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दशहरे की पवित्र परंपरा : शुभता के प्रतीक नीलकंठ के दर्शन नीलकंठ तुम नीले रहियो दूध-भात का भोजन करियो हमरी बात राम से कहियो इस लोकोक्ति के अनुसार नीलकंठ पक्षी को भगवान का प्रतिनिधि माना गया है।दशहरा...
नवम नवदुर्गा: माता सिद्धिदात्री नवरात्रि के नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। सिद्ध माने मोक्ष और माँ सिद्धिदात्री माने मोक्ष प्रदान करने वाली। नवरात्र में विशेष तौर पर मां के नौ...
अष्टम नवदुर्गा: माता महागौरी नवरात्रि के आठवें दिन माँ महागौरीजी की पूजा करी जाती है। मान्यताओं के अनुसार भगवान् शिव जी की तपस्या करते हुए माँ का शरीर धूल भरा हो गया | यह देख शिव जी बहुत ही प्रसन्न...
छठा नवदुर्गा : देवी कात्यायनी नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की आराधना की जाती है। महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या के फल स्वरुप में माँ ने कात्यायन के घर जन्म लिया जिसके कारण माता रानी का नाम...
स्कंदमाता रानी की चार भुजाएं हैं जिनमें से माता रानी ने अपने दो हाथों में कमल का फूल पकड़ा हुआ है। उनकी एक भुजा ऊपर की ओर उठी हुई है, जिससे माता रानी भक्तों को आशीर्वाद देती हैं और एक हाथ से उन्होंने...
चतुर्थी नवदुर्गा: माता कूष्मांडा नवरात्र के चौथे दिन माँ कुष्मांडा की आराधना की जाती है। अपनी छोटी सी हसी से ब्राह्मण की रचना करने के कारण माता का नाम कुष्मांडा पड़ा। माँ कुष्मांडा की 8 भुजाये है जिसके...
माँ दुर्गा जी का तीसरा स्वरुप माँ चंद्रघंटा है। माता चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटा के आकार का आधा चंद्र है जिसके कारण इन्हे चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि माता के घंटे से सभी दुष्ट...
द्वितीय नवरात्र : माता ब्रह्मचारिणी नवरात्री में माता रानी के नौ स्वरुपों में दूसरा स्वरुप है माँ ब्रह्मचारिणी। माँ ब्रह्मचारिणी जी का विवाह शिव जी से होने के कारण माता रानी का नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा।...
नवरात्रि का प्रथम दिन अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। इस दिन माँ दुर्गा के पहले स्वरूप – माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है। शैलपुत्री माता को नवदुर्गा का प्रथम रूप कहा जाता है और इनकी उपासना से...
