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छे मुखी रुद्राक्ष के फायदे, ज्ञान और तीव्र बुद्धि

रुद्राक्ष (Rudraksha) की उत्पत्ति भगवान शिव के रूद्र से हुई है इसलिए इसका नाम रुद्राक्ष पड़ा। रुद्राक्ष को पूर्ण विधिवत व श्रद्धा अनुसार धारण करने से भगवान शिव की तो विशेष कृपा प्राप्त होती ही है साथ में रुद्राक्ष को उनके मुख के अनुसार धारण करने से अलग-अलग देवों द्वारा भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। एक से लेकर 14 मुखी तक के सभी रुद्राक्षों में अलग-अलग देवों का आशीर्वाद निहित होता है।

ज्योतिषाचार्य इंदु प्रकाश जी कहते हैं कि छह मुखी रुद्राक्ष (Six mukhi rudraksha) भगवान शिव के पुत्र कार्तिके का स्वरुप माना गया है। ज्योतिष की दृष्टि से इस रुद्राक्ष पर शुक्र देव का प्रभाव माना गया है। महाशिवपुराण के अनुसार ब्रह्म हत्या आदि के पापों से मुक्ति प्रदान करने में यह रुद्राक्ष सहायक सिद्ध होता है। छह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से ज्ञान की प्राप्ति होती है, बुद्धि तीव्र होती है, शरीर को रोग मुक्त करने में सहायक होता है और धन प्राप्ति भी करवाता है । यह रुद्राक्ष विशेष कर पढने वाले बालकों को दाई भुजा में धारण करना चाहिए। इस रुद्राक्ष को धारण करने से व्यक्ति में नेत्रित्व करने का गुण आ जाता है। भाषण आदि कला में भी वाक शक्ति प्रबल होती है।

छह मुखी रुद्राक्ष (Six mukhi rudraksha) के साथ यदि दाई और बाई ओर एक एक पांच मुखी का रुद्राक्ष भी धारण किया जाए तो अति उत्तम होता है। भगवान कार्तिके की विशेष कृपा प्राप्त होती है और सांसारिक दुखों से लड़ने की क्षमता प्रदान करके जीवन के स्तर को अति उत्तम बनाता है। बचपन में जिन बालकों की बुद्धि अधिक तीव्र नहीं होती या परीक्षा के समय में बालक को चिंता होती है, ऐसे बालकों को दो पांच मुखी के बीच में एक छह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से परीक्षा में सफलता मिलती है इसलिए विशेष कर सभी बालकों को जो शिक्षा ग्रहण कर रहे हों, उन्हें ये रुद्राक्ष धारण करने चाहिए।

ज्योतिष और षडमुखी रुद्राक्ष –

षड मुखी रुद्राक्ष (Six mukhi rudraksha) का सञ्चालन और अधिपति ग्रह शुक्र है जो भोग-विलास और सुख-सुविधा के प्रतिनिधि ग्रह है। शुक्र ग्रह गुप्तेंद्रिय, वीर्य, स्त्री, मुख, गला, पुरुषार्थ, काम-वासना,  प्रेम, संगीत इत्यादि का भी कारक ग्रह है। शुक्र के दुष्प्रभाव से होने वाले रोग नेत्ररोग, यौनरोग, मुखरोग, मूत्ररोग, गला का रोग, जलशोथ इत्यादि रोग होते है। इन सभी रोगो के निदान एवं निवारण के लिए षण्मुखी रुद्राक्ष अवश्य ही धारण करना चाहिए। वर्तमान भौतिकवादी युग में शुक्र ग्रह का महत्त्व अधिक हो गया है। भोग-विलास के उपकरण अधिकाधिक आविष्कृत और प्रचलित हुए है। संगीत, परिवहन, नारियो की जीवन शैली और सामाजिक स्थिति में भी काफी परिवर्तन हुआ है। इन सब का कारक ग्रह शुक्र है यही कारण है की षडयानि 6 मुखीरुद्राक्ष इस युग के लिय बहुत ही महत्वपूर्ण है। यदि आप जीवन से जुडी किसी भी अन्य समस्या का निदान चाहते हैं या रोग मुक्त होना चाहते हैं तो विश्व विख्यात ज्योतिषाचार्य इंदु प्रकाश जी से जुड़ कर अपनी समस्या का निदान प्राप्त कर सकते हैं।

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