acharya indu prakash

क्या है लोहड़ी के पीछे की कथा

लोहड़ी (Lohri) पर्व की महत्वता सबसे ज़्यादा पंजाब राज्य में देखने को मिलती है | छोटे बच्चे लोहड़ी से कुछ दिन पहले से ही लोहरी के गीत गाते हैं और साथ ही लोहरी के लिए लकड़ियां, मेवे, रेवडियां, मूंगफली इकट्ठा करने लगते हैं। लोहरी वाले दिन शाम को आग जलाई जाती है। अग्नि के चारों […]

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मकर संक्रांति का सूर्य देव से नाता

मकर संक्रांति (Makar Sankranti) को सूर्य के संक्रमण का त्यौहार माना जाता है। एक जगह से दूसरी जगह जाने अथवा एक-दूसरे का मिलना ही संक्रांति होती है। सूर्यदेव जब धनु राशि से मकर पर पहुंचते हैं तो मकर संक्रांति मनाई जाती है। सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। यह परिवर्तन साल में एक

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मंगल यंत्र से कैसे मिलेगा आपको लाभ

हिंदू शास्त्रों में मंगल ग्रह (Mangal Yantra) को नवग्रहों में सबसे शक्तिशाली माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगल उच्च स्थान पर होता है, उस जातक को वह शुभ फल प्रदान करते है जैसे हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है और समाज में मान सम्मान में वृद्धि

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सुनेला रत्न के लाभ

पुखराज का उपरत्‍न सुनेला, पीले-भूरे रंग का होता है। इस रत्‍न की चमक उगते सूरज के समान होती है। वैदिक ज्‍योतिष के अनुसार सुनेला रत्‍न गुरु ग्रह से संबंधित होता है। इसे पहनने से गुरु से संबंधित दोष दूर होते हैं, मान-सम्‍मान की प्राप्‍ति होती है, निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है और

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कैसे हुई सफला एकादशी व्रत की शुरुआत

पौराणिक कथाओं के अनुसार एकादशी व्रत कथा व महत्व हर हिन्दू धर्म से जुड़ा हुआ व्यक्ति जानता होगा । हर मास की कृष्ण व शुक्ल पक्ष को मिलाकर दो एकादशियां आती हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। लेकिन यह बहुत कम जानते हैं कि एकादशी एक देवी थी जिनका जन्म भी

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क्या है आपकी समस्याओं का कारण

जन्मकुंडली के शुभ और अशुभ ग्रहों का प्रभाव हर जातक पर पड़ता है। कुंडली में स्थित ऐसे ग्रहों के कारण जातक को घर-परिवार में कलह (Grah Kalesh) होता रहता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमा के साथ शनि-राहु बैठ गया तो जातक पीड़ित हो जाता है। जिस कारण मन दुखी रहता है। ऐसे जातक में

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विवाह की समस्याओं को कैसे करें दूर

हर माता-पिता अपने पुत्र-पुत्री के लिए योग्य वर ढुंढना तो पहले से ही शुरु कर देते हैं। लेकिन विवाह (Marriage) के लिए शुभ समय, शुभ मुहूर्त का इंतजार करते हैं। उनका यह इंतजार उनकी चिंता बढ़ाता हैं। हर वो लड़की-लड़का जो अपने जीवन के सबसे सुनहरे पल का बेसबरी से इंतजार कर रहे होते है।

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12 मुखी रुद्राक्ष से प्राप्त होती है सूर्य की कृपा

बारह मुखी रुद्राक्ष (12 mukhi rudraksha) भगवान महा विष्णु का स्वरुप माना गया है| बारह आदित्यों का तेज इस रुद्राक्ष में सम्माहित है इसलिए भगवान सूर्य देव की विशेष कृपा का भी पात्र है यह रुद्राक्ष| बारह मुखी रुद्राक्ष धारण करने मात्र से असाध्य व भयानक रोगों से मुक्ति मिलती है | ह्रदय रोग, उदार

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कैसे हुई माता अन्नपूर्ण की उत्पत्ति

मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को सुख-सौभाग्य तथा समृद्धि को देने वाली माँ  ‘अन्नपूर्णा जयंती’ (Annapurna Jayanti) हर्ष और उल्लास के साथमनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि प्राचीन काल में एक बार जब पृथ्वी पर अन्न की कमी हो गयी थी, तब माँ पार्वती (गौरी) ने अन्न की देवी, ‘माँ अन्नपूर्णा’ के रूप में अवतरित

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कौन है स्कंद, क्या होती है स्कंद षष्टि

यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र स्कंद को समर्पित होने के कारण स्कंद षष्ठी (Skanda Sashti) के नाम से जाना जाता है। जैसे गणेश जी के लिए महीने की चतुर्थी के दिन पूजा–अर्चना की जाती है उसी प्रकार उनके बड़े भाई कार्तिकेय या स्कंद के लिए महीने की षष्ठी के दिन उपवास

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