मंगलसूत्र हिंदू विवाह परंपरा का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसे विवाहित स्त्री के सौभाग्य, वैवाहिक बंधन और पति-पत्नी के पवित्र संबंध का चिन्ह माना जाता है। भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में इसके डिज़ाइन और शैली अलग हो सकती है, लेकिन इसका भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्व लगभग समान है।
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, मंगलसूत्र पहनना विवाह की सामाजिक और आध्यात्मिक स्वीकृति का संकेत है। इसे पति की दीर्घायु, दांपत्य सुख और पारिवारिक स्थिरता से भी जोड़ा जाता है। हालांकि, ये मान्यताएँ धार्मिक आस्था पर आधारित हैं।
“विशेष नियम सही ढंग से जानना चाहते हैं?
अभी आचार्य इन्दु प्रकाश जी से परामर्श लें।”
मंगलसूत्र में क्या-क्या होता है?
परंपरागत मंगलसूत्र की संरचना में कुछ विशेष तत्व शामिल माने जाते हैं:
- पीला धागा या सोने की चेन – शुभता और पवित्रता का प्रतीक
- काले मोती (ब्लैक बीड्स) – नज़र दोष से रक्षा का प्रतीक माने जाते हैं
- सोने या धातु का लॉकेट – वैवाहिक बंधन और समृद्धि का प्रतीक
आजकल आधुनिक डिज़ाइनों में बदलाव देखने को मिलते हैं, लेकिन इन पारंपरिक तत्वों का सांकेतिक महत्व अब भी माना जाता है।
मंगलसूत्र का धार्मिक और ज्योतिषीय प्रतीकवाद
धार्मिक मान्यताओं में मंगलसूत्र के विभिन्न भागों को देवताओं और ग्रहों से जोड़ा गया है। यह व्याख्या आस्था पर आधारित है:
- पीले धागे या सोने को बृहस्पति (गुरु) ग्रह का प्रतीक माना जाता है, जो वैवाहिक स्थिरता और सद्भाव से जुड़ा है
- काले मोतियों को नकारात्मक ऊर्जा या बुरी नज़र से रक्षा का प्रतीक माना जाता है
- कुछ परंपराओं में इसके सुनहरे भाग को माता पार्वती और काले भाग को भगवान शिव से जोड़ा जाता है, जो आदर्श दांपत्य का प्रतीक हैं
इन मान्यताओं का उद्देश्य पति-पत्नी के बीच प्रेम, संतुलन और दीर्घकालिक साथ का भाव मजबूत करना है।
मंगलसूत्र से जुड़ी पारंपरिक सावधानियाँ
धार्मिक परंपराओं के अनुसार कुछ बातों का ध्यान रखा जाता है:
- मंगलसूत्र को पति या परिवार की सहमति से खरीदना शुभ माना जाता है
- धारण करने से पहले देवी पार्वती या गृहदेवता के सामने अर्पित करना कई जगहों पर परंपरा का हिस्सा है
- इसे अनावश्यक रूप से उतारने से बचने की सलाह दी जाती है (हालाँकि आजकल कामकाजी जीवन में व्यावहारिकता भी महत्वपूर्ण है)
एक संतुलित दृष्टिकोण
मंगलसूत्र का महत्व केवल ज्योतिष या धार्मिक प्रतीकों तक सीमित नहीं है। यह विश्वास, प्रतिबद्धता और वैवाहिक सम्मान का भी प्रतीक है। दांपत्य जीवन की सफलता केवल आभूषण या परंपरा पर नहीं, बल्कि आपसी समझ, सम्मान और संवाद पर निर्भर करती है।
व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श
यदि आप करियर, विवाह, संतान या जीवन की अन्य समस्याओं को लेकर मार्गदर्शन चाहते हैं, तो कुंडली आधारित सही सलाह लेना बेहतर रहता है।-Book Appointment


