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मेष संक्रांति है सभी पर्वों में विशेष

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14 अप्रैल को सुबह 8 बजकर 28 मिनट पर सूर्य मीन राशि से परिवर्तित होकर मेष राशि में आ रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में भी सूर्य को क्रूर ग्रह माना जाता है और यह जातक के जीवन में कई शुभ अशुभ प्रभाव डालता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कहा जाता है कि सूर्य का राशि परिवर्तन करना संक्रांति कहलाता है और इस दिन को स्नान-दान-तर्पण आदि के लिये बहुत शुभ माना जाता है। मेष राशि में सूर्य का आना तो और भी शुभ होता है क्योंकि यह दिन सौर वर्ष का पहला दिन होता है. यानि सौर वर्ष का आरंभ मेष संक्राति के साथ होता है।
ज्योतिषचार्य इन्दु प्रकाश जी कहते हैं कि जब सूर्य मीन राशि से मेष राशि में संक्रमण करते हैं तब यह काल मेष संक्रांति (Mesh Sankranti) कहलाता है और तब से सौर वैशाख मास की प्रवृत्ति होती है। इसी संक्रांति को भगवान सूर्य उत्तरायण की आधी यात्रा पूर्ण करते हैं | भारत के अलग-अलग राज्यों में मेष संक्रांति (Mesh Sankranti) को अलग-अलग नामों से जाना जाता है | बिहार में सतुआनी, ओडिशा में पना संक्रांति, तमिलनाडु में पुथांदु, पश्चिम बंगाल में पोइला बैसाख, आसाम में बोहाग बिहू, पंजाब में वैशाख, केरल में विशु के नाम से जाना जाता है। बंगाल वासी इसे नव वर्ष के रूप में मनाते हैं। इस संक्रांति को धर्मघट का दान, स्नान, तिल द्वारा पितरों का तर्पण तथा मधुसूदन भगवान की पूजन का विशेष महत्व है।

करें मेष संक्रांति (Mesh Sankranti) के दिन ये विशेष उपाय –

देखा जाय तो भगवान सूर्य देव को नित्य अर्घ्य देना अच्छा है पर मेष संक्रान्ति  का अर्घ्य विशेष है। इस दिन सुबह जल्दी उठा कर स्नान आदि से शुद्ध होकर, शरीर पर हो सके तो कोई लाल वस्त्र धारण करें, फिर ताम्बे के लोटे में जल भरें| फिर इस जल में लाल चन्दन, थोडा कुमकुम और लाल फूल, जैसे गुलाब की पत्तियां डालें| फिर पूर्व की और मुंह करके दोनों हाथों से लोटे को सर से ऊपर उठा कर धीरे धीरे जल की धारा बना कर 7 बार में जल चढ़ाएं। यदि अपने घर में सूर्य को अर्घ्य दे रहे हैं तो जल के गिरने की जगह कोई बर्तन या बाल्टी रख लें, और एकत्रित जल को किसी गमले पौधे या पेड़ पर डालें। सूर्य को अर्घ्य देते समय गायत्री मन्त्र का जाप करते रहें। यदि गायत्री मन्त्र जपने में मुश्किल हो तो सिर्फ “ॐ सूर्याय नमः” “ॐ आदित्याय नमः का जाप करते रहें। सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए निम्न मंत्र का जितना हो सके, जाप करें। यदि जन्म कुण्डली मे सूर्य नीच का है तो मेष संक्रान्ति के दिन दान का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन जरुरतमंदों को इस दिन गेहूं,  गुड और चांदी की कोई भी वस्तु दान करना शुभ माना जाता है। इस दान से स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का भी निवारण भी  किया जाता है।
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