केतु किस भाव में क्या फल देता है

केतु किस भाव में क्या फल देता है?

ज्योतिष में केतु को रहस्यमय ग्रह माना जाता है। यह पूर्व जन्म के कर्मों और वैराग्य से जुड़ा होता है। यह ऐसा ग्रह है जो न तो पूरी तरह शुभ होता है, न ही हमेशा अशुभ। कुंडली में केतु का प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस भाव में स्थित है और किन ग्रहों से दृष्ट या युति में है। सही Kundli Analysis के बिना केतु के फल को समझना अधूरा रहता है। भारत के कई विद्वान ज्योतिषाचार्यों में (best astrologer in India) – आचार्य इंदु प्रकाश जी के अनुसार, केतु जीवन में अचानक बदलाव, आध्यात्मिक झुकाव और कर्मों का परिणाम देता है। केतु का भाव अनुसार फल – एक संपूर्ण दृष्टि जब हम यह समझते हैं कि केतु किस भाव में क्या देता है, तब जीवन के उतार-चढ़ाव का कारण भी स्पष्ट होने लगता है।

केतु किस भाव में शुभ होता है ?

केतु इन भावों में शुभ फल देता है:

  • • 6वें भाव में – शत्रुओं पर विजय
    • 8वें भाव में – गुप्त ज्ञान
    • 12वें भाव में – वैराग्य और साधना

इसीलिए ज्योतिष में कहा जाता है कि कुंडली में केतु कहां अच्छा होता है, यह व्यक्ति के कर्म और दृष्टिकोण पर भी निर्भर करता है।

केतु किस स्थिति में अशुभ होता है?

1st, 2nd और 7th भाव में केतु अक्सर मानसिक उलझन, पारिवारिक दूरी और रिश्तों में ठंडापन ला सकता है। यही कारण है कि लोग पूछते हैं – केतु किस भाव में अशुभ होता है। इसका उत्तर भाव, राशि और दशा तीनों से जुड़ा है।

कुंडली में केतु किस भाव में शादी खराब करता है ?

यदि केतु 7वें भाव में हो, तो वैवाहिक जीवन में भावनात्मक दूरी, गलतफहमियाँ और असंतोष देखने को मिल सकता है। केतु किस भाव में शादी खराब करता है – इसका सीधा उत्तर है 7वां भाव, खासकर जब शुक्र या चंद्र कमजोर हों।

स्थिति केतु किस भाव में धन देता है?

केतु 2वें या 11वें भाव में अचानक धन तो देता है, लेकिन स्थिरता नहीं देता। इसलिए कहा जाता है कि केतु किस भाव में धन देता है, वह धन कर्मजन्य होता है, न कि स्थायी सुख का स्रोत।

किस भाव में केतु मोक्ष देता है?

  • 12वें भाव में स्थित केतु व्यक्ति को सांसारिक मोह से दूर कर सकता है। 
  • ध्यान , साधना और सेवा की ओर झुकाव बढ़ता है।
  • इसी भाव को लेकर कहा जाता है – केतु किस भाव में मोक्ष देता है।

केतु दोष किस भाव से बनता है?

जब केतु लग्न, सप्तम या चतुर्थ भाव में पीड़ित अवस्था में हो, तब केतु दोष किस भाव से बनता है यह प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे में जीवन में अस्थिरता, निर्णय की कमी और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।

कुंडली में केतु का प्रभाव क्यों अलग-अलग होता है?

हर व्यक्ति की जन्म कुंडली अलग होती है। इसलिए कुंडली में केतु का प्रभाव भी अलग दिखता है। यही कारण है कि बिना व्यक्तिगत Kundli Analysis के किसी निष्कर्ष पर पहुँचना गलत हो सकता है।

आचार्य इंदु प्रकाश जी से केतु दोष और उपाय

आचार्य इंदु प्रकाश जी के मार्गदर्शन में केतु से जुड़े उपाय, मंत्र, रुद्राक्ष और यंत्र व्यक्ति की कुंडली के अनुसार बताए जाते हैं। सामान्य उपाय नहीं, बल्कि चार्ट-आधारित समाधान ही स्थायी राहत देते हैं। 

Book Appointment करके आचार्य जी से व्यक्तिगत परामर्श लें और जानें कि आपकी कुंडली में केतु आपको क्या सिखाना चाहता है।

निष्कर्ष

केतु डराने वाला ग्रह नहीं, बल्कि जागृत करने वाला ग्रह है। जब हम समझ जाते हैं कि केतु किस भाव में क्या फल देता है, तब जीवन की उलझनें भी सीख में बदल जाती हैं। सही मार्गदर्शन, सही समय और सही उपाय, +यही केतु की चुनौती को वरदान बना सकता है।

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