वरुथिनी एकादशी व्रत विधि 2026 तिथि

वरुथिनी एकादशी व्रत विधि 2026: तिथि, कथा, महत्व

वरुथिनी एकादशी, जो वैशाख कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है, आध्यात्मिक शक्ति, पापों के नाश और समृद्धि का पर्व है। वर्ष 2026 में यह व्रत 13 अप्रैल, सोमवार को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किया गया उपवास जीवन की नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सुख और शांति का रास्ता खोलता है।

यह दिन भगवान विष्णु की कृपा पाने और अपने कर्मों को शुद्ध करने का एक अच्छा मौका माना जाता है।

यदि आप अपने जीवन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं,
तो विश्व के सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषाचार्य से संपर्क करें।

वरुथिनी एकादशी 2026 की तिथि

वरुथिनी एकादशी 2026 की तिथि है – सोमवार, 13 अप्रैल 2026।

पंचांग के अनुसार:

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 अप्रैल 2026, रात 11:24 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 13 अप्रैल 2026, रात 09:32 बजे

उदय तिथि के अनुसार 13 अप्रैल को व्रत रखा जाएगा। यह दिन साधना, दान और भगवान विष्णु की पूजा के लिए बहुत शुभ है।

वरुथिनी एकादशी 2026 का मुहूर्त

सही समय पर पूजा और व्रत का पालन करने से फल बढ़ जाता है।

वरुथिनी एकादशी 2026 का मुहूर्त:

  • व्रत दिवस: 13 अप्रैल 2026 (सोमवार)
  • वरुथिनी एकादशी व्रत पारण समय: 14 अप्रैल 2026, सुबह 06:11 बजे से 08:42 बजे तक

पारण का समय विशेष महत्व रखता है। समय पर व्रत खोलना शुभ फल देता है।

वरुथिनी एकादशी का महत्व

वरुथिनी एकादशी का महत्व बहुत गहरा है। “वरुथिनी” शब्द का मतलब है — रक्षा करने वाली। यह एकादशी भक्तों को दुख, दरिद्रता और नकारात्मक प्रभावों से बचाती है।

मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से:

  • पापों का नाश होता है
  • आर्थिक स्थिति में सुधार होता है
  • वैवाहिक जीवन में सुख बढ़ता है
  • मानसिक शांति प्राप्त होती है

यह दिन आत्मचिंतन और सकारात्मक संकल्प लेने का भी है।

वरुथिनी एकादशी के व्रत नियम

व्रत का पूरा फल पाने के लिए वरुथिनी एकादशी के व्रत नियमों का पालन करना चाहिए:

  • प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
  • चावल, गेहूं और तामसिक भोजन का त्याग करें।
  • दिनभर भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करें।
  • क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
  • सामर्थ्य अनुसार दान करें।
  • फलाहार या निर्जल व्रत श्रद्धा और स्वास्थ्य के अनुसार रखा जा सकता है।

वरुथिनी एकादशी पूजा विधि

वरुथिनी एकादशी पूजा विधि सरल और प्रभावी है:

  • घर के मंदिर को स्वच्छ करें।
  • भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • तुलसी दल, पीले फूल और प्रसाद अर्पित करें।
  • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
  • शाम को आरती और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

भक्ति और श्रद्धा ही पूजा की आत्मा हैं।

वरुथिनी एकादशी की कथा

वरुथिनी एकादशी की कथा में राजा मान्धाता ने इस व्रत के प्रभाव से अपने जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति पाई थी। यह कथा सिखाती है कि सच्ची निष्ठा और अनुशासन से भाग्य बदला जा सकता है। इस दिन कथा सुनना और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करना बहुत शुभ माना जाता है।

वरुथिनी एकादशी के उपाय

कुछ सरल वरुथिनी एकादशी के उपाय जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं:

  • तुलसी के पौधे में दीपक जलाएं।
  • जरूरतमंदों को अन्न दान करें।
  • गाय को हरा चारा खिलाएं।
  • घर में विष्णु मंत्रों का जप करें।

इन उपायों से ग्रह दोषों का प्रभाव कम होता है और समृद्धि बढ़ती है।

यदि आप जानना चाहते हैं कि यह एकादशी आपके जीवन और ग्रह दशा पर कैसे असर डालेगी, तो अपनी कुंडली का विश्लेषण जरूर कराएं।

प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य Acharya Indu Prakash के मार्गदर्शन में आपको मिलती हैं:

  • विस्तृत वार्षिक भविष्यवाणी
  • व्यक्तिगत कुंडली विश्लेषण
  • ग्रह दोष निवारण उपाय
  • पूजा सामग्री और आध्यात्मिक उत्पाद

अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले सही सलाह लें। अभी अपॉइंटमेंट बुक करें और विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्राप्त करें।

निष्कर्ष

एकादशी 2026 में आने वाली वरुथिनी एकादशी, 13 अप्रैल 2026 को, आध्यात्मिक उन्नति और आत्मशुद्धि का एक अच्छा मौका है। सही मुहूर्त, व्रत नियम और पूजा विधि का पालन करके आप अपने जीवन में सुख, समृद्धि और शांति ला सकते हैं।

इस पावन दिन पर श्रद्धा से व्रत रखें, कथा सुनें और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करें।

Leave a Comment