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षटतिला एकादशी के दिन क्या करें

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षटतिला एकादशी को हिंदू धर्म में बेहद ही खास माना जाता है। इस दिन व्रत और व्रत कथा का पढ़ना और सुन्ना शुभ माना जाता है |
आईये जानते हैं षटतिला एकादशी कब आती है और इस दिन हमें क्या करना चाहिए | इस बार यह एकादशी 31 जनवरी 2019 को है | इसके बाद 1 फरवरी को द्वादशी है, इस दिन किसी ब्राह्मण को दान करना शुभ माना जाता है |

पूजा विधि

इस दिन हमें विष्णु भगवान की पूजा करनी चाहिए | अगले दिन द्वादशी पर नाहा कर भगवान् विष्णु को भोग लगाया जाता है और ब्राह्मणों को भोजन कराएं |और अगर यह न कर सकते हों to उनके घर सूखा सीधा दें | उसके बाद खुद भोजन करें | इस दिन हमें जितना हो सके टिल पर ज़ोर दें | टिल को दान करें, टिल का भोजन करें , टिल के पानी में स्नान करें, टिल की मिठाई भी बनायें|
इस दिन करें ये काम :-
षटतिला एकादशी पर सूर्योदय से पहले उठ जाएं और तिल का उबटन लगाएं।
पूर्व दिशा की ओर मुंह करें और पांच मुट्ठी तिलों से 108 बार ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र की आहुति दें।
शाम को व्रत के बाद तिल का भोजन बनाकर भगवान विष्णु को भोग लगायें और प्रसाद के रूप में सेवन करें।
जरूरतमंद को तिल से बनी मिठाई का दान दें।

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इस दिन न करें ये काम
प्याज लहसुन का सेवन ना करें।
काम क्रोध लोभ मोह अहंकार जैसी भावनाओं से दूर रहें।
किसी का झूठा भोजन न करें और न ही किसी को अपना झूठा खाने दें ।
झूठ ना बोलें और बड़ों का अनादर ना करें ।
क्या इस दिन की कथा
भगवान विष्णु ने एक दिन नारद मुनि को षटतिला एकादशी व्रत की कथा सुनाई | इस कहानी के मुताबिक प्राचीन काल में धरती पर एक विधवा ब्राह्मणी रहती थी। जो विष्णु की बहुत बड़ी भक्त थी | वह पूरी श्रद्धा से उनकी पूजा करती थी। एक बार उस ब्राह्मणी ने एक महीने तक व्रत रखा और उनकी उपासना की। व्रत के प्रभाव से उसका शरीर तो शुद्ध हो गया लेकिन वो ब्राह्मणी कभी अन्न दान नहीं करती थी | तो एक दिन भगवान विष्णु खुद उस ब्राह्मणी के पास भिक्षा मांगने गए । जब विष्णु देव ने भिक्षा मांगी तो उसने एक मिट्टी का पिण्ड उठाकर देे दिया। तब भगवना विष्णु ने बताया कि जब ब्राह्मणी देह त्याग कर मेरे लोक में आई तो उसे यहां एक खाली कुटिया और आम का पेड़ मिला। खाली कुटिया को देखकर ब्राह्मणी ने पूछा कि मैं तो धर्मपरायण हूं फिर मुझे खाली कुटिया क्यों मिली? तब विष्णु बताया कि यह अन्नदान नहीं करने तथा मुझे मिट्टी का पिण्ड देने के कारण हआ है। तब भगवान विष्णु ने बताया कि जब देव कन्याएं आपसे मिलने आएं तब आप अपना द्वार तभी खोलना जब वो आपको षटतिला एकादशी के व्रत का विधान बताएं। तब ब्राह्मणी ने षटतिला एकादशी का व्रत किया और उससे उसकी कुटिया धन धान्य से भर गई।

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