मां शीतला का पर्व भारतीय संस्कृति में विश्वास, स्वास्थ्य और संतान खुशी का प्रतीक है। खासतौर पर माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और बीमारी से मुक्ति के लिए यह व्रत करती हैं। अगर आप जानना चाहते हैं कि शीतला अष्टमी 2026 कब है, इसकी पूजा कैसे होती है और संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत कैसे किया जाता है, तो यह लेख आपके लिए है।
शीतला अष्टमी 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि 09 मार्च 2026 को रात 11:27 बजे से शुरू होगी और 11 मार्च 2026 को रात 01:54 बजे खत्म होगी।
उदयातिथि के अनुसार 10 मार्च 2026 को शीतला सप्तमी मनाई जाएगी। पूजा का शुभ समय सुबह 06:24 से शाम 06:26 बजे तक है।
बसोड़ा 2026 तिथि बुधवार, 11 मार्च 2026 को होगी।
शीतला अष्टमी का महत्व
शीतला अष्टमी का महत्व मुख्य रूप से स्वास्थ्य और संतान खुशी से जुड़ा है। इसे मानते हैं कि मां शीतला चेचक, बुखार और अन्य संक्रामक बीमारियों से रक्षा करती हैं।
यह पर्व हमें स्वच्छता, संयम और विश्वास का संदेश देता है। माता की कृपा से घर में सुख-शांति और बच्चों की सुरक्षा बनी रहती है।
संतान प्राप्ति के लिए शीतला अष्टमी व्रत
कई दंपत्तियों को संतान सुख में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में संतान प्राप्ति के लिए शीतला अष्टमी व्रत बेहद फायदेमंद माना जाता है।
इस व्रत के लाभ:
- संतान प्राप्ति में बाधाओं का हल
- गर्भ संबंधी समस्याओं में राहत
- बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा
- परिवार में सकारात्मक ऊर्जा
अगर आपकी कुंडली में संतान का भाव कमजोर है, तो विशेषज्ञ से कुंडली विश्लेषण कराना फायदेमंद रहेगा।
Acharya Indu Prakash ji शीतला अष्टमी व्रत विधि
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य और कई लोगों द्वारा विश्व के सबसे बेहतरीन ज्योतिषियों में से एक माने जाने वाले Acharya Indu Prakash ji के अनुसार शीतला अष्टमी व्रत की विधि इस प्रकार है:
सुबह की तैयारी:
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- साफ वस्त्र पहनें।
- माता शीतला के मंदिर जाएं या घर में पूजा करें।
पूजा के दौरान:
- ठंडा भोग अर्पित करें।
- दीपक और धूप जलाएं।
- शीतला माता व्रत कथा का पाठ करें।
- परिवार और संतान के लिए प्रार्थना करें।
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शीतला अष्टमी भोग
शीतला अष्टमी भोग एक दिन पहले तैयार किया जाता है। इस दिन नया भोजन नहीं पकाया जाता।
मुख्य भोग में शामिल हैं:
- बासी पुड़ी या रोटी
- चावल
- कढ़ी
- मीठा चूरमा या हलवा
- दही
यह परंपरा शीतलता और संयम का प्रतीक है।
शीतला माता मंत्र
पूजा के समय यह सरल शीतला माता मंत्र जपना शुभ माना जाता है:
“ॐ शीतलायै नमः”
साथ ही, शीतला माता व्रत कथा का पाठ करना बहुत जरूरी है।
शीतला माता व्रत कथा
शीतला माता व्रत कथा में कहा गया है कि जो परिवार श्रद्धा से व्रत करता है, उनके घर बीमारी और संकट दूर रहते हैं। जबकि जो लोग नियमों का पालन नहीं करते, उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
कथा हमें सिखाती है कि श्रद्धा और अनुशासन से देवी की कृपा मिलती है।
कुंडली विश्लेषण और ज्योतिषीय उपाय
हर व्यक्ति की कुंडली अलग होती है। अगर संतान प्राप्ति में देरी हो रही है या बच्चों का स्वास्थ्य कमजोर है, तो ग्रह दोष इस समस्या का कारण हो सकता है।
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निष्कर्ष
शीतला अष्टमी 2026 केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मां की ममता और विश्वास का प्रतीक है। इस दिन विधि-विधान से पूजा, व्रत और भोग अर्पित करने से परिवार में सुख और समृद्धि आती है।
अगर आप संतान सुख या पारिवारिक समस्याओं का समाधान चाहते हैं, तो Acharya Indu Prakash ji से परामर्श लेकर सही जानकारी प्राप्त करें।
मां शीतला की कृपा आप और आपके परिवार पर बनी रहे।

