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मदन द्वादशी – कैसे करें चिरंजीवी पुत्र पाने का व्रत

संतान प्राप्ति, वंश वृद्धि और पारिवारिक सुख केवल व्रत से ही नहीं, बल्कि सही Kundli Analysis से भी जुड़ा होता है।
जब कुंडली में संतान योग कमजोर हो या ग्रह दोष उपस्थित हों, तब मदन द्वादशी व्रत जैसे शास्त्र सम्मत उपाय विशेष फल देते हैं।
इसी कारण World’s Best Astrologer द्वारा कुंडली विश्लेषण के बाद इस व्रत को करने की सलाह दी जाती है।

मदन द्वादशी क्या है?

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को किया जाने वाला यह पावन व्रत मदन द्वादशी कहलाता है।
इस दिन कामदेव (मदन) और माता रति की विशेष पूजा की जाती है। काम पूजन की प्रधानता के कारण ही इस व्रत का यह नाम पड़ा।

यह व्रत विशेष रूप से पुत्र प्राप्ति, संतान सुख, वंश वृद्धि और पारिवारिक समृद्धि के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।

पौराणिक कथा: दिति का पुत्र शोक

प्राचीन काल में हुए देव–असुर संग्राम में देवताओं द्वारा संपूर्ण दैत्य कुल का संहार कर दिया गया।
इस युद्ध में माता दिति के सभी पुत्र मारे गए, जिससे वह गहरे दुःख में डूब गईं।

दुखी होकर दिति ने सरस्वती नदी के तट पर अपने पति महर्षि कश्यप की कठोर तपस्या आरंभ की।
सौ वर्षों की तपस्या के बाद भी जब उनकी कामना पूर्ण नहीं हुई, तब उन्होंने ऋषियों से पुत्र शोक नाशक व्रत के विषय में पूछा।

मदन द्वादशी व्रत का विधान

महर्षि वसिष्ठ ने दिति को मदन द्वादशी व्रत का विधान बताया।
दिति ने—

  • प्रत्येक द्वादशी को व्रत रखा
  • कामदेव और माता रति की विधिपूर्वक पूजा की
  • पूरे वर्ष नियमपूर्वक इस व्रत का पालन किया

वर्ष की तेरहवीं द्वादशी को विशेष अनुष्ठान किया गया।

व्रत का फल और महर्षि कश्यप का वरदान

अनुष्ठान पूर्ण होते ही महर्षि कश्यप स्वयं प्रकट हुए
दिति ने उनसे अत्यंत पराक्रमी पुत्र का वरदान माँगा।
महर्षि ने कहा—

“तुम्हें एक हजार वर्षों तक पवित्रता पूर्वक तपोवन में रहना होगा।”

इंद्र की चाल और व्रत की दिव्य शक्ति

इंद्र को भय हुआ कि शक्तिशाली असुर जन्म ले सकता है।
उन्होंने सेवा के बहाने दिति के पास रहकर उनके गर्भ को नष्ट करने का प्रयास किया।
गर्भ के सात टुकड़े हो गए, किंतु मदन द्वादशी व्रत के प्रभाव से वे नष्ट नहीं हुए।

मरुतगण का जन्म और अमरत्व

इन सात टुकड़ों से सात पुत्र उत्पन्न हुए, जिनके सात-सात गण बने।
इस प्रकार उन्नचास मरुतगण अस्तित्व में आए और आकाश में विचरण करने लगे।
इंद्र ने ध्यान से जाना कि यह सब मदन द्वादशी व्रत की शक्ति का परिणाम है।

मदन द्वादशी व्रत का महत्व

यह व्रत—

  • संतान प्राप्ति में सहायक
  • पुत्र को दीर्घायु और पराक्रमी बनाता है
  • वंश वृद्धि और पारिवारिक सुख प्रदान करता है

इसी कारण शास्त्रों में इसे संतान सुख प्रदान करने वाला दिव्य व्रत कहा गया है।

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