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रति काम महोत्सव – उत्सव प्रेम का

शास्त्रों में कामदेव के शरीर के अलग-अलग भागों को विभिन्न संज्ञाएं दी गई हैं । कामदेव के नयनों को बाण या तीर, भौहों को कमान की संज्ञा दी है । ये शांत होती हैं, लेकिन इशारों में ही अपनी बात कह जाती हैं।...

Basant Panchami – How to get blessed from Saraswati

Basant Panchami is a very holy festival and of immense importance for both art lovers and academicians. On this auspicious day people begin house construction, inaugurate factories, perform Mundan and...

भौमवती अमावस्या करें ये सब कार्य, होगा गौ दान जितना पुण्य

 श्री मंगलयंत्रम् ऊँ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः मंगलवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को भौमवती अमावस्या कहा जाता है । देव ऋषी व्यास के अनुसार इस तिथि को सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक की अवधि में...

रंगपंचमी भारत के अलग जगहों में किस तरह से मनाई जाती है |

चाहे मथुरा, वृंदावन, बरसाने और बनारस की बात ले लें या फिर बारबंकी में सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की दरगाह की, भारत के हर कोने में अलग-अलग सभ्यताओं का मिलन देखने को मिलता है | चैत्र माह के कृष्ण पक्ष...

हर रंग का क्या महत्व होता है |

होली आई बहार लाई, संग रंगों की बौछार लाई लाल गुलाबी हरा नीला, और सब है यहां पीला-पीला होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है। यह प्रकृति, शरीर और ब्रह्मांड की ऊर्जा का उत्सव है। वैदिक दर्शन के अनुसार, यह...

हिन्दू परम्परा में क्या है तिलक का महत्व

मस्तक पर तिलक लगाना हिन्दु परम्परा में बहुत ही शुभ माना जाता है । तिलक को सात्विकता का प्रतीक माना जाता है । हिंदू संस्कृति में किसी भी शुभ काम की शुरुआत के लिये सबसे पहले तिलक लगाने की परंपरा होती...

चैतन्य महाप्रभु जयंती – कौन है चैतन्य महाप्रभु

वौष्णवों के गौड़ीय संप्रदाय की आधारशिला रखने वाले चैतन्य महाप्रभु भक्तिकाल के प्रमुख कवियों में से एक थे, जो वैष्णव धर्म के भक्ति योग के प्रचारक भी रहे हैं । इनका जन्म 1486 में फाल्गुन शुक्ल पक्ष की...

शुक्र प्रदोष व्रत और शनि प्रदोष व्रत

सौभाग्य, समृद्धि और कल्याण शुक्र प्रदोष व्रत हिंदू धर्म के अनुसार, कलियुग में प्रदोष व्रत अति मंगलकारी और शिव कृपा प्रदान करने वाला होता है । प्रदोष व्रत हर महीने दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को पड़ता...

याज्ञवल्कय जयंती – कौन थे याज्ञवल्कय, क्यों उन्हें याज्ञिक सम्राट कहा जाता है |

ब्रह्मज्ञानी, महान अध्यात्मवेत्ता, अच्छे वक्ता, योगी, धर्मात्मा और तेजस्वी युग दार्शनिक जैसे गुणों से भरपूर याज्ञवल्कय जी भारतीय ऋषियों की परंपरा के अग्रणी ऋषि हुए हैं । याज्ञवल्कय जी के जन्म दिवस को...