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25 मई, वल्र्ड थायराइड डे
अनुवाद उपलब्ध नहीं है |

महिलाओं में अधिक होता है थायराइड

वल्र्ड थायराइड डे प्रत्येक वर्ष 25 मई को थायराइड रोग और उसके उपचार के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिये मनाया जाता है । हम भी आपको यहां थायराइड से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दे रहे हैं...


मानव शरीर में कुछ ग्रंथियां ऐसी होती हैं जो शरीर के पाचन तंत्र और अन्य क्रियाओं के लिये जरूरी रस और हार्मोन का निर्माण करती हैं । उन्हीं ग्रंथियों में से एक है थायराइड ग्रंथि । यह ग्रंथि गर्दन की श्वास नली के ठीक ऊपर, स्वर यंत्र के दोनों तरफ दो हिस्सों में तितली की आकृति में बनी होती है । थायराइड ग्रंथि का मुख्य काम शरीर की क्रियाओं के लिये थाइराॅक्सिन नाम के हार्मोन का निर्माण करना  है । थाइराॅक्सिन हार्मोन शरीर में उर्जा का निर्माण, प्रोटीन का उत्पादन तथा बाकी हार्मोन को नियंत्रित रखने का काम करता है । साथ ही यह शरीर के मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करके भोजन को ऊर्जा में बदलती है, लेकिन कुछ कारणों के चलते कई बार इस ग्रंथि में समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं जो आगे चलकर बड़ी बीमारी में बदल जाती हैं । इस समस्या की शुरुआत गले में एक छोटी-सी गांठ से होती है, लेकिन इस परेशानी पर ध्यान न देने के चलते यह बड़ी समस्या को बुलावा देती है और समय के साथ-साथ यह गांठ बढ़ने लगती है । यह बीमारी खासतौर से महिलाओं को अधिक होती है । हर दस थायराइड मरीजों में से आठ महिलाएं ही होती हैं ।

महिलाओं में थायराइड का सबसे बड़ा कारण होता है- ग्रेव्स रोग । महिलाओं में इस रोग के कारण थायराइड ग्रंथि की समस्या होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है । गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में इस बीमारी का खतरा और भी बढ़ जाता है । इस दौरान होने वाला तनाव इसका सबसे बड़ा कारण है । थायराइड एक जेनेटिक बीमारी भी है । अगर परिवार में किसी को सदस्य को थायराइड की समस्या हो तो भी इस बीमारी के होने की संभावना बनी रहती है ।

व्यर्थ की चिंता से तनाव बढ़ता है जिसका थायराइड ग्रंथि पर सीधा प्रभाव पड़ता है और जिसकी वजह से हार्मोन का अधिक स्त्राव होने लगता है ।

टोंसिल्स, सिर या थाइमस ग्रंथि की जांच के लिये एक्स रे कराना भी थायराइड का कारण बन सकता है ।

भोजन में कम नमक का सेवन, अधिक दवाओं और सोया प्रोटीन का सेवन भी थायराइड की समस्या को जन्म देता है ।

थायराइड दो प्रकार का होता है- हाइपर-थायराइडिज्म और हाइपो थायराडिज्म, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हाइपरथायराइडिज्म और हाइपोथायराडिज्म में क्या अंतर है ? इन दोनों थायराइड के लक्षण एक-दूसरे से बेहद अलग होते हैं ।

हाइपोथायरायडिज्म के प्रमुख लक्षण- चेहरे का फूलना, त्वचा का शुष्क होना, डिप्रेशन, वजन का अचानक बढ़ना, थकान, शरीर में पसीने की कमी, दिल की गति का कम होना, अनियमित या अधिक माहवारी का होना, कब्ज होना आदि इसके लक्षण हैं ।

हाइपर थायराइडिज्म के लक्षण- बालों का झड़ना, हाथ कापना, अधिक पसीना आना, वजन का घटना, खुजली व त्वचा का लाल होना, दिल की धड़कनों का बढ़ना, कमजोरी महसूस होना आदि इसके लक्षण हैं ।

थायराइड की जांच में थायराइड को बढ़ाने वाले हार्मोन टी-3 और टी-4 की जांच की जाती है । टीएफटी- के जरिए थायराइड के प्रकार का पता लगाया जाता है कि मरीज को हाइपर थायराइड है या हाइपो थायराइड ।

थायराइड के रोगों में उपचार विधि- महर्षि चरक के अनुसार थायराइड का रोग अधिक मात्रा में दूध पीने वालों को नहीं होता । इसके अलावा साबुत मूंग, पुराने चावल, जौ, सफेद चने, खीरा, गन्ने का जूस और दुग्ध पदार्थों का सेवन करना थायराइड में अच्छा रहता है । इसके विपरीत खट्टे और भारी पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए । ब्राह्मी, गुग्गल, शिलाजीत, कचनार का सेवन भी  थायराइड में बेहद लाभदायक है । 11 से 22 ग्राम जलकुंभी का पेस्ट बनाकर थायराइड के स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है । इसके अलावा नारियल का तेल लगाने से हाइपोथायरायडिज्म में फायदा होता है ।

अदरक- अदरक में मौजूद गुण जैसे पोटैशियम, मैग्नीश्यिम आदि थायराइड की समस्या से निजात दिलाने में मददगार हैं । अदरक में उपस्थित एंटी इंफलेमेटरी गुण थायराइड को बढ़ने से रोकता है और उसकी कार्यप्रणाली में भी सुधार लाता है ।

थायराइड की समस्या से दही और दूध का इस्तेमाल अधिक से अधिक करना चाहिए। इनमें मौजूद कैल्शियम, मिनरल्स और विटामिन्स थायराइड से ग्रसित लोगों को स्वस्थ बनाए रखने का काम करते हैं ।

मुलेठी थायराइड ग्रंथी को संतुलित और शरीर में उर्जा बनाए रखती है ।

थायराइड ग्रंथी को बढ़ने से रोकने में गेहूं और ज्वार बहुत ही लाभदायक हैं । आयुर्वेद में थायराइड की समस्या को दूर करने का यह सबसे बेहतर और सरल उपाय है । साबुत अनाज का सेवन थायराइड के मरीजों के लिये फायदेमंद होगा, क्योंकि साबुत अनाज में फाइबर, प्रोटीन और विटामिन्स भरपूर मात्रा में होते हैं जो थायराइड को बढ़ने से रोकता है ।

थायराइड के रोग में जितना हो सके, फलों और सब्जियों का सेवन करना चाहिए । फल और सब्जियों में एंटी आक्सिडेंटस होते हैं जो थायराइड को बढ़ने से रोकते हैं। सब्जियों में टमाटर और हरी मिर्च का अधिक सेवन करें ।

थायराइड की समस्या में गले को ठण्डी-गर्म सेंक देने से काफी आराम मिलता है । तीन मिनट गर्म पानी से और उसके तुरंत बाद एक मिनट तक ठण्डे पानी से तीन बार सेंक करें और चैथी बारी में तीन मिनट ठण्ड और तीन मिनट गर्म पानी की सेंक करें । इस उपाय को दिन में कम-से-कम दो बार करने से थायराइड के रोग में फायदा होता है ।

एक्यूप्रेशर- हमारे शरीर में पैराथायराइड और थायराइड के भी एक्यूप्रेशर बिंदू होते हैं जो पैरों व हाथों के अंगूठे के नीचे और थोड़े उठे हुए भाग में मौजूद होते हैं । प्रतिदिन इन बिंदुओं को बाएं से दाएं ओर प्रेशर करने, यानी दबाने से थायराइड के रोग में फायदा होता है । हर बिंदु को कम-से-कम तीन मिनट तक और दिन में कम-से-कम दो बार जरूर दबाएं ।

योग के जरिए भी थायराइड की समस्या से निजात पाया जा सकता है ।

बृहमुद्रासन- इस आसन में सीधा बैठकर अपनी गर्दन को दाएं-बाएं और ऊपर-नीचे चलाएं । इनके अलावा सर्वांगसन, सूर्य नमस्कार, पवनमुक्तासन, सुप्त्वज्रासन तथा नाड़ी शोधन प्राणायाम भी थायराइड के रोग में लाभदायक सिद्ध होते हैं ।

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