Rahukaal Today/ 17 January 2017 (Delhi)-23 January 2017

  • Mon
  • Tue
  • Wed
  • Thu
  • Fri
  • Sat
  • Sun
Rahukaal Today
8:31:45 - 9:50:30

8:31:22 - 9:51:45
Rahukaal Today
15:10:00 - 16:29:30

7:14:52 - 8:58:45
Rahukaal Today
12:31:00 - 13:50:45

12:19:30 - 13:57:22
Rahukaal Today
13:51:22 - 15:11:15

13:57:37 - 15:35:45
Rahukaal Today
11:12:00 - 12:32:00

10:42:30 - 12:15:00
Rahukaal Today
9:52:15 - 11:12:22

9:10:30 - 10:42:45
Rahukaal Today
16:32:45 - 17:53:00

16:50:00 - 18:22:00
Vastu Shastra | Rudraksh | Bhavishyavani | Rashifal | Rahu Kal
VSTU TIPS
There are no translations available.

दीपावली के लिए


    वास्तु टिप्स


1. माता लक्ष्मी उसी के घर पर आती है जिसका घर उन्हें साफ-सुथरा मिलता है । पानी में नमक मिलाइये और इसे पूरे घर के कोने-कोने में छिड़किये। वास्तु के हिसाब से नमक घर की बुरी ऊर्जा को सोख लेता है।

2. घर का जो समान आप इस्तेमाल नही करते उसे किसी को दान कर दें घर में रक्खी पुरानी वस्तुऐं निगेटिव एर्नजी उत्पन्न करती है।

3. घर के समान को लम्बे समय तक एक ही स्थान पर नहीं रखना चाहिये।

4. बहता हुआ पानी घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा को अपने साथ बहा ले जाता है। आप भी अपनें घर के नार्थ-ईस्ट दिशा में कोई छोटा सा झरना लगाइये।

5. देवी लक्ष्मी का स्वागत करने के लिये दरवाजे के सामने फूलों की पत्तियों से खूबसूरत रंगोली बनाएं। और लक्ष्मी का स्वागत करें।

6. इस दिन घर में विभिन्न प्रकार की मिठाईयां जरुर लाऐ।

7. घर में उत्तर दिशा को कुबेर का स्थान माना जाता है। दीपावली का पूजन इसी स्थान पर किया जाता है। गणेश जी की मूर्ति लक्ष्मी जी के दाहिने साइड में रखे। गणेश जी की सूंड का रुख बायीं तरफ होना चाहिए। उक्त गुणों से युक्त गणेश जी की प्रतिभा अच्छे परिणाम देती हैं। पूजा में अच्छी खुश्बू वाली अगरबत्ती जलायें और भगवान गणेश और लक्ष्मी का पूजन करें।

8. दीपावली में धन के देवता कुबेर की पूजा का भी विशेष महत्व हैं। इसके लिए चाँदी के एक कटोरे में अपनी क्षमता अनुसार 5,11, 21 अथवा 51 चाँदी के पुराने सिक्के रखकर उत्तर की तरफ मुँह करके इनकी पूजा करनी चाहिए | पूजा के उपरान्त इस पात्र को दक्षिणी दीवार स्थित अलमारी में सुरक्षित रख लेना चाहिए। इसको कभी खर्च में नहीं लेना चाहिए। किसी वजह से चाँदी के सिक्के न उपलब्ध हो पाएँ, तो तांबे के पुराने सिक्के भी इस्तेमाल किये जा सकते हैं और अगर यह भी उपलब्ध नहीं हों फिर जो भी उपलब्ध हो उन सिक्कों को रखा जा सकता हैं। विशेष ध्यान रखने की बात यह हैं कि कटोरे में सिक्के ही रखे जाएँ। कागज की मुद्रा न रखी जाय।

9. घर की चारदीवारी पर चार दीयों को एक साथ रखें क्योंकि चार दीयों का अर्थ है लक्ष्मी, गणेश, कुबेर और इंद्र।

10. मिठाइयां और पटाखे बांटें। उपहार में चाकू या चमड़ें का सामान ना दें। गाय के चमड़ें का सामान ना स्वयं प्रयोग करे और ना ही किसी को भेंट करें।

 

 

 

 

 

 वास्तु टिप्स

दुकान के लिए वास्तु टिप्स

1.दुकान या शोरूम का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए | यदि ऐसा न हो तो दुकान का मुख पश्चिम दिशा की ओर भी किया जा सकता है |

2.वास्तु विद्या के अनुसार दक्षिण की ओर मुख वाले दुकान शुभ फल नहीं देती |

3. दुकान के अंदर समान रखने के लिए अलमारी आदि पश्चिम या दक्षिण दिशा में बनवानी चाहिए |

4.दुकान में ईशान कोण या आग्नेय कोण (उत्तरपूर्व या दक्षिणपूर्व ) दिशा में दुकान की बिक्री का समान नहीं रखना चाहिए |

5.वास्तु शास्त्र के अनुसार ईशान कोण में इष्टदेव की मूर्ति या पानी रखना शुभ माना जाता है |

6.आग्नेय कोण(दक्षिणपूर्व) दिशा में बिजली का मेन बोर्ड ,इन्वर्टर या जनरेटर रखना शुभ माना जाता है |

7.दुकान में काम करने वाले कर्मचारियों का पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है |

8.दुकान या शोरूम के मालिक को पश्चिम दिशा में बैठना चाहिए | ऐसा करने से आय में वृद्धि होती है |

9.दुकान की तिजोरी को पश्चिम या दक्षिण दीवार के सहारे रखना शुभ होता है |

10.गल्ले ,तिजोरी ,या मालिक या मैनेजर की जगह के ऊपर कोई बीम नहीं होनी चाहिए | यह व्यवसाय में रोड़ा बन सकता है |

11.यदि ग्राहक दुकान में प्रवेश कर रहा हो तो उसका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए | इससे उत्साह बढ़ता व वातावरण अच्छा रहता है |

12.दुकान की उत्तर या पूर्व दिशा में देवी लक्ष्मी और गणेश की मूर्ति रखने से व्यापार में लाभ होता है  |

13.चतुर्भुज या गोल आकार की दुकान अधिक शुभ मानी जाती है |

14.भारी समान को दुकान के दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना चाहिए |

15.यदि दुकान में टीवी या कंप्यूटर रखना चाहते है , तो दक्षिणपूर्व दिशा सबसे शुभ है |

 

 

सही वास्तु दिलाएगा धन - समृद्धि .....

यूँ तो किसी को किस्मत से ज्यादा नहीं मिलता लेकिन कई बार अनेक बाधाओं के कारण किस्मत में लिखी धन-समृद्धि भी प्राप्त नहीं होती | वास्तु को मानने वाले अगर इसके मुताबिक काम करे तो उन्हें वो मिल सकता है जो अब तक नहीं मिला है |

पूर्व दिशा :- यहाँ घर की संपत्ति और तिजोरी रखना बहुत शुभ होता है और उसमे बढ़ोत्तरी होती रहती है |

पश्चिम दिशा :- यहाँ धन -संपत्ति और आभूषण रखे जाएँ तो साधारण ही शुभता का लाभ मिलता है | परन्तु घर का मुखिया अपने स्त्री-पुरुष मित्रों का सहयोग होने के बाद भी बड़ी कठिनाई के साथ धन कमा पाता है |

उत्तर दिशा :- घर की इस दिशा में कैश व आभूषण जिस अलमारी में रखते है , वह अलमारी भवन की उत्तर दिशा के कमरे में दक्षिण की दीवार से लगाकर रखना चाहिए | इस प्रकार रखने से अलमारी उत्तर दिशा की ओर खुलेगी उसमे रखे गए पैसे और आभूषण में हमेशा वृद्धि होती रहेगी |


लक्ष्मी प्राप्ति के उपाय

दक्षिण दिशा :- इस दिशा में धन ,सोना ,चांदी और आभूषण रखने से नुकसान तो नहीं होता परन्तु बढ़ोत्तरी भी विशेष नहीं होती है |

ईशान कोण:- यहाँ पैसा धन और आभूषण रखे जाएँ तो यह दर्शाता है की घर का मुखिया बुद्धिमान है और यह उत्तर ईशान में रखे हों तो घर की एक कन्या संतान और यदि पूर्व ईशान में रखे हो तो एक पुत्र संतान बहुत बुद्धिमान और प्रसिद्ध होता है |

आग्नेय कोण :- यहाँ धन रखने से धन घटता है, क्योकि घर के मुखिया की आमदनी घर के खर्चे से कम होने के कारण कर्ज की स्थिति बनी  रहती है |

नैत्रत्य कोण :-यहाँ धन ,महंगा सामान और आभूषण रखे जाएँ तो वह टिकते जरूर है , किन्तु एक बात अवश्य रहती है की यह धन और सामान गलत ढंग से कमाया हुआ होता है |

वायव्य कोण :-यहाँ धन रखा हो तो खर्चे आमदनी जुटा पाना मुश्किल होता है | ऐसे व्यक्ति का बजट हमेशा गड़बड़ाया रहता है और कर्जदारों से सताया जाता है | सीढ़ियों के नीचे तिजोरी रखना शुभ नहीं होता है | सीढ़ियों एवं टॉयलेट के सामने भी तिजोरी नहीं रखना चाहिए | तिजोरी वाले कमरे में कबाड़ या मकड़ी के जाले होने से नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है |

घर की तिजोरी के पल्ले पर बैठी हुई लक्ष्मी जी की तस्वीर जिसमे दो हाथी सूंड़ उठायें नजर आते है , लगाना शुभ होता है | तिजोरी वाले कमरे का रंग क्रीम या ऑफ़ वाइट रखने चाहिए |


तुलसी से घर के समस्त दोष दूर करे

पुराणो और शाश्त्रों के अनुसार जिस घर पर मुसीबत आने वाली होती है | उस घर से सबसे पहले लक्ष्मी यानी तुलसी चली जाती है क्योंकि दरिद्रता ,अशांति या क्लेश जहाँ होता है वहां लक्ष्मी जी का निवास होता है |

अगर ज्योतिष की माने तो ऐसा बुध के कारण होता है | बुध का प्रभाव हरे रंग पर होता है | और बुध को पेड़ पौधों का करक ग्रह माना जाता है | बुध ऐसा ग्रह है जो अन्य ग्रहों के अच्छे और बुरे प्रभाव जातक तक पहुँचाता है | अगर कोई ग्रह अशुभ फल देगा तो उसका अशुभ प्रभाव बुध के कारक वस्तुओं पर भी होता है | अगर कोई ग्रह शुभ फल देता है तो उसके शुभ प्रभाव से तुलसी का पौधा बढ़ता रहता है |

तुलसी हमारे घर कर समस्त दोष को दूर कर हमारे जीवन को निरोग और सुखमय बनाने में सक्षम है |

तुलसी का गमला रसोई के पास रखने से पारिवारिक कलह समाप्त होता है | पूर्व दिशा के खिड़की के पास तुलसी का पौधा रखने से पुत्र यदि जिद्दी है तो उसका हठ दूर होता है |

कन्या के विवाह में विलम्ब हो रहा हो तो अग्नि कोण में तुलसी के पौधे को कन्या नित्य जल अर्पण कर एक प्रदक्षिणा करे तो विवाह जल्दी होता है और बाधाएं दूर होती है |

यदि कारोबार ठीक नहीं चल रहा तो दक्षिण-पक्षिम दिशा में रखे तुलसी के पौधे में हर शुक्रवार कच्चा दूध अर्पण करे और किसी सुहागिनी स्त्री को मीठी वस्तु दें | इससे व्यवसाय में सफलता मिलती है |

नौकरी में यदि उच्चाधिकारी की वजह से परेशानी हो तो ऑफिस में खाली जमीन या किसी गमले में सोमवार को तुलसी के १६ बीज किसी सफ़ेद कपडे में बांधकर दबा दें , मान-सम्मान में वृद्धि होगी |

 

घर के कौन सी दिशा में क्या रखें

ज्ञानवाणी के वास्तु शास्त्र के अंतर्गत हम चर्चा करेंगे दिशा के अनुरूप वस्तुओं को रखने की | यदि घर में सकारात्मक  वातावरण और सकारात्मक वस्तुएं रहेंगी ,तो नश्चित ही हमें कार्यों में सफलता प्राप्त होगी |

जानिये ,घर की किस दिशा में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ...

 उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण )

दैवीय शक्तियों के लिए श्रेष्ठ इस दिशा का प्रतिनिधित्व स्वम दैवीय शक्तियां ही करती है |इसलिए यहाँ मंदिर होना बहुत शुभ रहता है |इस स्थान पर हमेशा साफ़ सफाई रखनी चाहिए | इस स्थान पर मंदिर के साथ ही पानी से सम्बंधित उपकरण भी रखें जा सकते है | घर के कोने में बाथरूम और टॉयलेट नहीं होने चाहिए |

दक्षिण -पूर्व दिशा (आग्नेय कोण )

इस कोण का प्रतिनिधित्व अग्नि करती है | इसलिए इस दिशा में विशेष ऊर्जा रहती है | इस स्थान पर रसोई घर होना सबसे अच्छा रहता है | यहाँ विधुत उपकरण भी रखें जा सकते है | यहाँ पानी से aसम्बंधित चींजे नहीं रखनी चाहिए |आग्नेय कोण में खाना भी नहीं खाना चाहियें | इस स्थान पर डायनिंग हाल अशुभ होता है |

दक्षिण -पश्चिम दिशा (नैत्रत्य  कोण )

इस स्थान का प्रतिनिधित्व पृथ्वी तत्त्व करता है | इसलिए यहाँ प्लांट रखना बहुत शुभ होता है | पौधों में यह शक्तियां होती है | की वे हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण कर सकते है |इस स्थान पर पौधे रखेंगे ,तो आपके घर की पवित्रता और सकारात्मकता बानी रहती है |यहाँ मुख्य बैडरूम भी शुभ फल देता है |इसके अलावा यहाँ स्टोर रूम भी बनाया जा सकता है |

उत्तर-पश्चिम दिशा (वायव्य कोण)

वायु इस कोण का प्रतिनिधित्व करती है | इस वजह से यहाँ खिड़की या रोशनदान का होना बहुत शुभ रहता है | यहाँ ताज़ी हवा के लिए स्थान होगा तो हमें स्वास्थ्य सम्बन्धी कई लाभ प्राप्त होते है | घर में किसी प्रकार का क्लेश नहीं होता हैं ना ही स्वास्थ्य सम्बब्धी परेशानियां रहती है | इस स्थान पर कन्या  का कमरा बनाया जा सकता है |

पूर्व दिशा

इस दिशा से आपके घर में खुशियां और सकारात्मक ऊर्जा आती है | इस वजह  से यहां मुख्य दरवाजा बनाया जा सकता है |यहाँ खिड़की ,बालकनी बनाई जा सकती है | यहां पर बच्चों के लिए कमरा भी बनवाया जा सकता है |

पश्चिम दिशा

वास्तु के अनुसार इस दिशा के स्वामी वरुण देव है | इस स्थान पर डायनिंग टेबल हाल बनवा सकते है | यहाँ सीढियाँ बनवायीं जा सकती है |यहां कोई भारी निर्माण कार्य भी करवाया जा सकता है | पश्चिम दिशा में दर्पण लगाना भी बहुत शुभ होता है |

उत्तर दिशा

इस दिशा का प्रतिनिधित्व धन के देवता करते है | इस वजह से यहाँ नगद धन और बहुमूल्यवान वस्तुएं राखी जा सकती है |यहाँ मुख्य दरवाजा भी श्रेष्ठ फल  देता है| यहाँ बैठक की ब्यवस्था ही कराई जा सकती है या ओपन एरिया भी रखा जा सकता है | यहाँ बाथरूम भी बनवा सकते है | इस दिशा में बैडरूम नहीं बनवाना चाहिए |

दक्षिण दिशा 

 यह स्थान मत्यु देवता का स्थान हैं | यहाँ भारी सामान रखा जा सकता है इस स्थान पर रसोईघर भी हो सकता है यदि इस स्थान पर बैडरूम है तो सोते समय हमारा सर दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए | 

घरके मध्य का हिस्सा

घर के बीच का हिस्सा खुला रहने से बहुत शुभ रहता है | इस स्थान पर तुलसी का पौधा लगाया जा सकता है |यहाँ प्रकाश के लिए पूरी व्यवस्था होनी चाहिए | इस स्थान से  ही पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है |



वास्तु अनुरूप कैसे सजाएँ बच्चों का रूम 

गृहस्वामी को अपने घर के सम्पूर्ण वास्तु -विचार के साथ-साथ अपने बच्चों के कमरें के वास्तु का भी ध्यान रखना चाहिए | बच्चों की उन्नति एवं अध्ययन के लिए उनका वास्तु अनुकूल कमरे में निवास पढ़ाई-लिखाई करना आवश्यक है | घर में बच्चों का कमरा पूर्व,उत्तर,पश्चिम  या वायव्य में हो सकता है |किसी भी स्थति में दक्षिण ,नैत्रत्य या आग्नेय में बच्चों का कमरा नहीं होना चाहिए |यदि बच्चे एक या उससे अधिक हो तो जो बच्चा बड़ा हो तथा महत्त्वपूर्ण विद्यार्जन कर रहा हो ,उस अनुसार दीवारों का रंग होना चाहिए | यदि दोनों हमउम्र हो तो उनके कमरे में दो भिन्न-भिन्न शुभ रंगों का प्रयोग किया जा सकता है |पर्दों का रंग दीवारों के रंग से थोड़ा गहरा होना चाहिए |

बच्चों का पलंग अधिक ऊँचा नहीं होना चाहिए तथा वह इस तरह से रखा जाए की बच्चों का सिरहाना पूर्व दिशा की ओर हो और पैर पश्चिम की ओर | बिस्तर के उत्तर दिशा की ओर टेबल एवं कुर्सी होनी चाहिए | पड़ते समय बच्चे का मुंह पूर्व दिशा की ओर तथा पीठ पश्चिम दिशा की ओर होनी चाहिए | यदि कंप्यूटर भी बच्चे के कमरे रखना हो तो पलंग से दक्षिण दिशा की ओर आग्नेय कोण में कंप्यूटर रखा जा सकता है | यदि बच्चे के कमरे का दरवाजा ही पूर्व दिशा में हो तो  पलंग दक्षिण से उत्तर की ओर होना चाहिए | सिरहाना दक्षिण में तथा पैर उत्तर में | ऐसी स्थति में कंप्यूटर टेबल के पास ही पूर्व की ओर स्टडी टेबल स्थति होनी चाहिए | नैत्रत्य कोण में बच्चों की पुस्तकों की रैक तथा उनके कपड़ों वाली अलमारी होनी चाहिए | यदि कमरे से ही जुड़े हुए स्नानागार तथा शौचालय रखना हो तो पश्चिम अथवा वायव्य दिशा में हो सकता है |

बच्चों के कमरे में पर्याप्त रोशनी आणि चाहिए | व्यवस्था ऐसी हो की दिन में पड़ते समय उन्हें कृत्रिम रोशनी की आवश्यकता ही न हो | जहाँ तक संभव हो सके , बच्चों के कमरे की उत्तर दिशा बिल्कुल खाली रखना चाहिए | उनके किताबों की रैक नैत्रत्य कोण में स्थित हो सकती है | खिड़की ,ऐसी ,तथा कूलर उत्तर दिशा की ओर हो | बच्चों के कमरे में स्थित चित्र एवं पेंटिंग्स की स्थिति उनके विचारों को प्रभावित करती है | इसलिए हिंसात्मक ,फूहड़ एवं भड़काऊ पेंटिंग्स एवं चित्र बच्चों के कमरे में कभी नहीं होना चाहिए |महापुरुषों के चित्र ,पालतू  जानवरों के चित्र ,प्राकृतिक सौंदर्य वाले चित्र तथा पेंटिंग्स बच्चों के कमरे में हो सकती है |भगवान गणेश तथा सरस्वती जी का चित्र कमरे के पूर्वी भाग की ओर होना चाहिए |इन दोनों की देवी-देवताओं को बुद्धिदाता माना जाता है अतः सौम्य मुद्रा में श्री गणेश तथा सरस्वती की पेंटिंग्स या चित्र बच्चों के कमरे में अवश्य लगाएं |

आपका बच्चा जिस क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहा है , उस करियर में उच्च सफलता प्राप्त व्यक्तियों के चित्र अथवा पेटिंग्स भी आप बच्चों के कमरे में लगा सकते है | यदि बच्चा छोटा हो , तो कार्टून आदि की पेटिंग्स लगाईं  जा सकती है | बच्चों के कमरे में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए की घर में होने वाला शोरगुल उन्हें बिल्कुल बाधित न करे अतः बच्चों के कमरे में घर की तरफ कोई खिड़की या झरोखा खुला हुआ नहीं होना चाहिए| बच्चों की श्रेष्ठ उन्नति के लिए उनके कमरे का वास्तु के अनुकूल होना आवश्यक है |

वास्तु अनुरूप परिवर्तन से आपके बच्चे के मानसिक विकास एवं उसकी ग्रहण क्षमता में शुभ परिवर्तन  नजर आएगा | इस वास्तु परिवर्तन के पश्चात बच्चा मन लगाकर पढ़ेगा तथा उसका स्वास्थ्य भी अनुकूल रहेगा |

 

 

कैसा हो आपका किचन

ज्ञानवाणी में वास्तुशास्त्र के अंतर्गत हम चर्चा करेंगे की आपका किचन कैसा हो | किचन घर का सबसे अहम हिस्सा होता है | यहाँ बनता है खाना ,जो परिवार के लोगों की सेहत और खुशयों से जुड़ा  होता है | लिहाजा किचन का वास्तु अच्छा होना बेहद जरूरी है |

दक्षिण-पूर्व दिशा सही

घर की दक्षिण पूर्व दिशा किचन बनाने के लिए सबसे उपयुक्त है | क्योकि इस दिशा के स्वामी अग्निदेव है ,अगर किसी वजह से आप इस दिशा में किचन नहीं बना पा रहे है तो उत्तर-पक्षिम दिशा में भी किचन बनाया जा सकता है |

कहाँ रखे गैस स्टोव

कूकिंग गैस आपके किचन की सबसे जरूरी चीज़ है | लिहाजा इसे भी सही दिशा में रखना जरूरी है | इसलिए गैस स्टोव को किचन के दक्षिण पूर्व दिशा में रखना बेहतर माना जाता है |

कहाँ हो सिंक

सिंक और नल बहते पानी का संकेत देते है इसलिए आपके किचन में सिंक की जगह उत्तर पूर्व दिशा में गैस स्टोव से दूर होनी चाहिए | ऐसा इसलिए क्योकि आग और पानी विपरीत तत्त्व है |

फ्रिज की जगह

अगर आपका फ्रिज किचन में ही है तो इसे दक्षिण -पश्चिम दिशा में कार्नर से थोड़ा दूर हटाकर रखे |लेकिन उत्तर पूर्व दिशा में बिल्कुल ना रखे |

खिड़कियों की जगह

वास्तु शास्त्र के मुताबिक किचन में कम  से कम  एक खिड़की या एग्जास्ट का होना बेहद जरूरी है |और ये किचन की पूर्व दिशा में होना चाहिए |

स्टोरेज स्पेस

किचन में बर्तनों से लेकर राशन तक रखने के लिए स्टोरेज स्पेस का होना भी बहुत  आवश्यक है | स्टोरेज अलमारियां बनाने के लिए दक्षिण या पक्ष्चिम की दीवारों का इस्तेमाल किया जा सकता है | उत्तर और पूर्व दिशा की दीवारों में स्टोरेज स्पेस नहीं बनवाना चाहिए |

बिजली के उपकरण

आजकल के  किचन में इलेक्ट्रिकल्स अप्लाइंसेस की bhar मार होती है | ओवन से लेकर माइक्रोवेव और टोस्टर से लेकर मिक्सी तक | लिहाजा इस सभी उपकरणों को रखने के लिए दक्षिण पूर्व की दिशा सबसे अच्छी मानी जाती है |

पानी के बर्तन

पीने के पानी के लिए चाहे आप फ़िल्टर का इस्तेमाल करते हो ,आरओ का या फिर घड़े का ,इस सभी को किचन की उत्तर पूर्व दिशा में रखना चाहिए |

 

 

 

Share this post

Submit VSTU TIPS  in Delicious Submit VSTU TIPS  in Digg Submit VSTU TIPS  in FaceBook Submit VSTU TIPS  in Google Bookmarks Submit VSTU TIPS  in Stumbleupon Submit VSTU TIPS  in Technorati Submit VSTU TIPS  in Twitter