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नक्षत्रों के वृक्ष - मार्च 2017
अनुवाद उपलब्ध नहीं है |

नक्षत्रों के वृक्ष

भरणी नक्षत्र में जन्में जातक की राशि मेष, राशि का स्वामी मंगल तथा नक्षत्र का स्वामी शुक्र है । आकाश मंडल में नक्षत्रों की कड़ी में भरणी द्वितीय नक्षत्र है । भरणी का शाब्दिक अर्थ भरण-पोषण करना है । इसका खगोलीय नाम 35 एरीटिस है । इस नक्षत्र में जन्में जातक पर मंगल व शुक्र का प्रभाव रहता है ।

अशुभ नक्षत्र- भरणी नक्षत्र अशुभ होता है। इस नक्षत्र में कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित है । ये नक्षत्र क्रूर एवं उग्र प्रकृति के कार्यों जैसे बिल्डिंग गिराना, कहीं आग लगाना, विस्फोटों का परीक्षण करना आदि के लिए ही शुभ माने जाते हैं ।

शारीरिक गठन- इस नक्षत्र में जन्में जातक देखने में बहुत ही आकर्षक व सुन्दर होते हैं । इनकी मध्यम कद काठी, लम्बी गर्दन और सुंदर आंखें होती हैं । यदि इनकी गर्दन छोटी होती है तो चेहरा गोल होता है।

स्वास्थ्य- इन लोगों को अग्नि द्वारा जलने से, अकस्मात गिरने से चोट, नेत्र रोग और स्त्रियों को गर्भ सम्बन्धि समस्याएं होने की संभावना रहती है ।

भौतिक सुख- ये बहुत सुखी व भाग्यशाली होते हैं और भवन व वाहन के मालिक होते हैं । हालांकि ये सब इनके व्यक्तित्व पर निर्भर रहता है ।

सकारात्मक पक्ष- भरणी नक्षत्र में जन्में जातक सत्य वक्ता, उत्तम विचार वाले, वचनबद्ध, धार्मिक कार्यों के प्रति रुचि रखने वाले, साहसी, प्रेरणादायक, चित्रकारी एवं फोटोग्राफी में अभिरुचि रखने वाले होते हैं । ये अपने उद्देश्य को अंतिम रूप में प्राप्त करने में समर्थ होते हैं। 33 साल की उम्र के बाद इनके जीवन में एक बड़ा सकारात्मक मोड़ आता है ।

नकारात्मक पक्ष- इस नक्षत्र में जन्में जातक की जन्म कुंडली में यदि मंगल और शुक्र की स्थिति खराब हो तो ऐसा व्यक्ति क्रूर, अपयश का भागी, विनोद में समय व्यतीत करने वाला, जल से डरने वाला, चपल तथा बुरे स्वभाव वाला होता है । ऐसा जातक बुद्धिमान होने के बावजूद निम्न स्तर के लोगों के मध्य रहने वाला, विरोधियों को नीचा दिखाने वाला, मदिरा अथवा रसीले पदार्थों का शौकीन, तथा उन्नति का आकांक्षी होता है । इनके इस स्वभाव से स्त्री और धन दोनों ही सुख मिलने की कोई गारंटी नहीं होती ।

शांति उपाय- भरणी नक्षत्र का देवता यम है । इसलिए इस नक्षत्र के शांति उपाय के लिए यम का व्रत और पूजन किया जाता है।

भरणी नक्षत्र का वृक्ष-आंवला

आंवला एक फल देने वाला वृक्ष है । यह लगभग 20 से 25 फुट लंबा झारीय पौधा होता है । एशिया के अलावा यह यूरोप और अफ्रीका में भी पाया जाता है । इसका वैज्ञानिक नाम ‘रिबीस यूवा-क्रिस्पा’ है । आंवले के फूल घंटे की तरह होते हैं । इसके फल सामान्य रूप से छोटे, हरे रंग के, चिकने व गूदेदार होते हैं । आंवले के पत्ते इमली के पत्तों की तरह छोटे और नुकीले होते हैं । आंवले को अंग्रेजी में ‘इंडियन गूसबेरी’ के नाम से जाना जाता है। कार्तिक के महीने में आंवले का सेवन बहुत ही गुणकारी माना जाता है। इसके पेड़ की छाया तक में एंटीवायरस गुण होते हैं । आंवले का स्वाद भले ही कसैला होता है परंतु इसके गुणों के कारण इसे ‘धातृ फल’ भी कहा जाता है । धातृ का अर्थ होता है पालन-पोषण करने वाला अर्थात् ‘मां’ । आंवला को विटामिन-सी का भंडार माना जाता है । इसमें उपस्थित पोषक तत्व पकाने, सुखाने, तलने या अचार बनाने पर भी नष्ट नहीं होते । चरक संहिता के अनुसार आंवले के 100 ग्राम रस में 921 मिलीग्राम विटामिन-सी और 100 ग्राम गूदे में 720 मिलीग्राम विटामिन-सी तथा अन्य आवश्यक खनिज तत्व पाए जाते हैं । इसमें प्रोटीन 0.5, वसा 0.1, खनिज द्रव्य 0.7, कार्बोहाइड्रेट्स 14.1, कैल्शियम 0.05 और फाॅस्फोरस 0.02 प्रतिशत पाया जाता है । साथ ही लौह तत्व 1.2 मि.ग्रा., निकोटिनिक एसिड 0.2 मि.ग्रा. के अलावा भी कई तत्व पाए जाते हैं । आंवले में दाह, खांसी, श्वास रोग, कब्ज, पाण्डुरोग, त्रिदोष, क्षय, छाती के रोग, हृदय रोग, मूत्र विकार आदि अनेक रोगों को नष्ट करने की शक्ति है। नेत्रों की ज्योति बढ़ाने, सिर के केशों को काला व मजबूत करने के साथ ही यह दांत-मसूड़ों की परेशानी को भी दूर करता है ।

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Tree of Nakshtra

The natives born during Bharani nakshatra have Aries as their zodiac sign. Their ruling lord is Mars and the nakshatra lord is Venus. In the chain of all the nakshatras or stars, Bharani stands on the second position in the sky. The meaning of Bharani is to nourish and look after. Its astrological name is 35 Aritis. The people born under the influence of this nakshatra are being influenced by Mars and Venus.

Inauspicious Nakshatra- Bharani nakshatra is not considered as auspicious. No propitious ceremony should be performed during this nakshatra. This nakshatra is considered to perform only cruel, ruthless and fiery tasks. It is considered auspicious only for breaking of buildings, to ignite fire some places, testing the explosions etc.

Physical Features- The people born in this nakshatra are attractive in looks and are beautiful. They are middle statured, have cylindrical neck and attractive eyes. If they have small neck, then their face is somewhat circular in shape. 

Health- These people may encounter with a situation where they may be caught in fire, fall down from height and get hurt or have eyesight issues. Pregnant ladies may encounter with womb related issues.

Physical Pleasure- They are very happy and fortunate people. They are owner of buildings and vehicles, although all these things depend on their personality.

Optimistic Aspects- The people born in this nakshatra speak the truth and have good thought process. They stick to their words and are interested in spiritual activities. They are brave and inspiring and are interested in photography and paintings. They are successful in accomplishing their end goals. After 33 years of age, their life finds an optimistic turn.

Pessimistic Features- If people born in this nakshatra have malefic effects of Mars and Venus, then they will be cruel in nature, will lose their fame and will spend time in humorous activities. They will be scared of water, will be clever and have a bad temperament. These persons might be intelligent but would love to stay in the company of lower class only. They would love to drink and smoke and show his rivals down. They would be very ambitious for gaining success but neither happiness nor satisfaction from the women end is guaranteed as a result of this behaviour.

Remedy for Peace- The ruling lord of Bharani nakshatra is Lord 'Yam'. To pacify this nakshatra, one should revere the lord Yam and observe his fast. 

The Tree for Bharani nakshatra- Indian Gooseberry tree (Amla): This is a tree with fruits. It is approximately 20-25 feet tall shrub. Apart from Asia, it is found in Europe and Africa. Its scientific name is “ Ribis Yuva Crispa”. Its flowers are like small bells. Its fruits are smaller in size, smooth, and pulpy and are of green in colour. Its leaves are small like tamarind and have sharp edges. It is called as 'Indian Gooseberry'. It should be eaten during the month of Kartika as they offer very auspicious results in terms of health. Even its shade offers antivirus properties. The taste of its fruit might be sour and bitter but due to its medicinal properties, it is called as “Dhatra Ras”. The meaning of Dhatra is “nourishment”. Amla is a rich source of Vitamin C. Its properties are not lost even after cooking, by drying, frying or after preparing its pickles. According to Charak Sanhita, in 100 grams amla juice, we have 921 milligrams of Vitamin C. In its 100 grams of pulp, 720 milligrams of Vitamin C is present. It also includes many microelements. The protein content is 0.5, fats 0.1, minerals 0.7, carbohydrates 14.1, calcium 0.05 and phosphorus content is 0.02 %. Iron content is 1.2 mg; nicotinic acid 0.2 mg and other micro elements are also found in its fruit. Amla is equipped with many alluring properties like curing cold and cough, constipation, congestion of chest, cardiac ailments, urinal infections, greying of hair, sore throat etc. It improves eyesight, turns the hair black and makes them strong. It also cures teeth and gum problems.

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