Rahukaal Today/ 7 December 2016 (Delhi)-14 December 2016

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Shivratri | Shivratri Pooja | Indian Festival
Shivratri
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भगवान शिव हिन्दू पौराणिक कथाओ के अनुसार "ब्रम्हांड के विनाशक " के रूप में माने जाते है |और शिवरात्रि महोत्सव उन्हें खुश करने के लिए आयोजित किया जाता है |जैसा की नाम का तात्पर्य है, शिवरात्रि का मतलब है 'भगवान शिव की महान रात' | स्कंदपुराण के अनुसार हिन्दुओं में चार अलग अलग प्रकार की शिवरात्रि मनाई जाते है

नित्य सिवाराथ्री

मासा शिवरात्री

प्राधामाथि शिवरात्री

महा शिवरात्रि

यह हिन्दू कैलेंडर के अनुसार माघ या फाल्गुन महीने के तेहरवें या चौदहवे दिन पर मनाया जाता है | शिवरात्री को आंतौर पर महा शिवरात्री कहा जाता है | जिसे दुनिया भर के लोग बहुत धूमधाम से मनाते है ,हालांकि ,विभिन्न क्षेत्रो में महीनो और तिथि के अनुसार भिन्न हो सकते है | शालिवाहन के अनुसार ,शिवरात्री कृष्णा पक्ष के माघ महीने के दौरान मनाई जाती है लेकिन विक्रम युग के अनुसार ,यह त्यौहार फाल्गुन में मनाया जाता है | इस दिन भगवान शिव  को बेल या बिल्ब अर्पित किया जाता है | भक्त शिवरात्री के पूरे दिन उपवास रखते है और खुद को भगवान शिव की स्तुति करने में तथा मंत्र उच्चारण करके  भगवान को खुश करते है और उनके आशीर्वाद का आह्वान करते है |

शिवरात्री के बारे में किंवदतियां

जब भगवान शिव की पत्नी पार्वती में अमावस्या की रात को अपने पति की भलाई के लिए प्रार्थना की थी ,तब से इस मिथक के अनुसार लोग शिवरात्री मना रहे है | मिथक के अनुसार देवी पार्वती ने ध्यान की मुद्रा तक आने पर भी अपना उपवास नहीं तोडा ताहि भगवान शिव को कभीउ बुराई से हानि न हो |

तब से,महिलायें अपने पति के लिए उपवास करते है | इस के अलावा शिवरात्री से 'कालिया मर्दन' की पुराण -कथा भी जुडी हुई है | इस मिथक के अनुसार भगवान भगवान शिव नीले रंग के हो गए थे ; जब देवी पार्वती ने अपनी गर्दन कास कर ,उन्हें जहर पीने से रोक दिया था | इस नीले रंग के कारण,वह नीलकंदाके नाम से जाने जाते है |

शिवरात्री पर मनाएं जाने वाले अनुष्ठान

दुनियाभर के विभिन्न मंदिर  ,सुबह से भक्तों के आने के कारण भर जाते है | इस दिन (पारम्परिक अनुष्ठान ) भगवान शिव का आह्वान करने के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए शिवलिंग की पूजा की जाती है | माना जाता है की नदी गंगा ,भगवान शिव के बालों से उत्पन्न हुई | यह हिन्दुओं की पवित्र नदी है| भक्त इस नदी में स्नान करके ही शिवरात्री की पूजा की जाती है भगवान शिव की प्रार्थना के बाद ,लोग सूरज और विष्णु को प्रार्थना करने के लिए मंत्र उच्चारण करते है | पुराणो के अनुसार सभी अविवाहित महिलायें भगवान शिव के रूप में एक आदर्श पति पाने के लिए प्रार्थना करती है | भक्त शिवलिंग पर दूध अर्पण करते है ,जो बाद में पूजाओं के लिए प्रयोग किया जाता है | तीन धारियों की पवित्र राख भक्तों पर लगाईं जाती है | उनका मानना है की यह तीन धारियां आध्यात्मिक ज्ञान ,शुद्धता और तपस्या का प्रतिनिधित्व करती है | लोग रुद्राक्ष की माला पहनते है ,जैसा की भगवान शिव द्वारा प्रयोग की जाती है |


Lord shiva is regarded as the most imported god according to Hindu Mythology .The Shivaratri festival is conducted to please him. As the name implies ,Shivaratri literally means ‘Great Night Of Shiva ’.It is celebrated on the thirteenth or fourteenth days of Magh or Phalguna month in accordance with the Hindu Calendars.

Shivaratri is commonly called Maha Shivaratri This is celebrated by people all over tha world .However ,it may vary with the month and Tithi in different regions. According to shalivahana, the Shivaratri is celebrated during the Krishna Paksha of the Magh month .

However according to Vikrama era,it is celebrated in phalguna .The main carried out is the Bael or Bilva to Lord Shiva .Devotees fast the whole days of Shivaratri and involve themselves in the chanting mantras to praise Lord Shiva and invoke his blessing .International Mandi Shivaratri Fest is held in Himanchal Pradesh to attract tourists during the festival days .

Legends about Shivaratri

People have been celebrating Shivaratri ever since the myth of goddess Parvati, wife of Lord Shiva , prayed for well-being of her husband during the moonless night .Myth tells that she even observed fasting to e in meditation to ward off any evil felt on him ,Since then, women observed fasting for their husbands.

Yet another myth underlying the Shivaratri is that of the ‘Kaliya Mardhan’ .It was in this myth that Lord Shiva turned blue since;Pravati st  oped him y drinking poison ,by tightening his neck. It is due to this blue color, he is known as Neelkantha.

Ritual observed on Shivaratri

Various temples all over the world will be flooded with devotees since, the early morning, The traditional ritual of worshiping the Shivalinga has been performing, since ages.This is done to invoke Lord Shiva and get blessing from him. The river Ganga is believed to be originated from Lord Shiva’s hair.It is holy river of the Hindus.

Devotees take a bath in it before beginning the celebrations of Shivaratri .After Praying women believe, Lord Shiva to be ideal husband with  regard to puranas. They pray before him to have husband as himself Devotees offer milk to the Shivalinga ,which is later then used for pujas. Three stripes of holy ash are made on the devotees. They believe that the three stripes represent spirituals knowledge, purity and penance. People also wears rosary made of Rudrakshan ,just like believed to be followed by Lord Shiva

Diferent types of Shivaratri

According to Skanda Purana ,hindus observe four different type of Shivaratri .They are the Nithya Shivaratri, Masa Shivaratri, Pradhamathi Shivaratri and the Maha Shivaratri.

 

 

भगवान शंकर की कृपा से वर पाने की इच्छा  रखने वाली कन्याओ को आज की रात भगवान शिव की उपासना किस प्रकार करनी चाहिए | 
१- सर्वप्रथम साफ मिट्टी ले कर उसे पानी दूध और गाय के घी में सान ले -"बं"मंत्र पढ़े | अब पहले गणेश जी बनाकर पीठ पर रखे -मंत्र है "ॐ हीं गं ग्लौ गणपतये ग्लौं गं हीं "108 बार "ॐ नमो हराय " मन्त्र पढ़ कर - बहेड़े के फल के बराबर मिट्टी अपने दाहिने हाथ में लेले |
२ - इस मिट्टी से आपको एक शिवलिंग बनाना है |शिवलिंग आपके अंगूठे से बड़ा और बित्सित यानि बित्ते से छोटा होना चाहिए | शिवलिंग बनाते समय आपको मंत्र पढ़ना है | " ॐ नमो महेश्वराय " 108 बार |
३ - अब इस शिवलिंग को चौकी पर अस्थापित करे और 108 बार मंत्र पढ़े " ॐ नमो शूलपाणी
४- अब बची मिटटी से सुन्दर सी कुमार की ( नौजवान की ) की मूर्ति बनाये और उसे भगवान शंकर के सीध में बैठकर 108 बार मंत्र पढ़े " ॐ एं हूं क्षूं क्लिं कुमाराय नम : "
५ - इसके बाद 108 बार " ॐ नमो शिवाय " मंत्र पढ़ कर प्रार्थना करे " ॐ नम : पिनाकिने इहगच्छ इह तिष्ठ "     अब यह पीठ पूजा के लिए तैयार है | अब आप इस मूर्ति को -जल से, दूध से, दही से, घी से ,शहद से , और पंचामृत से स्नान और धूप दीप नैवेद्य आदि से पूजन करे | बेल पत्र अवस्य चढ़ाये | शिव के नैवेद्य मे बेल फल ,धतुरा ,भंग की पत्ती बेर का फल इत्यादी अवस्य शामिल करे | इस प्रकार पूजा करके कस्य प्रयोग करे | अब आपको कास्य प्रयोग बतलाते है |
१ - विवाह योग्य कन्या को शीघ्र वर प्राप्ति के लिए " हीं ॐ नम: शिवाय हीं " मंत्र से १०८ बेर के फल भगवान को
१ - विवाह योग्य कन्या को शीघ्र वर प्राप्ति के लिए " हीं ॐ नम: शिवाय हीं " मंत्र से १०८ बेर के फल भगवान को मे तीन बार चढ़ाने से यतेष्ठ फल प्राप्त होगा |
२- यदि किसी लड़के को यतेष्ट कन्या की इच्छा हो तो उसे इसी मंत्र को  पढ़ते हुए १०८ बार अमृता (गिलोय) की आहुति पलाश्कि समिधा से रात्रि मे तीन बार देनी चाहिए |
मनोवंच्छित वर /कन्या पाने के लिये----अगर आपने अपना जीवन -साथी पहले ही पसंद कर लिया हो तो -आपको दूसरा मंत्र पढ़ना है| ये मंत्र  लड़के -लड़कियो दोनो के लिए कामान है | मंत्र है --क्लिं ॐ नम: क्लिं इस मन्त्र को १०८ बार पढ़ते हुये ३ -३ पूर्वा से बेल की समिधा में हवन करने से मनोवांक्षित वर /कन्या की प्राप्ति होती है |
४ ---- अगर विवाह में देर हो गई हो :- अगर आपके विवाह में देर हो रही हो जो इसी बिधि से भगवान शंकर की स्थापना करके उन्हें शिव के दस द्रब्य चढ़ाये | ये दस द्रब्य इस प्रकार है | बेल का फल ,तिल पांच मुट्ठी ,खीर एक कटोरी ,सवा पाव घी , सवा पाव दूध ,सवा पाव दही,
१०८ दूर्वा , चार अंगुल की वट की पांच लकडिया ,चार अंगुल की पलाश की पांच लकडिया , और चार अंगुल की कत्थे यानि खैर की पांच लकडिया | 
ये सामग्री शिव को अर्पित करके रात्रि में तीन बार भगवान की पंचोपचार पूजा करके तीनो बार

- १०८ बार मंत्र जप करे | मंत्र है --`ॐ नमो भगवते रुद्राय `
५ - अगर आपको लगता है कि आपके रूप की कमी के कारण विवाह नहीं हो रहा हो तो आप उपरोक्त विधि से स्थापना करके खैर की समिधा से हवन करे | इसमे हवन सामग्री के तौर पर दूध और जौ का इस्तेमाल करना चाहिये |अगर खैर (कत्थे ) की लकड़ी न मिले तो उसकी  जगह गम्मारी की लकड़ी का इस्तेमाल कर सकते है | मंत्र है -` हीं ॐ नम: शिवाय हीं` `
६ - यदि आपका दाम्पत्य या प्रेम सम्बन्ध खतरे में पड़ गया हो तो --पहले बताई गई बिधि से स्थापना करके - अपने जन्म नक्षत्र में और शिवरात्रि के दिन गुडूची यानि गिलोय और बकुल यानि  मौलश्री की समिधा से घी ,शहद और शक्कर से होम करने से प्रेम सम्बन्ध या दाम्पत्य जीवन अक्षुण बना रहता है | मंत्र वही होगा - `हीं ॐ नम ; शिवाय हीं ` रात्रि में तिन बार भगवान की पूजा करके हर बार १०८ आहुतिया मंत्र पढ़ते हुये देनी चाहिये |
७ -- अगर आपको लगता है कि आपके शारीरिक गठन कि वजह से आपके विवाह में बाधा आ रही है तो शिवरात्रि के दिन से अपने जन्म दिन तक नित्य जप से शारीरिक सौष्ठव बेहतर होकर शादी का रास्ता खुलता है | इसके लिये शिवरात्रि कि रात उपरोक्त बिधि से तिन बार भगवान का पूजन करके हर बार बरगद कि समिधा जला कर बेल फल का गुदा ,शहद और घी से १०८ बार आहुतिया प्रदान करे | इसके बाद नित्य एक माला मंत्र पढ़े | प्रत्येक सोमवार को भगवान शंकर को दूध चढ़ाये और अपने जन्म दिन कि रात यही प्रक्रया दोहराये मंत्र - हीं ॐ नम : शिवाय हीं इससे लाभ अवस्य होगा |
८ -- विवाह  में आने वाली किसी भी बाधा को दूर करने के लिये शिवरात्रि कि रात भगवान शिव कि पूजा करके क्षीरी वृक्ष कि समिधा और लावा से हवन करना चाहिये प्रदोष का व्रत करना चाहिये और मंत्र कि एक माला का जप शिवरात्रि कि रात तक तिन बार कर के होम कर पुन: वर प्राप्ति तक नित्य करना चाहिये मंत्र - `हीं ॐ नम: शिवाय हीं `




शिवरात्रि के दिन शाही स्नान का महत्व -----------अगर आप गंगा जी नहीं पहंच सके तो आपको बता दूँ कि कुछ पुराणों जैसे स्कंद पुराण के कशी खंड और पर्व पुराण के उत्तर खंड 237 का कथन है कि भूमि के तीर्थो के अलावा कुछ ऐसे सदाचार और सुन्दर शील आचार भी है जिन्हें मानसिक तीर्थ कहा जाता है | शास्त्र के अनुसार ,सत्य ,क्षमा ,इन्द्रिय संयम ,दया ,सरलता ,दान ,आत्म निग्रह ,संतोष ,ब्रह्मचर्य ,मृदु वाणी ,ज्ञान ,धैर्य और तपस्या तीर्थ है | और सर्वोच्च तीर्थ मन कि शुद्धी है |वामन पुराण 43 ,25 में लिखा है कि आत्मा संयम रूपी जल से पूर्ण नदी है जो सत्य से प्रभाव मन है जिसका शील ही तट है | और जिसकी लहरे दया है उसी में गोता लगाना चाहिये अंत:करण जल से स्वच्छ नहीं होता |
`आत्मा नदी ,संयम ,तोय ,पूर्ण,सत्य वाह,शील ,तटा, त्योर्मिक ,ततरताभिषेक कुरु ,पांडु पुत्र न वारिणा शुद्धती अंतर आत्मा `
पद्य पुराण के 2 ,39 ,36 ,61 में तीर्थो के अर्थ को बिस्तार दिया गया है जहां अग्नि होत्र एवं श्राद्ध होता है ,मंदिर ,वो जहां वेदहै ,गौशाला,वो वाटिका जहां आश्वस्त वृक्ष रहता है ,जहां पुराण पाठ होता है ,जहां किसी का गुरु रहता है ,जहां पतिव्रता स्त्री रहती है ,जहां पिता एवं योग्य पुत्र का निवास होता है , वे सभी स्थान तीर्थ जैसा पवित्र है |
संकल्प करे कि आज के दिन झूठ नहीं बोले
संकल्प करे कि आज के दिन सभी प्राणियों पर दया करेगे
संकल्प करे कि आज शत्रुओ को क्षमा करेगें
पीपल के नीचें रखे शिवलिंग को स्नान कराएं
गाय को पानी पिलाये
एक थाली में जल लेकर उसमे कुछ बुँदे गंगाजल कि डाले और अंजलि में जल भर कर , थाली में ही सप्तऋषियों के नाम तर्पण करे उसके बाद स्नान करे तो आपको गंगा स्नान का पुण्य फल प्राप्त होगा |
नये कपडे पहन कर उत्तर कि ओर मुंह करके भगवान शंकर के नाम का उच्चारण 108 बार करे | किसी वृद्ध स्त्री के घर जाकर उसे चांदी कि कोई चीज या कपड़े भेंट करें उससे आपको गंगा स्नान के बराबर पुण्य मिलेगा |
अपने निकट के किसी मंदिर में जाकर शिवलिंग पर पूरी श्रद्धा से दूध और चावल चढाने से आपको गंगा स्नान के बराबर पुण्य प्राप्त होगा |
किसी साधु या ब्रह्माण को 5 वस्त्र दान करे और दूध पिलाये पुण्य प्राप्त होगा |
सूर्यास्त के समय हाथ पैर धोकर उत्तर कि ओर मुंह करके संपूर्ण भोजन सामग्री एक थाली में निकाले उसमे कुछ दक्षिणा भी रखे भगवान शंकर का स्मरण करते हुए किसी चलते साधू को भेट कर दे |

 


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