आज का राहुकाल/ 10 दिसंबर-16 दिसंबर (दिल्ली)

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सितम्बर 2016, पितरों को कब करें प्रसन्न
अनुवाद उपलब्ध नहीं है |

खूबसूरती चाहिये तो 25 सितम्बर को, सौभाग्य के लिये 29 सितम्बर को, राहतें और भी हैं.............

 

पितृदोष को सबसे बड़ा दोष माना गया है। कुण्डली का नौंवा घर धर्म का होता है। यह घर पिता का भी माना गया है। यदि इस घर में राहु, केतु और मंगल अपने नीच राशि में बैठें हैं, तो यह इस बात का संकेत है कि आपको पितृदोष है। पितृदोष के कारण जातक को मानसिक पीड़ा, अशांति, धन की हानि, गृह-क्लेश जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पिण्डदान नहीं करने वााले लोगों के संतान की कुण्डली में भी पितृदोष का योग बनता है और अगले जन्म में वह भी पितृदोष से पीड़ित होता है। ‘पितृपक्ष में पिण्डदान और श्राद्ध कर्म करने से पितरों को मुक्ति मिलने के साथ ही आपका भाग्योदय भी होता है जिससे सुख, शांति और वैभव की प्राप्ति होती है भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या (पितृ-अमावस्या) तक श्राद्ध-कर्म किया जाता है ऐसी मान्यता है कि पितृपक्ष के 16 दिनों तक पितर धरती पर निवास करतें है। पितृ पक्ष में  शास्त्रीयविधि से अपने पूर्वजों का श्राद्ध-कर्म करना सर्वोपरि है शास्त्रों में ऐसा बताया गया है की जिन लोगों को अपने पितरों की तिथि याद नहीं है वे लोग पितृपक्ष की अमावस्या को श्राद्ध-कर्म कर सकते हैं। जैसा की हम लोग जानते हैं कि श्राद्ध-कर्म और पिण्डदान करने से पितरों को मुक्ति मिलती है। लेकिन गरूड़ पुराण की मानें तो यदि आप विधिवत तरीके और नक्षत्रों के अनुसार श्राद्ध-कर्म करते हैं, तो आपकी भी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैंढ

पुराण के अनुसार कुछ खास नक्षत्रों में श्राद्ध करने से विशेष फल प्राप्त होते हैैं। ये सूची इस तरह से हैं-

आर्द्रा नक्षत्र-            ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए,

रोहिणी नक्षत्र-          पुत्र पाप्ति के लिए,

मृगशिरा नक्षत्र-        गुणों के विकास के लिए, पुनर्वसु नक्षत्र- सुंदरता प्राप्त करने के लिए, पुष्य नक्षत्र- वैभव के लिए,

अश्लेषा नक्षत्र-        अधिक आयु के लिए,

मघा नक्षत्र-            अच्छी सेहत के लिए,

पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र-   अच्छे सौभाग्य के लिए, हस्त नक्षत्र- विद्या के लिए,

चित्रा नक्षत्र-            प्रसिद्ध संतान के लिए,

स्वाति नक्षत्र-           व्यापार में लाभ के लिए, विशाखा नक्षत्र- वंश वृद्धि के लिए,

अनुराधा नक्षत्र-        उच्च पद प्रतिष्ठा के लिए, ज्येष्ठा नक्षत्र- उच्च अधिकार भरा दायित्व प्राप्त करने के लिए,

मूल नक्षत्र-             निरोगी काया के लिए,

कृतिका नक्षत्र-         समस्त इच्छाओं की पूर्ति के लिए।

इस साल पितृ पक्ष (सितम्बर 2016) में पड़ने वाले नक्षत्रों की सूची इस प्रकार है-

तारिख           दिन           नक्षत्र

17जी           शनिवार        उ.भा.

18जी           रविवार        रेवती

19जी           सोमवार       अश्विन

20जी           मंगलवार      भारणी

21जी           बुधवार        कृत्तिका

22जी           गुरुवार        रोहिणी

23जी           शुक्रवार       मृगशिरा

24जी           शनिवार       आद्र्रा

25जी           रविवार        पुनर्वसु

26जी           सोमवार       पुष्य

27जी           मंगलवार      श्लेषा

28जी           बुधवार        मघा

29जी           गुरुवार        पू.फा.

30जी           शुक्रवार       उ.फा.

पुराण में बताये गये नक्षत्रों में से कुछ नक्षत्र इस साल पड़ रहें है-

21 सितम्बर 2016 को.........श्राद्ध करने से.........सभी कामनाओं की पूर्ति होगी।

22 सितम्बर 2016 को.........श्राद्ध करने से.........पुत्र प्राप्ति की प्राप्ति होगी।

23 सितम्बर 2016 को.........श्राद्ध करने से.........गुणों का विकास होगा।

24 सितम्बर 2016 को.........श्राद्ध करने से.........एश्वर्य की प्र्राप्ति होगी।

25 सितम्बर 2016 को.........श्राद्ध करने से.........रुप और सैन्दर्य प्राप्त होगा।

26 सितम्बर 2016 को.........श्राद्ध करने से.........वैभव प्राप्त होगा।

27 सितम्बर 2016 को.........श्राद्ध करने से.........दीर्घ आयु प्राप्त होगी।

28 सितम्बर 2016 को.........श्राद्ध करने से.........अच्छी सेहत प्राप्त होगी।

29 सितम्बर 2016 को.........श्राद्ध करने से.........सौभाग्य की प्राप्ति होगी।

 

यानि ऊपर लिखी तारीखों को पिण्ड दान करके आप आगे लिखा आशिर्वाद पाकर अपनी मनोकामना पूरी कर सकते हैं। जिनके माता पिता जीवित है या किसी और वजह से अगर आप श्राद्ध या पिण्डदान नहीं कर सकते तो पितरों के नाम दूध चावल की खीर जरुर दान करें।

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