Rahukaal Today/ 18 February 2017 (Delhi)-24 February 2017

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Makar Sankranti | Depwali | Makar Sankranti Pooja | Indian Festival
Makar Sankranti
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Makar Sankranti (सूर्य की संक्रांति)

इस बार सूर्यदेव धनु राशि को छोड़ कर मकर राशि में 14 जनवरी की देर रात को जायेंगे। रात बारह बजे के बाद जब अंग्रेजी तारीख 15 जनवरी हो जायेगी तब आधी रात को एक बजकर 26 मिनट पर सूर्य की मकर संक्रांति घटित होगी। चूंकि यह संक्रांति 14 जनवरी की रात में होगी लिहाजा इस बार मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहेगा। संक्रांति का स्नान दान पुण्य काल के दौरान करना ही अच्छा रहता है।

संक्रांति का शाब्दिक अर्थ है-गति या चाल। प्रति माह होने वाला सूर्य का निरयण राशि परिवर्तन संक्रांति कहलाता है। संक्रांति को सजीव माना गया है। प्रति माह संक्रांति अलग-अलग वाहनों व वस्त्र पहन कर, शस्त्र, भोज्य पदार्थ एवं अन्य पदार्थों के साथ आती है। सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में जाने को ही संक्रांति कहते हैं। एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति की अवधि ही सौरमास है। वैसे तो सूर्य संक्रांति 12 हैं, लेकिन इनमें से चार संक्रांति महत्वपूर्ण हैं, जिनमें मेष, कर्क, तुला, मकर संक्रांति हैं। मकर संक्रांति के शुभ मुहूर्त में स्नान, दान व पुण्य का शुभ समय का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गुड़ व तिल लगा कर नर्मदा में स्नान करना लाभदायी होता है। इसके पश्चात दान संक्रांति में गुड़, तेल, कंबल, फल, छाता आदि दान करने से लाभ मिलता है तथा पुण्य फल की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति ऐसा दिन है, जबकि धरती पर अच्छे दिन की शुरुआत होती है। ऐसा इसलिए कि सूर्य दक्षिण के बजाय अब उत्तर को गमन करने लग जाता है। जब तक सूर्य पूर्व से दक्षिण की ओर गमन करता है तब तक उसकी किरणों का असर तमोगुणी माना गया है, लेकिन जब वह पूर्व से उत्तर की ओर गमन करते लगता है तब उसकी किरणें सेहत और शांति को बढ़ाती हैं।

क्या करें, क्या न करें

1 इस दिन प्रातः काल उबटन लगाकर तीर्थ के जल से मिश्रित जल से स्नान करें।

2 तीर्थ का जल उपलब्ध न हो तो दूध् दही से स्नान करें।

3 तीर्थ स्थान या पवित्र नदियों में स्नान करने का महत्व अधिक है।

4 स्नान के उपरांत नित्य कर्म तथा अपने आराध्य देव की आराधना करें।

5 पुण्यकाल में दांत मांजना, कठोर बोलना, फसल तथा वृक्ष का काटना, गाय, भैंस का दूध निकालना कार्य नहीं करना चाहिए।

6 इस दिन पतंगें उड़ाए जाने का विशेष् महत्व है।

संक्रांति पर्व एक रूप अनेक

सूर्य की मकर-संक्रांति को महापर्व का दर्जा दिया गया है। उत्तर प्रदेश में मकर-संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाकर खाने तथा खिचड़ी की सामग्रियों को दान देने की प्रथा होने से यह पर्व खिचड़ी के नाम से प्रसिद्ध हो गया है। बिहार-झारखंड एवं मिथिलांचल में यह धारणा है कि मकर-संक्रांति से सूर्य का स्वरूप तिल-तिल बढ़ता है, अतः वहां इसे तिल संक्रांति कहा जाता है। यहां प्रतीक स्वरूप इस दिन तिल तथा तिल से बने पदार्थो का सेवन किया जाता है। मकर संक्रांति को विभिन्न जगहों पर अलग-अलग तरीके से मानाया जाता है। हरियाणा व पंजाब में इसे लोहड़ी के रूप में मनाया जाता हैं। उतर प्रदेश व बिहार में इसे खिचड़ी कहा जाता हैं। उतर प्रदेश में इसे दान का पर्व भी कहा जाता हैं। असम में इस दिन बिहू त्यौहार मनाया जाता हैं। संक्रांति एक विशेष त्यौहार के रूप में देश के विभिन्न अंचलों में विविध प्रकार से मनाई जाती है ।

स्नान का मान

कहा जाता है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान करने पर सभी कष्टों का निवारण हो जाता हैं। इसीलिए इस दिन दान, तप, जप का विशेष महत्व हैं। ऐसा मान्यता है कि इस दिन को दिया गया दान विशेष फल देने वाला होता है ।

मकर संक्रांति का ऐतिहासिक महत्व

माना जाता है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उनके घर जाते हैं। चूंकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अतः इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता हैं। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति का ही चयन किया था। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं। मकर-संक्रांति से प्रकृति भी करवट बदलती हैं। इस दिन लोग पतंग भी उड़ाते हैं। उन्मुक्त आकाश में उड़ती पतंगें देखकर स्वतंत्रता का अहसास होता .

मकर संक्रांति पर्व और तिल

तिल एक ऐसा भोजन है तो मकर संक्रांति के पर्व से जुड़ा हुआ है। मकर संक्रांति के पर्व पर तिल का विशेष महत्त्व माना जाता है। वैसे तो तिल केवल खाने की चीज है, लेकिन इस दिन इसे दान देने की परम्परा भी प्रचलित है। इस दिन तिल के उबटन से स्नान करके ब्राह्मणों एवं गरीबों को तिल एवं तिल के लड्डू दान किये जाते हैं। यह मौसम शीत ऋतु का होता है, जिसमें तिल और गुड़ से बने लड्डू शरीर को गर्मी प्रदान करते हैं। प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है कि संक्रांति के दिन तिल का तेल लगाकर स्नान करना, तिल का उबटन लगाना, तिल की आहुति देना, पितरों को तिल युक्त जल का अर्पण करना, तिल का दान करना एवं तिल को स्वयं खाना, इन छह उपायों से मनुष्य वर्ष भर स्वस्थ, प्रसन्न एवं पाप रहित रहता है।

तिल के उपयोग

इस दिन इसको पकाना खाना और दान करना शुभ माना जाता है। तिल धार्मिक रीति-रिवाजों में इस्तेमाल होता आया है। शादी-ब्याह के मौकों पर हवन आदि में तिल के प्रयोग का पौराणिक महत्त्व सिद्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी तिल को बुरी आत्माओं से बचाने वाला माना जाता है। इसके औषधि गुणों के कारण ही इसे स्वास्थ्यवर्धक एवं मानसिक शांति प्रदान करने वाला कहा गया है।

तिल के गुण और प्रकार

आयुर्वेद में तिल को तीव्र असरकारक औषधि के रूप में जाना जाता है। काले और सफेद तिल के अतिरिक्त लाल तिल भी होता है। सभी के अलग-अलग गुणधर्म हैं। यदि पौष्टिकता की बात करें तो काले तिल शेष दोनों से अधिक लाभकारी हैं। सफेद तिल की पौष्टिकता काले तिल से कम होती है जबकि लाल तिल निम्नश्रेणी का तिल माना जाता है। महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि तिल में चार रस होते हैं। इसमें गर्म, कसैला, मीठा और चरपरा स्वाद भी पाया जाता है। तिल हजम करने के लिहाज से भारी होता है। खाने में स्वादिष्ट और कफनाशक माना जाता है। यह बालों के लिए लाभप्रद माना गया है। दाँतों की समस्या दूर करने के साथ ही यह श्वास संबंधी रोगों में भी लाभदायक है। स्तनपान कराने वाली माताओं में दूध की वृद्धि करता है। पेट की जलन कम करता है तथा बुद्धि को बढ़ाता है। बार-बार पेशाब करने की समस्या पर नियंत्रण पाने के लिए तिल का कोई सानी नहीं है। चूँकि यह स्वभाव से गर्म होता है इसलिए इसे सर्दियों में मिठाई के रूप में खाया जाता है। गजक, रेवडि़याँ और लड्डू शीत ऋतु में ऊष्मा प्रदान करते हैं।

तिल (Sesamum Indicum) में निहित पौष्टिक तत्व तिल में विटामिन ए और सी छोड़कर वे सभी आवश्यक पौष्टिक पदार्थ होते हैं जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं। तिल विटामिन बी और आवश्यक फैटी एसिड्स से भरपूर है। इसमें मीथोनाइन और ट्रायप्टोफन नामक दो बहुत महत्त्वपूर्ण एमिनो एसिड्स होते हैं जो चना, मूँगफली, राजमा, चैला और सोयाबीन जैसे अधिकांश शाकाहारी खाद्य पदार्थों में नहीं होते। ट्रायोप्टोफन को शांति प्रदान करने वाला तत्व भी कहा जाता है जो गहरी नींद लाने में सक्षम है। यही त्वचा और बालों को भी स्वस्थ रखता है। मीथोनाइन लीवर को दुरुस्त रखता है और कॉलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित रखता है। तिलबीज स्वास्थ्यवर्दधक वसा का बड़ा स्त्रोत है जो चयापचय को बढ़ाता है।

यह कब्ज भी नहीं होने देता। तिलबीजों में उपस्थित पौस्टिक तत्व जैसे-कैल्शियम और आयरन त्वचा को कांतिमय बनाए रखते हैं। तिल में न्यूनतम सैचुरेटेड फैट होते हैं इसलिए इससे बने खाद्य पदार्थ उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकता है। सौ ग्राम सफेद तिल से 1000 मिलीग्राम कैल्शियम प्राप्त होता हैं। काले और लाल तिल में लौह तत्वों की भरपूर मात्रा होती है जो रक्तअल्पता के इलाज में कारगर साबित होती है। तिल में उपस्थित लेसिथिन नामक रसायन कोलेस्ट्रोल के बहाव को रक्त नलिकाओं में बनाए रखने में मददगार होता है। तिल के तेल में प्राकृतिक रूप में उपस्थित सिस्मोल एक ऐसा एंटी-ऑक्सीडेंट है जो इसे ऊँचे तापमान पर भी बहुत जल्दी खराब नहीं होने देता। आयुर्वेद चरक संहित में इसे पकाने के लिए सबसे अच्छा तेल माना गया है। तिल-गुड़ के लड्डू बनाने के अलावा इन्हें ब्रेड, सलाद और मिठाइयों पर सजावट करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है। अनेक प्रकार की गजक और तिलपट्टी में इनका उपयोग होता है। ब्रेड, नान तथा अन्य प्रकार की रोटियों में भी तिल का प्रयोग होता है। तिल का तेल पूरे विश्व में प्रयोग में लाया जाता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि तेल शब्द की उत्पत्ति तिल शब्द से ही हुई है। जो तिल से निकतला है वह है तेल। तिल का यह तेल अनेक प्रकार के सलादों में प्रयोग किया जाता है। तिल गुड़ का पराठा, तिल गुड़ और बाजरे से मिलाए गए ठेकुए उत्तर भारत में विशेष रूप से प्रचलित हैं। सारे अरबी उप महाद्वीप में तिल को पीसकर उसे जैतून के तेल के साथ मिलाकर हमूस या ताहिनी बनाया जाता है जो दैनिक जीवन का एक महत्त्वपूर्ण व्यंजन है। मांसाहार में भी इसका व्यापक प्रयोग होता है। करी को गाढ़ा करने के लिये छिकक्ल रहित तिल को पीसकर मसाले में भूनने की भी प्रथा अनेक देशों में है। इतिहास में तिल इतिहास में तिल का उल्लेख वेद, चरक संहिता और आयुर्वेद में मिलता है वही अरबी संस्कृति की लोक कथाओं में अनेक स्थानों पर इसका नाम लिया गया है। अलीबाबा चालीस चोर की कहानी में सिमसिम शब्द का प्रयोग तिल के लिये ही किया गया है। यही सिमसिम यूरोप तक पहुँचते पहुँचते बिगड़कर अंग्रेजी सिसेम हो गया। ईसा से 5000 वर्ष पूर्व चीनी ग्रंथों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि तिल निकाले गए तेल से वे लोग न केवल कुप्पियाँ जलाते थे बल्कि कुप्पियों में जमा कालिख से ठप्पे छापने का काम भी किया जाता था। इस बात का उल्लेख भी मिलता है कि प्राचीन अफ्रीकी, बेन्ने नामक इस खाद्य पदार्थ को अपने साथ अमेरिका लाए जहाँ यह दक्षिण अमरीकियों के भोजन का एक आवश्यक अंग बन गया। असीरियन पौराणिक कथाओं के अनुसार देवता जब विश्व की रचना करने बैठे उस भोज में तिल से बनी हुई मदिरा प्रस्तुत की गई।

तिल के घरेलू नुस्खे

1 कब्ज दूर करने के लिये तिल को बारीक पीस लें एवं प्रतिदिन पचास ग्राम तिल के चूर्ण को गुड़, शक्कर या मिश्री के साथ मिलाकर फाँक लें।

2 पाचन शक्ति बढ़ाने के लिये समान मात्रा में बादाम, मुनक्का, पीपल, नारियल की गिरी और मावा अच्छी तरह से मिला लें, फिर इस मिश्रण के बराबर तिल कूट पीसकर इसमें में मिलाएँ, स्वादानुसार मिश्री मिलाएँ और सुबह-सुबह खाली पेट सेवन करें। इससे शरीर के बल, बुद्धि और स्फूर्ति में भी वृद्धि होती है।

3 प्रतिदिन रात्रि में तिल को खूब चबाकर खाने से दाँत मजबूत होते हैं।

4 यदि कोई जख्म हो गया हो तो तिल को पानी में पीसकर जख्म पर बांध दें, इससे जख्म शीघ्रता से भर जाता है।

5 तिल के लड्डू उन बच्चों को सुबह और शाम को जरूर खिलाना चाहिए जो रात में बिस्तर गीला कर देते हैं। तिल के नियमित सेवन करने से शरीर की कमजोरी दूर होती है और रोग प्रतिरोधकशक्ति में वृद्धि होती है।

6 पायरिया और दाँत हिलने के कष्ट में तिल के तेल को मुँह में 10-15 मिनट तक रखें, फिर इसी से गरारे करें। इससे दाँतों के दर्द में तत्काल राहत मिलती है। गर्म तिल के तेल में हींग मिलाकर भी यह प्रयोग किया जा सकता है।

7 पानी में भिगोए हुए तिल को कढ़ाई में हल्का सा भून लें। इसे पानी या दूध के साथ मिक्सी में पीसलें। सादा या गुड़ मिलाकर पीने से रक्त की कमी दूर होती है।

8 जोड़ों के दर्द के लिये एक चाय के चम्मच भर तिलबीजों को रातभर पानी के गिलास में भिगो दें। सुबह इसे पी लें। या हर सुबह एक चम्मच तिलबीजों को आधा चम्मच सूखे अदरक के चूर्ण के साथ मिलाकर गर्म दूध के साथ पी लें। इससे जोड़ों का दर्द जाता रहेगा।

9 तिल गुड़ के लड्डू खाने से मासिकधर्म से संबंधित कष्टों तथा दर्द में आराम मिलता है।

10 भाप से पकाए तिलबीजों का पेस्ट दूध के साथ मिलाकर पुल्टिस की तरह लगाने से गठिया में आराम मिलता है।

मकर संक्रांति में तिल का विशेष महत्व आखिर क्यों?

मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और मकर राशि के स्वामी शनि देव हैं, जो सूर्य देव के पुत्र होते हुए भी सूर्य से शत्रु भाव रखते हैं। अतः शनिदेव के घर में सूर्य की उपस्थिति के दौरान शनि उन्हें कष्ट न दें, इसलिए तिल का दान और सेवन मकर संक्रांति में किया जाता है। मान्यता यह भी है कि माघ मास में जो व्यक्ति रोजाना भगवान विष्णु की पूजा तिल से करता है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं.

 

 


मकर संक्रांति के १४ जनवरी से १५ जनवरी हो जाने का जीवन के बहुत से अंजामो पर अलग - अलग प्रभाव पड़ेगा Social Structure और भी ज्यादा  Narrow हो जायेगा | आदमी अपने परिवार को और छोटे दायरे में महसूस करेगा | E.Q. का स्टैण्डर्ड मान बढ़ जायेगा चीजे Biological needs के इर्द - गिर्द जमा हो जायेगी | Human existence की तीन main elements - विवेक शौर्य और क्षुधा में - क्षुधा की Intensity बढ़ेगी, शौर्य और पहचान की भावना as it is रहेगी जबकि विवेक  स्वार्थ के इर्द - गिर्द सिमट कर रह जाएगा | दूर - दराज के रिश्ते धीरे - धीरे ख़त्म हो जायेंगे | जिन्दगी थोड़े से संबंधों से ही परिभाषित होगी |
Global warming - तेजी से बढ़ेगी | ध्रुवीय बर्फ पिघलेगी इससे पृथ्वी की स्थिति में फर्क आएगा | जगह - जगह पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति में बदलाव महसूस करेंगे किया जायेगा कैपिटल G पर ज्यादा फर्क फ़िलहाल नहीं पड़ेगा लेकिन Small G के मान में फर्क नजर आएगा | पृथ्वी पर जल की मात्रा घटेगी और पर्यायवरणीय गैसों पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा | ओजोन की परत और भी कमजोर होती नजर आएगी | इस सबका फर्क मानव जीवन पर सीधा दिखाई देगा | नए किस्म की बीमारियाँ होंगी और मेडिकल Science पर शोध और अनुसंधान का बोझ बढ़ेगा सब्जियों की नई किस्मे विकसित होंगी और अनाजो की nutritious value घटेगी मांसाहारियों के लिए बुरी खबर यह है नई बीमारियों में से ज्यादातर का सम्बन्ध मांसाहार से ही होगा |
मकर संक्रांति की तिथि बदलने का असर दुनिया की economy पर भी पड़ेगा | अमेरिका, जापान, कोरिया और ताइवान को आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ सकता है | भारत में sensex  इस दौरान लगातार बढ़ेगा औए आने वाले तीन वर्षों में ४२००० का आकड़ा पार कर जाएगा | इन्फार्मेशन टेक्नॉलोजी के बाजार पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा जबकि एनर्जी और पावरप्लांट्स के कारोबार में तेजी आएगी | 
ज्योतिषय दृष्टि से मकर संक्रांति की दिनांक परिवर्तन का सबसे ज्यादा प्रभाव वृष राशि और कृन्तिका नक्षत्र के दूसरे तीसरे और चौथे चरण में जन्म लेने वाले लोगो पर पड़ेगा | इसके अलावा जिन लोगों के नाम आई और ए से शुरू होते हैं उन लोगों पर भी इस घटना का सीधा प्रभाव पड़ेगा | यह असर पोजिटिव होगा | इन लोगों के जीवन में पोजिटिव चेंज आयेंगें और ये लोग अप्रत्याशित रूप से प्रगति करेंगे | 
आइये अब देखते हैं १२ राशियों पर इस परिवर्तन का प्रभाव – 
मेष :- इस राशि के दौरान आपको बहुत सी ऐसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ेगा जिसमे न्याय और अन्याय का धर्म संकट बार - बार आपके सामने खड़ा होगा | इस साल आप जिसका पक्ष लेंगे वो जीत जायेगा | 
वृष :- इस संक्रांति के प्रभाव से आपकी संतान की उन्नति होगी और नौकरी से मजबूती आएगी परिश्रम से नहीं भाग्य से बहुत सी चीजे  आपकी झोली में गिरती नजर आएँगी इस वर्ष भाई की शादी होगी और खुशहाली के दरवाजे खुलेंगे | 
मिथुन :- यह संक्रांति धनु राशि वालों के लिए हर तरह से अच्छी और शुख प्रदान करने वाली होगी | आपके पास गर्व करने के कई नए कारण भी होंगे | आपकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी अगर आपका कोई मुक़दमा चल रहा है तो आप कुछ दिन रसोई में बैठ कर खाना खाइये मुकदमा आपके फेवर में डिसाइड हो जाएगा |
कर्क :- कर्क राशि वालों को भाई बहनो से शुख मिलेगा अचानक ढेर सारा धन मिलने की उम्मीद है | व्यावसायिक सफलता मिलेगी | नौकरी मे हैं तो पदोन्नति भी मिलेगी | साल भर भरपूर रोमांस मिलेगा |      
सिंह :- इस संक्रांति के प्रभाव से आपके जीवन मे मधुर बदलाव आने वाले हैं | भाई की स्थिति मजबूत होगी आपकी बीमारियाँ ख़त्म होंगी | किस्मत साथ देगी लेकिन हर हसरत पूरी नही होगी | बेहतर जिंदगी और बेहतर नतीजों के लिए मिट्टी के बर्तन मे शहद भर कर कहीं एकांत जगह मे गाड़ दें | इससे आपको बहुत फ़ायदा होगा | 
कन्या :- इस संक्रांति के प्रभाव से आपको अपने जीवन मे किसी नये प्रोजेक्ट की ज़रूरत महसूस होगी | आप कम बोलने की आदत पाल लेंगे और धीरे - धीरे एकदम फिट चुस्त और तंदुरुस्त हो जायेंगे | 
तुला :- संक्रांति के सीधे प्रभाव आपकी आजीवका पर पड़ेंगे | बेहतर नतीजे पाने के लिए पिता को अपने हाथ से दूध पिलाएँ अगर पिता पास मे न हो तो धर्म स्थल मे दूध दान करें | अगर पिता के स्वास्थ को कोई संकट हो तो अपने गले की माला उतार कर कुछ समय के लिए रख दीजिए पिता को फ़ायदा हो जाएगा |     
वृश्चिक :- वृश्चिक राशि वाले लोगों को इस परिवर्तन के प्रभाव से इस वर्ष किसी वृद्ध महिला की सेवा का अवसर मिलेगा इसे अपना सौभाग्य समझिए | अगर आपके दादा जिंदा न हो तो शरीर पर इस वर्ष सोना पहने रहने से सफलता मिलेगी |
धनु :- इस संक्रांति के प्रभाव से आपका स्वास्थ बेहतर होगा | आपके जीवन मे नया उत्साह आएगा नये कपड़े और नये साजो सामान पर पैसा खर्च होगा | आप जल्द ही किसी समुद्रि या हवाई यात्रा पर भी जायेंगे |  
मकर :- इस संक्रांति के प्रभाव से आपके जीवन मे सरलता बढ़ेगी और आप आम आदमी का भला करने वाले समझे जायेंगे  | इस साल खर्चे बढ़ेंगे | बच्चो को लेकर चिंताएँ कम होंगी | विदेश यात्रा का योग है | 
कुम्भ :- इस संक्रांति के प्रभाव वश आपको तरल औषधियाँ यानी लिक्विड़ मेडिसिन के प्रयोग मे सावधानी बरतनी होगी अगर आप अपने छत या  दुछत्ति मे रखी हुई फालतू चीज़े हटा दें तो आपको आपका डूबा हुआ पैसा वापस मिल जाएगा | धर्म स्थल मे जाने से आपका भाग्य बढ़ेगा | 
मीन :- इस संक्रांति के प्रभाव से आपको उम्र दराज बेटे या बेटियों के रिश्तेदारों से अपयश मिल सकता है | अगर ऐसी स्थिति आए तो सरसों के तेल से भरा हुआ बर्तन पानी के भीतर ज़मीन के नीचे दबाने से फ़ायदा होगा l


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