आज का राहुकाल/ 10 दिसंबर-16 दिसंबर (दिल्ली)

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शिवरात्रि

                                                                       शिवरात्रि 
भगवान शंकर की कृपा से वर पाने की इच्छा  रखने वाली कन्याओ को आज की रात भगवान शिव की उपासना किस प्रकार करनी चाहिए |
१- सर्वप्रथम साफ मिट्टी ले कर उसे पानी दूध और गाय के घी में सान ले -"बं"मंत्र पढ़े | अब पहले गणेश जी बनाकर पीठ पर रखे -मंत्र है "ॐ हीं गं ग्लौ गणपतये ग्लौं गं हीं "108 बार "ॐ नमो हराय " मन्त्र पढ़ कर - बहेड़े के फल के बराबर मिट्टी अपने दाहिने हाथ में लेले |
२ - इस मिट्टी से आपको एक शिवलिंग बनाना है |शिवलिंग आपके अंगूठे से बड़ा और बित्सित यानि बित्ते से छोटा होना चाहिए | शिवलिंग बनाते समय आपको मंत्र पढ़ना है | " ॐ नमो महेश्वराय " 108 बार |
३ - अब इस शिवलिंग को चौकी पर अस्थापित करे और 108 बार मंत्र पढ़े " ॐ नमो शूलपाणी
४- अब बची मिटटी से सुन्दर सी कुमार की ( नौजवान की ) की मूर्ति बनाये और उसे भगवान शंकर के सीध में बैठकर 108 बार मंत्र पढ़े " ॐ एं हूं क्षूं क्लिं कुमाराय नम : "
५ - इसके बाद 108 बार " ॐ नमो शिवाय " मंत्र पढ़ कर प्रार्थना करे " ॐ नम : पिनाकिने इहगच्छ इह तिष्ठ "     अब यह पीठ पूजा के लिए तैयार है | अब आप इस मूर्ति को -जल से, दूध से, दही से, घी से ,शहद से , और पंचामृत से स्नान और धूप दीप नैवेद्य आदि से पूजन करे | बेल पत्र अवस्य चढ़ाये | शिव के नैवेद्य मे बेल फल ,धतुरा ,भंग की पत्ती बेर का फल इत्यादी अवस्य शामिल करे | इस प्रकार पूजा करके कस्य प्रयोग करे | अब आपको कास्य प्रयोग बतलाते है |
१ - विवाह योग्य कन्या को शीघ्र वर प्राप्ति के लिए " हीं ॐ नम: शिवाय हीं " मंत्र से १०८ बेर के फल भगवान को
१ - विवाह योग्य कन्या को शीघ्र वर प्राप्ति के लिए " हीं ॐ नम: शिवाय हीं " मंत्र से १०८ बेर के फल भगवान को मे तीन बार चढ़ाने से यतेष्ठ फल प्राप्त होगा |
२- यदि किसी लड़के को यतेष्ट कन्या की इच्छा हो तो उसे इसी मंत्र को  पढ़ते हुए १०८ बार अमृता (गिलोय) की आहुति पलाश्कि समिधा से रात्रि मे तीन बार देनी चाहिए |
मनोवंच्छित वर /कन्या पाने के लिये----अगर आपने अपना जीवन -साथी पहले ही पसंद कर लिया हो तो -आपको दूसरा मंत्र पढ़ना है| ये मंत्र  लड़के -लड़कियो दोनो के लिए कामान है | मंत्र है --क्लिं ॐ नम: क्लिं इस मन्त्र को १०८ बार पढ़ते हुये ३ -३ पूर्वा से बेल की समिधा में हवन करने से मनोवांक्षित वर /कन्या की प्राप्ति होती है |
४ ---- अगर विवाह में देर हो गई हो :- अगर आपके विवाह में देर हो रही हो जो इसी बिधि से भगवान शंकर की स्थापना करके उन्हें शिव के दस द्रब्य चढ़ाये | ये दस द्रब्य इस प्रकार है | बेल का फल ,तिल पांच मुट्ठी ,खीर एक कटोरी ,सवा पाव घी , सवा पाव दूध ,सवा पाव दही,
१०८ दूर्वा , चार अंगुल की वट की पांच लकडिया ,चार अंगुल की पलाश की पांच लकडिया , और चार अंगुल की कत्थे यानि खैर की पांच लकडिया |
ये सामग्री शिव को अर्पित करके रात्रि में तीन बार भगवान की पंचोपचार पूजा करके तीनो बार

- १०८ बार मंत्र जप करे | मंत्र है --`ॐ नमो भगवते रुद्राय `
५ - अगर आपको लगता है कि आपके रूप की कमी के कारण विवाह नहीं हो रहा हो तो आप उपरोक्त विधि से स्थापना करके खैर की समिधा से हवन करे | इसमे हवन सामग्री के तौर पर दूध और जौ का इस्तेमाल करना चाहिये |अगर खैर (कत्थे ) की लकड़ी न मिले तो उसकी  जगह गम्मारी की लकड़ी का इस्तेमाल कर सकते है | मंत्र है -` हीं ॐ नम: शिवाय हीं` `
६ - यदि आपका दाम्पत्य या प्रेम सम्बन्ध खतरे में पड़ गया हो तो --पहले बताई गई बिधि से स्थापना करके - अपने जन्म नक्षत्र में और शिवरात्रि के दिन गुडूची यानि गिलोय और बकुल यानि  मौलश्री की समिधा से घी ,शहद और शक्कर से होम करने से प्रेम सम्बन्ध या दाम्पत्य जीवन अक्षुण बना रहता है | मंत्र वही होगा - `हीं ॐ नम ; शिवाय हीं ` रात्रि में तिन बार भगवान की पूजा करके हर बार १०८ आहुतिया मंत्र पढ़ते हुये देनी चाहिये |
७ -- अगर आपको लगता है कि आपके शारीरिक गठन कि वजह से आपके विवाह में बाधा आ रही है तो शिवरात्रि के दिन से अपने जन्म दिन तक नित्य जप से शारीरिक सौष्ठव बेहतर होकर शादी का रास्ता खुलता है | इसके लिये शिवरात्रि कि रात उपरोक्त बिधि से तिन बार भगवान का पूजन करके हर बार बरगद कि समिधा जला कर बेल फल का गुदा ,शहद और घी से १०८ बार आहुतिया प्रदान करे | इसके बाद नित्य एक माला मंत्र पढ़े | प्रत्येक सोमवार को भगवान शंकर को दूध चढ़ाये और अपने जन्म दिन कि रात यही प्रक्रया दोहराये मंत्र - हीं ॐ नम : शिवाय हीं इससे लाभ अवस्य होगा |
८ -- विवाह  में आने वाली किसी भी बाधा को दूर करने के लिये शिवरात्रि कि रात भगवान शिव कि पूजा करके क्षीरी वृक्ष कि समिधा और लावा से हवन करना चाहिये प्रदोष का व्रत करना चाहिये और मंत्र कि एक माला का जप शिवरात्रि कि रात तक तिन बार कर के होम कर पुन: वर प्राप्ति तक नित्य करना चाहिये मंत्र - `हीं ॐ नम: शिवाय हीं `




शिवरात्रि के दिन शाही स्नान का महत्व -----------अगर आप गंगा जी नहीं पहंच सके तो आपको बता दूँ कि कुछ पुराणों जैसे स्कंद पुराण के कशी खंड और पर्व पुराण के उत्तर खंड 237 का कथन है कि भूमि के तीर्थो के अलावा कुछ ऐसे सदाचार और सुन्दर शील आचार भी है जिन्हें मानसिक तीर्थ कहा जाता है | शास्त्र के अनुसार ,सत्य ,क्षमा ,इन्द्रिय संयम ,दया ,सरलता ,दान ,आत्म निग्रह ,संतोष ,ब्रह्मचर्य ,मृदु वाणी ,ज्ञान ,धैर्य और तपस्या तीर्थ है | और सर्वोच्च तीर्थ मन कि शुद्धी है |वामन पुराण 43 ,25 में लिखा है कि आत्मा संयम रूपी जल से पूर्ण नदी है जो सत्य से प्रभाव मन है जिसका शील ही तट है | और जिसकी लहरे दया है उसी में गोता लगाना चाहिये अंत:करण जल से स्वच्छ नहीं होता |
`आत्मा नदी ,संयम ,तोय ,पूर्ण,सत्य वाह,शील ,तटा, त्योर्मिक ,ततरताभिषेक कुरु ,पांडु पुत्र न वारिणा शुद्धती अंतर आत्मा `
पद्य पुराण के 2 ,39 ,36 ,61 में तीर्थो के अर्थ को बिस्तार दिया गया है जहां अग्नि होत्र एवं श्राद्ध होता है ,मंदिर ,वो जहां वेदहै ,गौशाला,वो वाटिका जहां आश्वस्त वृक्ष रहता है ,जहां पुराण पाठ होता है ,जहां किसी का गुरु रहता है ,जहां पतिव्रता स्त्री रहती है ,जहां पिता एवं योग्य पुत्र का निवास होता है , वे सभी स्थान तीर्थ जैसा पवित्र है |
संकल्प करे कि आज के दिन झूठ नहीं बोले
संकल्प करे कि आज के दिन सभी प्राणियों पर दया करेगे
संकल्प करे कि आज शत्रुओ को क्षमा करेगें
पीपल के नीचें रखे शिवलिंग को स्नान कराएं
गाय को पानी पिलाये
एक थाली में जल लेकर उसमे कुछ बुँदे गंगाजल कि डाले और अंजलि में जल भर कर , थाली में ही सप्तऋषियों के नाम तर्पण करे उसके बाद स्नान करे तो आपको गंगा स्नान का पुण्य फल प्राप्त होगा |
नये कपडे पहन कर उत्तर कि ओर मुंह करके भगवान शंकर के नाम का उच्चारण 108 बार करे | किसी वृद्ध स्त्री के घर जाकर उसे चांदी कि कोई चीज या कपड़े भेंट करें उससे आपको गंगा स्नान के बराबर पुण्य मिलेगा |
अपने निकट के किसी मंदिर में जाकर शिवलिंग पर पूरी श्रद्धा से दूध और चावल चढाने से आपको गंगा स्नान के बराबर पुण्य प्राप्त होगा |
किसी साधु या ब्रह्माण को वस्त्र दान करे और दूध पिलाये पुण्य प्राप्त होगा |
सूर्यास्त के समय हाथ पैर धोकर उत्तर कि ओर मुंह करके संपूर्ण भोजन सामग्री एक थाली में निकाले उसमे कुछ दक्षिणा भी रखे भगवान शंकर का स्मरण करते हुए किसी चलते साधू को भेट कर दे |


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