आज का राहुकाल/ 10 दिसंबर-16 दिसंबर (दिल्ली)

  • Mon
  • Tue
  • Wed
  • Thu
  • Fri
  • Sat
  • Sun
आज का राहुकाल
08:20 - 09:38

आज का राहुकाल
14:50 - 16:08

आज का राहुकाल
12:14 - 13:32

आज का राहुकाल
13:33 - 14:51

आज का राहुकाल
10:57 - 12:15

आज का राहुकाल
09:40 - 10:58

आज का राहुकाल
16:10 - 17:28

माता महा लक्ष्मी पूजा


**Note: आरती रोकने के लिए कृपया ऊपर दिया || बुट्तों दबाएँ..


लक्ष्मी कथा के लिए यहाँ क्लिक करें

महालक्ष्मी पूजा व्रत ..23 / 09 / 2012 से प्रारंभ हुआ हैं तथा इसका समापन 08 / 10 / 2012 को होगा | इस व्रत के दौरान जो पूर्णिमा पड़ती हैं उस दिन को उमा महेश्वर व्रत कहते हैं जो की इस वर्ष 29 / 09 / 2012 को पड़ रहा हैं | महालक्ष्मी व्रत कुल १६ दिनों का होता हैं,जो की जन - मानस के लिए बहुत उपयोगी हैं | यदि विधि विधान से पूर्ण भक्ति से ये व्रत किया जाये तो मनोकामना पूर्ण होती हैं | यह व्रत १६ दिनों का होता हैं लेकिन आप किन्ही कारणों से यह व्रत इतने लम्बी अवधि के लिए न कर पायें तो ३ दिन के लिए भी कर सकतें हैं प्रथम,मध्य एवं अंतिम होता हैं इस वर्ष ये दिन हैं .
प्रथम  23 – 09 - 2013
मध्य 29 – 09 - 2012 तथा
अंतिम 08 – 10 – 2012 को है..

इस व्रत के लिए यह सलाह दी जाती हैं की व्यक्ति इसे १६ वर्ष तक निरंतर रहते हैं तथा "उमा महेश्वरी व्रत "१८ वर्ष तक रहे, यदि आप ये व्रत इस प्रकार से निरंतर रहते हैं तो सर्वथा सभी कामनाओं की पूर्ति होगी , इसमें कोई संशय नहीं |
महालक्ष्मी व्रत (विधान ) -

१ - लकड़ी की चौकी पर श्वेत रेशमी आसन (कपड़ा ) बिछाएं ,
२ - यदि आप मूर्ति का प्रयोग कर रहे हो तो उसे आप लाल वस्त्र से सजाएँ |
३ - संभव हो तो एक कलश पर अखंड ज्योति स्थापित करें |
४ - सुबह तथा संध्या के समय पूजा आरती करें, मेवा,मिठाई, सफेद दूध की बर्फी का नित्य भोग लगायें |
५ - लाल कलावे का टुकड़ा लीजिये तथा उसमे १६ गांठे लगा कर कलाई में बांध लीजिये इस प्रकार प्रथम दिन सुबह पूजा के समय प्रत्येक घर के सदस्य इसे बांधे एवं पूजा के पश्वात इसे उतार कर लक्ष्मी जी के चरणों में रख दें इसका प्रयोग पुनः अंतिम दिन संध्या पूजा के समय होगा |

उद्यापन की विधि :

1 . व्रत के अंतिम दिन उद्यापन के समय दो सूप लें, किसी कारण से आप को सूप ना मिले तो आप स्टील की नई थाली ले सकते हैं इसमें १६ श्रृंगार के सामान १६ ही की संख्या में और दूसरी थाली अथवा सूप से ढकें , १६ दिए जलाएं , पूजा करें , थाली में रखे सुहाग के सामान को देवी जी को स्पर्श कराएँ एवं उसे दान करने का संकल्प लें |

२ . जब चन्द्रमा निकल आये तो लोटे में जल लेकर तारों को अर्घ दें तथा उत्तर दिशा की ओर मुंह कर के पति पत्नी एक - दूसरे का हाथ थाम कर के माता महालक्ष्मी को अपने घर आने का (हे माता महालक्ष्मी मेरे घर आ जाओ ) इस प्रकार तीन बार आग्रह करें |
३ . इसके पश्चात एक सुन्दर थाली में माता महालक्ष्मी के लिए, बिना लहसुन प्याज का भोजन सजाएँ तथा घर के उन सभी सदस्यों को भी थाली लगायें जो व्रत हैं | यदि संभव हो तो माता को चांदी की थाली में भोजन परोसें , ध्यान रखिये की थाली ऐसे रखी होनी चाहिये की माता की मुख उत्तर दिशा में हो और बाकि व्रती पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर मुह कर के भोजन करें |
४ - भोजन में पूड़ी, सब्जी ,रायता और खीर होने चाहिये | अथार्त वैभवशाली भोजन बनाये  
५ - भोजन के पश्चात माता की थाली ढँक दें एवं सूप में रखा सामान भी रात भर ढंका रहने दें | सुबह उठ के इस भोजन को किसी गाय को खिला दें और दान सामग्री को किसी ब्राह्मण को दान करें जो की इस व्रत की अवधी में महालक्ष्मी का जाप करता हो या फिर स्वयं यह व्रत करता हो, यदि ऐसा संभव न हो तो किसी भी ब्राह्मण को ये दान दे सकते हैं | या किसी लक्ष्मी जी के मन्दिर में देना अति उत्तम होगा |  

दान सामग्री की सूची

- चुनरी
- बिंदी
- सिंदूर
- कंघा (comb)
- शीशा (mirror)
- वस्त्र 16 मीटर श्वेत वस्त्र या 16 रुमाल सामर्थ के अनुरूप
- बिछिया
- नाक की किल या नथ
- फल (fruits)  
- मिठाई (sweets)  
- मेवा (Dry fruits )
- लौंग (clove )
- दक्षिणा
महालक्ष्मी जी का मंत्र -:  " ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रासिद प्रासिद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्षमाये नमः "

दान सामग्री की 16 वस्तुएं  -

सोलह चुनरी
सोलह सिंदूर
सोलह लिपिस्टिक
सोलह रिबन
सोलह कंघा
सोलह शीशा
सोलह बिछिया
नाक की सोलह कील या नथ
सोलह फल
सोलह मिठाई
सोलह मेवा
सोलह लौंग
सोलह इलायची
सोलह मीटर सफेद कपड़ा या सोलह रुमाल
मां महालक्ष्मी का "धन " मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रासिद प्रासिद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्षमाये  नमः

राशि

मेष राशि :-
- लाल चूड़ियां मां महालक्ष्मी को चढ़ाएं
- धन की बरसात होगी
- मां की कृपा बनी रहेगी
वृष राशि :-
- सफेद वस्त्र मां महालक्ष्मी को चढ़ाएं
- मां प्रसन्न होगी
- आर्थिक स्थिति मजबूत होगी |

कर्क राशि :- माता महालक्ष्मी को लाल चुनरी चढ़ायें |
धन की वृद्धि होगी |

मिथुन राशि :-
- हरे रंग का वस्त्र मां महालक्ष्मी को अर्पित करें |
- घर में लक्ष्मी आएगी
- मां महालक्ष्मी खुश होंगी  
सिंह राशि :-
- मिल्क केक मां महालक्ष्मी को चढ़ाएं
- निर्धन को धन मिलेगा
कन्या राशि :-
- पिस्ते से बनी मिठाई चढ़ाएं
- मनचाही मुराद पुरी होगी
तुला राशि :-
- मां महालक्ष्मी को सुगंध अर्पित करें |
- घर में धन की बरसात होगी
वृश्चिक राशि :-
- ताबें से बनी कोई चीज़ में महालक्ष्मी को चढ़ाएं
- कारोबार फले फूलेगा
धनु राशि :-
- मां महालक्ष्मी को केसरिया बर्फ़ी चढ़ाएं
- बैंक बैलेंस बढ़ेगा
मकर राशि :-
- मां महालक्ष्मी को काजल की डिब्बी चढ़ाएं
- मां का आशीर्वाद मिलेगा
कुंभ राशि :-
- बालों में बांधने वाली चोटी मां महालक्ष्मी को चढ़ाएं
- मां की कृपा आपके साथ रहेगी
मीन राशि  :-
- सोने से बनी कोई चीज़ भेंट करें
- मां प्रसन्न होंगी
पूजा की सामग्री :-
- 16 गांठों का धागा
- लाल और सफ़ेद रेशमी वस्त्र
- मिट्टी के हाथी
- महालक्ष्मी की तस्वीर जिसमें हाथी का सूंड ऊपर के तरफ़ उठी हो
-चंदन , अक्षत , रोली , दूब घास और मिष्ठान
- दो सूप
- दान के लिए 16 वस्तुएं
- हर वस्तु की संख्या 16 हो
महालक्ष्मी
- इस यंत्र को लाल रंग की स्याही से बनायें|
- इस यंत्र को ,भोजपत्र पर , देवी अष्टगंध से , यानि गोरोचन , कुंकुम, कपूर, सिंदूर , शहद , घी , मिश्री से
, अनार की कलम से लिखना चाहिये |
- अगर ये मुमकिन न हो तो सादे कागज पर लाल स्याही से यंत्र बनाइये |
- माता महालक्ष्मी की स्थापना पूजा के दक्षिण पूर्व कोने में कीजिये |
- लाल या सफ़ेद रेशमी वस्त्र के आसन पर माता को बैठाइये तथा ख़ुद भी लाल या सफ़ेद रेशमी वस्त्र धारण की जिये |
- एक लाल रेशमी धागें  में सोलह गांठे लगा कर अपनी कलाई पर  बाधिये |
- रोज शाम को एक दीपक माता के आगे जलाइये |
- आख़िरी दिन 16 दीपक जलाइये |
- आख़िरी दिन रात में चन्द्रोदय के बाद तारागणों को अर्घ दे कर माता को पुकारिये|
- 3 थाली में भोजन लगाइये |
महालक्ष्मी व्रत की समाप्ति :-
.... मंगलवार – 20 / 09 / 2011......... को महालक्ष्मी व्रत की समाप्ति हो रही हैं | इस व्रत की समाप्ति की विधि यानि व्रत
के अन्तिम दिन किये जाने वाले कामों के बारे में बतायेंगे |
लेकिन , सवाल ये हैं कि आख़िरी दिन कब हैं ?  ... 20 / 09 / 2011........को |
आचार्य जी - नियम हैं कि ये व्रत राधा अष्टमी से नन्दा अष्टमी तक होता हैं | राधा अष्टमी यानि भाद्रपद शुक्ल अष्टमी और नन्दा अष्टमी का मतलब हैं आश्विन कृष्ण अष्टमी | ये १६ दिनों का व्रत होता हैं | इस साल नन्दा अष्टमी
.. 5 सितम्बर....को पड़ रही हैं | ..20 – 09 - 2011...तारीख को अष्टमी हैं और अष्टमी तक महालक्ष्मी व्रत रहा जाता हैं उसके बाद व्रत की समाप्ति होगी |
व्रत पूजा की तैय्यारी  /   सामग्री  :-
16 दिन यानि ..20 – 09 - 2011...को आप को ये सामग्री पूजा के लिये जरूरत पड़ेगी |
१ - दो सूप
२ - 16 मिट्टी के दिये
३ - प्रसाद के लिये सफ़ेद बर्फ़ी
४ - 16 चीज़े - हर चीज़ सोलह की तादाद में  - लौंग , इलायची , मिठाई सुहाग का सामान
५ - फूल माला
६ - तारों को अर्ध देने के लिये यथेष्ट पात्र
७ - १६ गाँठ वाला लाल धागा

क्रिया विधि

१ शाम के समय पूजा करनी हैं
२ माता महालक्ष्मी के आगे १६ दीपक देसी घी के जलायें
३ माता का धूप दीप से पंचोपचार या षोडशोपचार पूजन करें
४ एक सूप में सोलह चीज़ें रखकर उसे दुसरे सूप से ढक दें | इसे माता के निमित दान करने का संकल्प करें
क्षीरो दाण्रव सम्भूता ल्क्ष्मीश्चन्द्रसहोदरा |
५ अपने हाथ में १६ गांठों वाला धागा बाँध लीजिये |
६ दीपक जला कर मंत्र जाप कीजिये
( ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रासिद प्रासिद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्षमाये नमः)
जैसा आपने संकल्प किया हो उस हिसाब से मंत्र जाप करिये |
(१) जप के बाद माता की आरती कीजिये, भोग लगाइये
(२) पूजा के बाद बाहर आकर तारों के प्रति अर्ध दीजिये | ये अर्घ चन्द्रोदय के बाद ही देना हैं | कुछ प्रमुख शहरों का , ..20 – 09 – 2011… को चन्द्रोदय इस प्रकार हैं -
कोलकाता – 10 : 53     वाराणसी – 11 : 14
कानपुर – 11 : 25    दिल्ली – 11 : 37
मुंबई – 11 : 54
३ अर्घ देने के बाद जीवनसाथी का हाथ पकड़ कर तीन बार उत्तर की ओर मुंह करके पुकारिये - " हे महालक्ष्मी , हे महालक्ष्मी , हे महालक्ष्मी ......|
४ अर्घ देने के बाद अन्दर आ कर तीन थालियों में पूरा भोजन लगाइये | एक - एक थाली आप दोनों की और एक माता महालक्ष्मी की |
५ भोजन के बाद अपनी थालियां उठा लें लेकिन माता की थाली वहीं छोड़ दें |
६ अगले दिन माता जी की थाली किसी गाय को खिला दें और सूप में रखा दान का सामान किसी मन्दिर में दान कर दें |
७ नित्य माता महालक्ष्मी के मंत्र का जप करते रहें |
८ १६ गांठों वाला धागा अपनी तिजोरी में संभाल कर रखें |

Share this post

Submit माता महा लक्ष्मी पूजा in Delicious Submit माता महा लक्ष्मी पूजा in Digg Submit माता महा लक्ष्मी पूजा in FaceBook Submit माता महा लक्ष्मी पूजा in Google Bookmarks Submit माता महा लक्ष्मी पूजा in Stumbleupon Submit माता महा लक्ष्मी पूजा in Technorati Submit माता महा लक्ष्मी पूजा in Twitter