हिंदू शास्त्रों में मंगल ग्रह (Mangal Yantra) को नवग्रहों में सबसे शक्तिशाली माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जिस व्यक्ति

पुखराज का उपरत्‍न सुनेला, पीले-भूरे रंग का होता है। इस रत्‍न की चमक उगते सूरज के समान होती है। वैदिक ज्‍योतिष के

पौराणिक कथाओं के अनुसार एकादशी व्रत कथा व महत्व हर हिन्दू धर्म से जुड़ा हुआ व्यक्ति जानता होगा । हर मास की

राम और रामायण आदि काल से लोगों की आस्‍था का केन्‍द्र रहे हैं। रामायण की माने तो लंकेश रावण को मार कर

जन्मकुंडली के शुभ और अशुभ ग्रहों का प्रभाव हर जातक पर पड़ता है। कुंडली में स्थित ऐसे ग्रहों के कारण जातक को

हर माता-पिता अपने पुत्र-पुत्री के लिए योग्य वर ढुंढना तो पहले से ही शुरु कर देते हैं। लेकिन विवाह (Marriage) के लिए

बारह मुखी रुद्राक्ष (12 mukhi rudraksha) भगवान महा विष्णु का स्वरुप माना गया है| बारह आदित्यों का तेज इस रुद्राक्ष में सम्माहित

मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को सुख-सौभाग्य तथा समृद्धि को देने वाली माँ  ‘अन्नपूर्णा जयंती’ (Annapurna Jayanti) हर्ष और उल्लास के साथमनाया जाता

यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र स्कंद को समर्पित होने के कारण स्कंद षष्ठी (Skanda Sashti) के नाम से

मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव की जयंती (Kaal Bhairav Jayanti) के रूप में मनाया जाता है। इसे

कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरु नानक जी (Guru Nanak Ji) का जन्मदिन मनाया जाता है| 15 अप्रैल 1469 को पंजाब के तलवंडी

भारतीय धर्म ग्रंथों के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी का दिन भागवत गीता (Bhagwat Geeta) जयंती के रूप में प्रति वर्ष