हर माता-पिता अपने पुत्र-पुत्री के लिए योग्य वर ढुंढना तो पहले से ही शुरु कर देते हैं। लेकिन विवाह (Marriage) के लिए

बारह मुखी रुद्राक्ष (12 mukhi rudraksha) भगवान महा विष्णु का स्वरुप माना गया है| बारह आदित्यों का तेज इस रुद्राक्ष में सम्माहित

मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को सुख-सौभाग्य तथा समृद्धि को देने वाली माँ  ‘अन्नपूर्णा जयंती’ (Annapurna Jayanti) हर्ष और उल्लास के साथमनाया जाता

यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र स्कंद को समर्पित होने के कारण स्कंद षष्ठी (Skanda Sashti) के नाम से

मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव की जयंती (Kaal Bhairav Jayanti) के रूप में मनाया जाता है। इसे

कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरु नानक जी (Guru Nanak Ji) का जन्मदिन मनाया जाता है| 15 अप्रैल 1469 को पंजाब के तलवंडी

भारतीय धर्म ग्रंथों के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी का दिन भागवत गीता (Bhagwat Geeta) जयंती के रूप में प्रति वर्ष

भारत में अनेकों राज्यों में विवाह पंचमी (Vivah Panchami) को बड़ी धूमधाम व हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। पौराणिक

छठ व्रत कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। भविष्य पुराण के अनुसार भगवान सूर्य देव को

दिवाली (Diwali Dhan Varsha) एक ऐसा त्यौहार है जिसे सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया बढ़े हर्ष और भक्तिभाव से

भारतीय धर्म ग्रंथों में चन्द्रमा की 16वीं कला को ‘अमा’ कहा गया है। चन्द्रमंडल की ‘अमा’ नाम की महाकला है जिसमें चन्द्रमा

दूज पर्व, भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और स्नेह का प्रतीक है। भाई दूज (Bhai Duj) या भैया दूज पर्व को भाई टीका,