English

हर रंग का क्या महत्व होता है |

होली आई बहार लाई, संग रंगों की बौछार लाई लाल गुलाबी हरा नीला, और सब है यहां पीला-पीला होली को अगर हम अंग्रेजी के सापेक्ष में देखें तो इसका मतलब होता है पवित्रता । यह पवित्रता है इस प्रकृति की, पवित्रता इस धरती की, हमारी पौराणिक संस्कृति की और सबसे खास होली के ढेर सारे […]

हर रंग का क्या महत्व होता है | Read More »

हिन्दू परम्परा में क्या है तिलक का महत्व

मस्तक पर तिलक लगाना हिन्दु परम्परा में बहुत ही शुभ माना जाता है । तिलक को सात्विकता का प्रतीक माना जाता है । हिंदू संस्कृति में किसी भी शुभ काम की शुरुआत के लिये सबसे पहले तिलक लगाने की परंपरा होती है। विजय प्राप्त करने से पहले और बाद में, कोई नया काम शुरू करने

हिन्दू परम्परा में क्या है तिलक का महत्व Read More »

चैतन्य महाप्रभु जयंती – कौन है चैतन्य महाप्रभु

वौष्णवों के गौड़ीय संप्रदाय की आधारशिला रखने वाले चैतन्य महाप्रभु भक्तिकाल के प्रमुख कवियों में से एक थे, जो वैष्णव धर्म के भक्ति योग के प्रचारक भी रहे हैं । इनका जन्म 1486 में फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को पश्चिम बंगाल के नवद्वीप (नादिया नामक गांव) में हुआ था। ये कृष्ण के परम भक्त

चैतन्य महाप्रभु जयंती – कौन है चैतन्य महाप्रभु Read More »

शुक्र प्रदोष व्रत और शनि प्रदोष व्रत

सौभाग्य, समृद्धि और कल्याण शुक्र प्रदोष व्रत हिंदू धर्म के अनुसार, कलियुग में प्रदोष व्रत अति मंगलकारी और शिव कृपा प्रदान करने वाला होता है । प्रदोष व्रत हर महीने दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को पड़ता है । सप्ताह के सातों दिन पड़ने वाले सभी प्रदोष व्रत का अपना एक अलग महत्व है ।

शुक्र प्रदोष व्रत और शनि प्रदोष व्रत Read More »

याज्ञवल्कय जयंती – कौन थे याज्ञवल्कय, क्यों उन्हें याज्ञिक सम्राट कहा जाता है |

ब्रह्मज्ञानी, महान अध्यात्मवेत्ता, अच्छे वक्ता, योगी, धर्मात्मा और तेजस्वी युग दार्शनिक जैसे गुणों से भरपूर याज्ञवल्कय जी भारतीय ऋषियों की परंपरा के अग्रणी ऋषि हुए हैं । याज्ञवल्कय जी के जन्म दिवस को प्रतिवर्ष याज्ञवल्कय जयंती के रूप में पूरे देश में मनाया जाता है । याज्ञवल्कय महर्षि वैशम्पायन के शिष्य होने के साथ ही

याज्ञवल्कय जयंती – कौन थे याज्ञवल्कय, क्यों उन्हें याज्ञिक सम्राट कहा जाता है | Read More »

वरूथिनी एकादशी व्रत – यह व्रत कर के लीजिये कन्यादान का लाभ

जीवन में कन्यादान का बहुत अधिक महत्व है । जिस घर में कन्या नहीं है लेकिन वो कन्यादान का लाभ लेना चाहते हैं तो उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए | वरूथनी शब्द संस्कृत भाषा के वरूथिन से बना है, जिसका मतलब होता है- प्रतिरक्षक, यानि रक्षा करने वाला । चूंकि यह एकादशी सब दुःखों

वरूथिनी एकादशी व्रत – यह व्रत कर के लीजिये कन्यादान का लाभ Read More »

गुड फ्राइडे – आखिर इस दिन का क्या है इतिहास

गुड फ्राइडे का पर्व ईसा मसीह की याद में मनाया जाता है । इसे ‘होली फ्राइडे’, ‘ब्लैक फ्राइडे’ और ‘ग्रेट फ्राइडे’ भी कहा जाता है । इस दिन ईसा मसीह को दंड स्वरूप सूली पर चढ़ाया गया था । ईसा मसीह के द्वारा लोगों को मानवता और शांति का पाठ पढ़ाने की सजा दी गई

गुड फ्राइडे – आखिर इस दिन का क्या है इतिहास Read More »

मेष संक्रांति – इस दिन क्या होता है खास

सत्तू खाकर मनाएं मेष संक्रांति सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने के दिन को मेष संक्रांति के रूप में मनाया जाता है । उत्तर भारत में इसे ‘सतुआ संक्रांति’ के नाम से जाना जाता है । सोलर कैलेंडर को मानने वाले लोग इसी दिन से नव वर्ष का आरंभ मानते हैं |   प्रत्येक

मेष संक्रांति – इस दिन क्या होता है खास Read More »

हनुमान जयंती – रोग मुक्त होने के लिए पढ़े हनुमान जी के ये मंत्र

राम भक्त हनुमान शास्त्रानुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को एकादश रुद्रावतार श्री राम भक्त हनुमान का जन्म माता अंजनी के उदर से हुआ था । पंचांग के अनुसार हनुमान जी का जन्म हस्त नक्षत्र में हुआ था । एकादश रुद्रावतार का अर्थ है कि हनुमान जी भगवान शिव के 11वें अवतार

हनुमान जयंती – रोग मुक्त होने के लिए पढ़े हनुमान जी के ये मंत्र Read More »

नृसिंह चतुर्दशी – कैसे रहें बुरी शक्तियों से दूर

मंत्र –  “ॐ उग्रवीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखं । नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम् ॥“ यंत्र :- आज नृसिंह चतुर्दशी है। प्रत्येक वर्ष वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को नृसिंह चतुर्दशी मनाई जाती है। पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर दैत्यों के राजा हिरण्यकश्यपु का वध किया था। अतः आज के

नृसिंह चतुर्दशी – कैसे रहें बुरी शक्तियों से दूर Read More »