रविवार का दिन सप्ताह के दिनों में खास अहमियत रखता है। सूर्य देवता जो जीवन में ऊर्जा का संचार करते हैं। सूरज की हर पहली किरण को उम्मीद की नई किरण के रूप में देखा जाता है। इन्हीं सूर्य देव का एक नाम रवि भी है। रविवार सूर्य देवता का दिन है। मान्यता है कि रविवार के दिन नियमित रूप से सूर्यदेव के नाम का उपवास कर उनकी आराधना की जाये उपासक की सारे दुःख दूर हो जाते है। तो आइये जानते हैं रविवार के व्रत की कथा व पूजा विधि के बारे में।

प्राचीन काल में एक बुढ़िया रहती थी | वह नियमित रूप से रविवार का व्रत करती थी| रविवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर बुढ़िया स्नान आदि करने के बाद आंगन को गोबर से लीपकर स्वच्छ करती, उसके बाद सूर्य भगवान की पूजा करते हुए रविवार व्रत कथा सुन कर सूर्य भगवान को भोग लगाकर दिन में एक बार भोजन करती थी! सूर्य भगवान की कृपा से बुढ़िया को कभी किसी प्रकार की समस्या व कष्ट नहीं होती थी| धीरे-धीरे उसका घर धन और खुशियों से भर रहा था| उस बुढ़िया को सुखी होते देख उसकी पड़ोसन उससे बुरी तरह जलने लगी! बुढ़िया ने कोई गाय नहीं पाल रखी थी| वह अपनी पड़ोसन के गाय का गोबर लाती थी| पड़ोसन ने कुछ सोचकर अपनी गाय को घर के भीतर बांध दिया! रविवार को गोबर न मिलने से बुढ़िया अपना आंगन नहीं लीप सकी | आंगन न लीप पाने के कारण उस बुढ़िया ने सूर्य भगवान को भोग नहीं लगाया और उस दिन स्वयं भी भोजन नहीं किया | सूर्यास्त होने पर बुढ़िया भूखी-प्यासी सो गई| रात में सूर्य भगवान ने उसे स्वप्न में दर्शन दिए और व्रत न करने और उन्हें भोग न लगाने का कारण पूछा| बुढ़िया ने बहुत ही करुण स्वर में पड़ोसन के द्वारा घर के अन्दर गाय बांधने और गोबर न मिल पाने की बात कही| सूर्य भगवान ने अपनी भक्त बुढ़िया की परेशानी का कारण जानकर उसके सब दुःख दूर करते हुए कहा- हे माता, तुम प्रत्येक रविवार को मेरी पूजा और व्रत करती हो| मैं तुमसे अति प्रसन्न हूं और तुम्हें ऐसी गाय प्रदान करता हूं जो तुम्हारे घर-आंगन को धन से भर देगी| तुम्हारी सभी मनोकामनाएं पूरी होगी| रविवार का व्रत करनेवालों की मैं सभी इच्छाएं पूरी करता हूं| स्वप्न में उस बुढ़िया को ऐसा वरदान देकर सूर्य भगवान अन्तर्धान हो गएकहा जाता है कि रविवार व्रत करने व कथा सुनने से बांझ स्त्रियों को पुत्र की प्राप्ति होती है|

रविवार व्रत व पूजा की विधि

पौराणिक ग्रंथों में रविवार के व्रत को समस्त पापों का नाश करने वाला माना गया है। अच्छे स्वास्थ्य व घर में समृद्धि की कामना के लिये भी रविवार का व्रत किया जाता है। इस व्रत के दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है। पूजा के बाद भगवान सूर्यदेव को भोग लगाने के बाद तेल रहित भोजन करना चाहिये। एक वर्ष तक नियमित रूप से उपवास रखने के पश्चात व्रत का उद्यापन करना चाहिये। मान्यता है कि इस उपवास को करने से उपासक जीवन पर्यंत तमाम सुखों को भोगता है व मृत्यु पश्चात सूर्यलोक में गमन कर मोक्ष को पाता है।

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