November 2019

कौन है आपका इष्ट देव ?

इष्ट देव (Ishta Devta) या देवी का निर्धारण हमारे जन्म-जन्मान्तर के संस्कारों से होता है। ज्योतिष में जन्म कुंडली के पंचम भाव से पूर्व जन्म के संचित धर्म, कर्म, ज्ञान, बुद्धि, शिक्षा, भक्ति और इष्टदेव का बोध होता है। यही कारण है अधिकांश विद्वान इस भाव के आधार पर इष्टदेव का निर्धारण करते है। नवम् […]

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इन वास्तु के उपायों से मिलेगी सफलता

वास्तु (Vastu) विज्ञान में हमारे पूर्वजों ने अपने दिव्य ज्ञान से ऐसे अनेक तथ्यों को शामिल किया है जो कि किसी भी भवन के रहवासियों को शांतिपूर्वक रहने में परम सहायक होते हैं। इन सभी तथ्यों में ‘क्यों’ और ‘कैसे’ की कोई गुंजाइश नहीं है क्योंकि प्रयोगकर्ता को होने वाले प्रत्यक्ष लाभ ही इसके प्रमाण

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क्या है लोहड़ी के पीछे की कथा

लोहड़ी (Lohri) पर्व की महत्वता सबसे ज़्यादा पंजाब राज्य में देखने को मिलती है | छोटे बच्चे लोहड़ी से कुछ दिन पहले से ही लोहरी के गीत गाते हैं और साथ ही लोहरी के लिए लकड़ियां, मेवे, रेवडियां, मूंगफली इकट्ठा करने लगते हैं। लोहरी वाले दिन शाम को आग जलाई जाती है। अग्नि के चारों

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मकर संक्रांति का सूर्य देव से नाता

मकर संक्रांति (Makar Sankranti) को सूर्य के संक्रमण का त्यौहार माना जाता है। एक जगह से दूसरी जगह जाने अथवा एक-दूसरे का मिलना ही संक्रांति होती है। सूर्यदेव जब धनु राशि से मकर पर पहुंचते हैं तो मकर संक्रांति मनाई जाती है। सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। यह परिवर्तन साल में एक

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मंगल यंत्र से कैसे मिलेगा आपको लाभ

हिंदू शास्त्रों में मंगल ग्रह (Mangal Yantra) को नवग्रहों में सबसे शक्तिशाली माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगल उच्च स्थान पर होता है, उस जातक को वह शुभ फल प्रदान करते है जैसे हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है और समाज में मान सम्मान में वृद्धि

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सुनेला रत्न के लाभ

पुखराज का उपरत्‍न सुनेला, पीले-भूरे रंग का होता है। इस रत्‍न की चमक उगते सूरज के समान होती है। वैदिक ज्‍योतिष के अनुसार सुनेला रत्‍न गुरु ग्रह से संबंधित होता है। इसे पहनने से गुरु से संबंधित दोष दूर होते हैं, मान-सम्‍मान की प्राप्‍ति होती है, निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है और

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कैसे हुई सफला एकादशी व्रत की शुरुआत

पौराणिक कथाओं के अनुसार एकादशी व्रत कथा व महत्व हर हिन्दू धर्म से जुड़ा हुआ व्यक्ति जानता होगा । हर मास की कृष्ण व शुक्ल पक्ष को मिलाकर दो एकादशियां आती हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। लेकिन यह बहुत कम जानते हैं कि एकादशी एक देवी थी जिनका जन्म भी

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रामायण की हर घटना है सच, यह हैं सबूत

राम और रामायण आदि काल से लोगों की आस्‍था का केन्‍द्र रहे हैं। रामायण की माने तो लंकेश रावण को मार कर प्रभु श्री राम ने धर्म की स्‍थापना की थी। क्‍या रावण के सच मे दस सिर और बीस हाथ थे। क्‍या हनुमान जी अपना रूप मनचाहा बढ़ा सकते थे। ऐसे कई सवाल है

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क्या है आपकी समस्याओं का कारण

जन्मकुंडली के शुभ और अशुभ ग्रहों का प्रभाव हर जातक पर पड़ता है। कुंडली में स्थित ऐसे ग्रहों के कारण जातक को घर-परिवार में कलह (Grah Kalesh) होता रहता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमा के साथ शनि-राहु बैठ गया तो जातक पीड़ित हो जाता है। जिस कारण मन दुखी रहता है। ऐसे जातक में

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विवाह की समस्याओं को कैसे करें दूर

हर माता-पिता अपने पुत्र-पुत्री के लिए योग्य वर ढुंढना तो पहले से ही शुरु कर देते हैं। लेकिन विवाह (Marriage) के लिए शुभ समय, शुभ मुहूर्त का इंतजार करते हैं। उनका यह इंतजार उनकी चिंता बढ़ाता हैं। हर वो लड़की-लड़का जो अपने जीवन के सबसे सुनहरे पल का बेसबरी से इंतजार कर रहे होते है।

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