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विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस – 15 जून

भारतीय समाज में बुजुर्गों का हमेशा सम्मानीय स्थान रहा है परन्तु बीते कुछ दशकों की हेल्पेज इंडिया की रिपोर्ट से पता चला है कि उसमें धीरे-धीरे कमी आ रही है | बुजुर्गों के अनुभवों को बहुत कीमती समझने वाला समाज आज इनके प्रति बुरा बर्ताव करने लगा है | जिसका मुख्या कारण भारतीय संस्कृति और परम्परा का पतन होना है साथ ही इसके लिए बेटी और बहू में फर्क करने वाली परिवारिक स्थिति और सामाजिक व्यवस्था भी जिम्मेदार है |

वर्ष 2017 में ‘वर्ल्ड एल्डर एब्यूज अवेयरनेस डे’ के अवसर पर हेल्पेज इंडिया ने बुजुर्गों की स्थिति पर एक सर्वे किया है, जिससे पता चला कि भारत में भी बुजुर्गों के साथ बहुत शर्मनाक व्यवहार होने लगा है | यह सर्वे देश के 19 छोटे बड़े शहरों में लगभग पांच हजार से अधिक बुजुर्गों पर किया गया है | इस सर्वे के अंतर्गत जिन बुजुर्गों के बातचीत की गयी उनमें से 44 प्रतिशत लोगों का कहना था कि सार्वजनिक स्थानों में उनके साथ बहुत गलत व्यवहार किया जाता है | सर्वे में बेंगलूर के 70 प्रतिशत बुजुर्गों ने सार्वजनिक जगहों में बुरे बर्ताव की बात कही वहीँ हैदराबाद में ये आकड़ा 60 फ़ीसदी, गुवाहाटी में 59 फ़ीसदी और कोलकाता में 52 फ़ीसदी था |

बुजुर्गों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है साथ ही तिरस्कार, मानसिक व शारीरिक उत्पीडन का सामना भी करना पड़ता है | इस सर्वे के अनुसार 53 फ़ीसदी बुजुर्गों का मानना है कि समाज में उनके साथ भेदभाव किया जाता है | अस्पताल, बस अड्डा, बसों, बिल भरने के दौरान और बाजार में भी बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार के मामले सामने आते है | मुख्यतः अस्पतालों में बुजुर्गों को भेदभाव या बुरे बर्ताव का सामना अधिक करना पड़ता है | यह आकड़ा दिल्ली में सबसे अधिक 26 फ़ीसदी वहीँ बेंगलूर में 22 फ़ीसदी है | 12 प्रतिशत बुजुर्गों का कहना था की उन्हें उस वक्त कडवी प्रतिक्रिया झेलनी पड़ती है जब वे लाइन में पहले खड़े होकर अपने बिल भरते है |

क्यों बढती जा रही है बुजुर्गों की उपेक्षा –

आज की भागदौड़ से भरी जिंदगी में आदमी इतना व्यस्त होता जा रहा है कि उसके पास अपने परिवार के लिए भी समय निकलना मुश्किल होता जा रहा है साथ ही  संयुक्त परिवार व्यवस्था के चरमराने से बुजुर्गों को अकेला छोड़ दिया जाता है | 2017 में हुए सर्वे के अनुसार 64 प्रतिशत बुजुर्गों का मानना है कि बढ़ती उम्र और सुस्त होने की वजह से लोग उन्हें दरकिनार कर देते है या रूखेपन से बात करते है |

बिगत वर्ष में सर्वेक्षण रिपोर्ट ‘भारतीय समाज अपने बुजुर्गों के साथ कैसे व्यवहार करता है’, को जारी करने के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक ऋषि कुमार शुक्ल ने अपने भाषण के दौरान बताया कि बुजुर्गों के प्रति दुर्व्यवहार का मुख्या कारण नयी पीड़ी के पास समय का आभाव और एकल परिवार व्यवस्था है | उन्होंने कहाँ की भावनात्मक कमी को पूरा करने के लिए आज युवा समय नहीं निकालता है |

इस सन्दर्भ में समाजशास्त्री डॉ साहेबलाल कहते है निरंतर बाजारवाद और उदारीकरण की वजह से समाज में जो बदलाव आया उसमें उपभोक्ता समाज बुजुर्गों को खोटा सिक्का समझने लगा है | उनका मानना है कि अगर युवाओं और बुजुर्गों के बीच आपसी सामंजस्य हो तो आज भी बुजुर्ग परिवार और समाज के लिए काफी उपयोगी है |

कुछ अन्य सर्वे की रिपोर्ट से पता चला की भारत में बुजुर्गों की स्थिति दुनिया के अन्य देशों की अपेक्षा बेहतर है और हम युवाओं को इस स्थिति को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए | जिससे एक बेहतर समाज का निर्माण किया जा सके |

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